भारत से क्यों दुखी थीं सू ची?

बर्मा की विपक्षी नेता आंग सान सू ची ने बुधवार को भारत और यहां के लोगों से दो बातें स्पष्ट कर दीं.
एक यह कि भारत का साथ न मिलने से उन्हें बहुत दुख हुआ था. दूसरा यह कि उन्हें उम्मीद है कि बर्मा के लोकतंत्र हासिल करने के अंतिम पड़ाव में भारत उनके साथ होगा.
भारत में कई वर्ष रहकर पढ़ाई कर चुकी सू ची 25 साल बाद भारत आई हैं.
नेशनल लीग फ़ॉर डेमोक्रेसी की नेता सू ची 18 नवंबर तक भारत में रहेंगी. बुधवार को दिन में वो भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से भी मिलीं.
नई दिल्ली में भारत के पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की जयंती के मौके पर लेक्चर देते हुए उन्होंने कहा, ''भारत आने पर मुझसे दो सवाल किए गए हैं. भारत से मुझे क्या उम्मीदें हैं और क्या मैं भारत से निराश हूँ.''
बर्मा की सैनिक सरकार से लोहा लेनेवाली सू ची ने कहा, ''हम उम्मीदें नहीं कर सकते. ऐसे ही निराशा की भी हम चाह नहीं कर सकते.''
उन्होंने कहा, ''मैं दुखी थी कि मुश्किल दौर में हम भारत से दूर हो गए थे. बल्कि भारत हमसे दूर हो गया था. लेकिन मुझे भरोसा था यहां की लोगों की दोस्ती पर. मैं मानती हूँ कि दो देशों के बीच दोस्ती वहां के लोगों की दोस्ती पर आधारित होती है न कि सरकारों पर.''
सू ची ने कहा, ''सरकारें तो आती जाती हैं और यही लोकतंत्र का नियम है. जब तक लोग एक दूसरे की इज्ज़त करते हैं और उन्हें समझते हैं, दो देशों में दोस्ती रहती है.''
भारत के लोगों पर उम्मीद जताते हुए उन्होंने कहा, ''हमने अभी लोकतंत्र पूरे तरीके से हासिल नहीं किया है. इस रास्ते के अंतिम और शायद सबसे मुश्किल चरण में भारत के लोगों से उम्मीद है कि वो हमारा साथ देंगे.''
'गांधी से प्रेरित'
सू ची को 1993 में जवाहरलाल नेहरू अवॉर्ड फॉर इंटरनेशनल अंडरस्टैंडिंग से सम्मानित किया गया था. उस समय वो बर्मा की सैनिक सरकार द्वारा अपने घर में नज़रबंद रखी गई थीं.
अपने भाषण में उन्होंने महात्मा गांधी की तारीफ की और जवाहर लाल नेहरू की कई यादें ताज़ा की.
उन्होंने कहा, ''भारतीय नेताओं के शब्दों और कार्यों ने मुझे प्रभावित किया...हमारी लड़ाई महात्मा गांधी से प्रेरित है.''
इससे पहले जवाहर लाल नेहरू मेमोरियल फंड की ओर से उनका स्वागत करते हुए सोनिया गांधी ने कहा कि यह सू ची के लिए घर वापस आने जैसा है.
सोनिया ने सू ची की तारीफ करते हुए कहा, ''महात्मा गांधी की तरह उनकी ज़िंदगी उनका संदेश है...असली ज़िंदगी वो है जिसमें बाकियों की ज़िम्मेदारी उठाने की हिम्मत है.''












