
अरविंद केजरीवाल ने कहा है कि देश के सभी राजनीतिक दल एक जैसे ही हैं
अब तक अपने आरोपों से कांग्रेस को मुसीबत में डालने वाले अरविंद केजरीवाल ने आरोप लगाया है कि भारतीय जनता पार्टी अध्यक्ष 'नितिन गडकरी का व्यापार किसानों की क़ीमत पर फलफूल रहा है.'
विदर्भ के उन्मेद तालुका के घुरसापुर ग्राम का उदाहरण देते हुए केजरीवाल ने कहा कि वहां के किसानों की 48 हेक्टेयर यानी क़रीब 120 एकड़ ज़मीन को महाराष्ट्र सरकार ने किसानों के हितों को परे रखते हुए नितिन गडकरी को सौंप दी.
उन्होंने आरोप लगाया कि जो बांध किसानों को पानी देने के लिए बनाया गया था उसका पानी नितिन गडकरी की और दूसरे और लोगों की कंपनियों को दिया जा रहा है.
हालांकि टीम केजरीवाल इस सवाल का सीधा कोई जवाब नहीं दे पाई कि गडकरी की संस्था को ज़मीन दिए जाने के मामले में लेन देने कहाँ हुआ है.
मामला
लोकपाल क़ानून के लिए आंदोलन शुरू करने के बाद अब हाल में ही राजनीति में गए अरविंद केजरीवाल ने कहा कि गांव में बांध बनाए जाने के लिए ज़मीन का अधिग्रहण किया गया था, लेकिन बांध तैयार होने के बाद भी काफ़ी ज़मीन बच गई जिसे किसान वापस लेकर खेती करने की मांग कर रहे थे, लेकिन प्रशासन ने ज़मीन का बड़ा हिस्सा नितिन गडकरी की संस्था को सौप दिया.
"ग़लती दो तरह की हुई है. एक क़ानूनी रुप से ग़लत ये है कि ज़मीन का अधिग्रहण सार्वजनिक काम के लिए किया गया था, इसलिए इसे किसी निजी व्यक्ति या कंपनी को नहीं दिया जा सकता है. दूसरी मामला नैतिकता का है कि आप किसानों की ज़मीन छीनकर उस पर ख़ुद खेती कर रहे हैं"
प्रशांत भूषण
दिल्ली में पत्रकारों से बात करते हुए अरविंद केजरीवाल ने कहा, "बिना ये सोचे कि ये ज़मीन किसानों की है जिनके पास रोज़ी-रोटी का यही एक ज़रिया है, नितिन गडकरी ने महाराष्ट्र सरकार के मंत्री अजीत पवार को चिट्ठी लिखी जिनके हस्तक्षेप से बीजेपी अध्यक्ष को वो ज़मीन हासिल हो गई जिसपर वो खेती कर रहे हैं."
केजरीवाल का कहना है कि पहले गडकरी की संस्था को 37 हेक्टेयर ज़मीन दी और फिर बाद में 11 हेक्टेयर ज़मीन और दे दी.
'क़ानूनी तौर पर ग़लत'
बाद में जब एक पत्रकार ने सवाल किया कि इसमें आख़िर ग़लत क्या है, केजरीवाल की राजनीतिक दल के साथी और मशहूर वकील प्रशांत भूषण ने कहा, "ग़लती दो तरह की हुई है. एक क़ानूनी रुप से ग़लत ये है कि ज़मीन का अधिग्रहण सार्वजनिक काम के लिए किया गया था, इसलिए इसे किसी निजी व्यक्ति या कंपनी को नहीं दिया जा सकता है. दूसरी मामला नैतिकता का है कि आप किसानों की ज़मीन छीनकर उस पर ख़ुद खेती कर रहे हैं."
