व्यंग्य की ‘मिर्ची’ के साथ सहायता की थाली

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री <link type="page"> <caption> ममता बनर्जी</caption> <url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2012/09/120929_mamta_upa_aa.shtml" platform="highweb"/> </link> ने केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश की लिखी एक चिट्ठी की भाषा को लेकर कड़ी आपत्ति जताई है.
19 अक्टूबर को लिखे इस पत्र में रमेश ने राज्य को 2012-13 में मनरेगा योजना के अंतर्गत 600 करोड़ रुपए देने की बात की थी, लेकिन साथ में ये भी जोड़ दिया कि ये कदम दिखलाता है कि कथित “दिल्ली की मृतप्राय सरकार” पश्चिम बंगाल के लोगों की जरूरतों के लिए कितनी संवेदनशील है.
<link type="page"> <caption> ममता बनर्जी</caption> <url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2012/09/120918_mamta_fdi_da.shtml" platform="highweb"/> </link> ने अपने फेसबुक पेज पर इस पत्र को पोस्ट किया और आलोचना से भरी एक लंबी टिप्प्णी की.
उन्होंने कहा, “ <link type="page"> <caption> पश्चिम बंगाल</caption> <url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2012/10/121018_wb_government_holiday_ss.shtml" platform="highweb"/> </link> के प्रति केंद्र सरकार के रुख से आपको झटका लगेगा. ये वक्तव्य प्रतिशोधी, अनैतिक और असंवैधानिक है. मैं ये देखकर भौचक्का रह गई हूँ कि एक संघीय मंत्री राज्य सरकार को वेस्वाद भाषा में ऐसा पत्र लिख सकता है.”
उन्होंने ऐसी भाषा को राष्ट्रीय लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए खतरा बताया और लोगों से विचार आमंत्रित किए.
इस पत्र को ममता बनर्जी के फेसबुक पन्ने पर सैकड़ों लोगों ने शेयर किया है जबकि कुछ दर्जन ने प्रतिक्रिया भी दी है.
अरिघ्ना मुखर्जी ने उलटे ममता बनर्जी से कहा कि उन्हें दूसरों पर उँगली उठाने से पहले अपने गिरेबान में झांकना चाहिए.
सुमन हाजरा ने कहा कि कोई भी आधिकारिक पत्र इस तरह से नहीं लिखा जाना चाहिए और पश्चिम बंगाल सरकार को इस पत्र को नहीं स्वीकारना चाहिए.
अजीत नाथ ने इस पर प्रदर्शन करने की बात की. सुमित हल्दर ने इस पत्र को बंगाल के गौरव से जोड़ दिया और ममता बनर्जी से कार्रवाई करने को कहा.
देबाशीश शर्मा लिखते हैं कि उन्हें विश्वास नहीं हो रहा है कि ये एक आधिकारिक पत्र है.
ममता बनर्जी ने कहा कि केंद्र सरकार की मनरेगा जैसी योजनाओं के अंतर्गत धन राज्य सरकारों को दिया जाता है, और ये कोई दान नहीं है.