"सरकार पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद विपक्ष को जो ज़मीन मिली है वो उसे न मिले और विपक्षी दलों के वोट बंट जाए ये कांग्रेस की साज़िश और चाल है और ये लोग उसी पर काम कर रहे हैं ऐसा मुझे लगता है"
नितिन गडकरी
प्रशांत भूषण ने पूछा कि जिस पार्टी का अध्यक्ष ख़ुद अपने व्यावासिक फ़ायदे के लिए किसानों का हक़ मार रहा हो वो उनपर हो रहे ज्यादतियों के ख़िलाफ़ आवाज़ कैसे उठाएगा?
अरविंद केजरीवाल ने दावा किया कि राजनेताओं, निजी कंपनियों और ठेकेदारों की मिली भगत और लूट का ही नतीजा है कि विदर्भ में किसान बड़ी संख्या में आत्महत्या कर रहे हैं.
उनका कहना था कि जो बांध वहां बने हैं या तैयार हो रहे हैं उनका पानी बिजली या चीनी मिलों को दे दिया जा रहा है जबकि किसानों को सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध नहीं है.
आरोप बेबुनियाद, कांग्रेस की साज़िश: गडकरी
टीम केजरीवाल के आरोपों का जवाब देने के लिए भाजपा अध्यक्ष ख़ुद पत्रकारों से सामने आए और उन्होंने सभी आरोपों का खंडन किया.
उन्होंने कहा, "जिस संस्था के नाम पर ज़मीन मिली है वह पूर्ति सिंचन के नाम की धर्मार्थ सेवा है. जमीन वेस्ट लैंड की तरह पड़ी थी. तब हमने कहा कि नई किस्म के गन्ने के सैंपल तैयार करके हम किसानों को देते हैं. और हमने नई क़िस्म के गन्ने के सैंपल किसानों को देना शुरु कर दिया. ये किसानों के लाभ के लिए देते हैं."

नितिन गडकरी ने कहा है कि आरोप लगाने वालों को वहाँ जाकर वस्तुस्थिति का पता लगाना था
गडकरी ने कहा, "ये ज़मीन मुझे या मेरी कंपनी को नहीं दिया गया है, ये संस्था को 11 वर्ष की लीज़ पर दी गई है."
बांध का पानी उनकी कंपनी को दिए जाने के आरोप पर उन्होंने कहा, "जहाँ तक पानी का सवाल है बाँध से से सिर्फ़ 0.8 प्रतिशत पानी हम लेते हैं बाक़ी दूसरी कंपनियां लेती हैं और कुछ पानी किसानों को भी जाता है."
उनका कहना था कि वे सिंचाई के लिए लड़ते रहे हैं.
केजरीवाल के इस आरोप पर कि महाराष्ट्र के पूर्व उपमुख्यमंत्री और सिंचाई मंत्री अजीत पवार से उनकी सांठगांठ रही है, उन्होंने कहा, "मैं जिस पार्टी का अध्यक्ष हूँ, उसी पार्टी ने सिंचाई घोटाले को उजागर किया है, मैं दिल्ली में अगर कुछ नहीं बोलता हूँ इसका मतलब नहीं है मैं चुप हूं."
नितिन गडकरी ने कहा, "मैं गाँव, ग़रीब और किसानों के लिए काम करना चाहता हूँ, जिन लोगों ने बिना कुछ देखे मुझे बदनाम करने की कोशिश की, ये दुर्भाग्यपूर्ण है."
इस सवाल पर कि जब किसान अपनी ज़मीन वापस मांग रहे थे तो फिर ज़मीन संस्था ने क्यों ले ली, उन्होंने कहा कि एक ही किसान ने ज़मीन मांगी थी और वो किसान अभी भी अपनी ज़मीन पर खेती कर रहा है.
आख़िर में उन्होंने कहा, "सरकार पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद विपक्ष को जो ज़मीन मिली है वो उसे न मिले और विपक्षी दलों के वोट बंट जाए ये कांग्रेस की साज़िश और चाल है और ये लोग उसी पर काम कर रहे हैं ऐसा मुझे लगता है."
हालांकि वे इस सवाल का जवाब टाल गए कि क्या इसका मतलब ये है कि इंडिया अगेंस्ट करप्शन और कांग्रेस मिलकर काम कर रहे हैं.








