
संजीव भट्ट गुजरात दंगों में मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की भूमिका पर सवाल उठाते रहे हैं.
गुजरात सरकार ने आईपीएस अधिकारी क्लिक करें संजीव भट्ट के खिलाफ तीन में से एक मामले में निलंबन के आदेश को केंद्रीय गृह मंत्रालय की अनुशंसा पर रद्द कर दिया है.
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, क्लिक करें गुजरात के मुख्य गृह सचिव एसके नंदा का कहना है, ''चूंकि भट्ट को दो अन्य मामलों में भी निलंबित किया गया है, इसलिए जब तक ये मामले लंबित हैं, तब तक उनका निलंबन जारी रहेगा.''
गुजरात दंगों में मुख्यमंत्री क्लिक करें नरेंद्र मोदी की मिली-भगत का आरोप लगाने वाले भट्ट को गृह विभाग ने अखिल भारतीय सेवाओं में अनुशासन और अपील संबंधी नियमों के तहत निलंबित किया था.
संजीव भट्ट को निलंबित करने की मुख्य वजह ये बताई गई थी कि वे अपनी ड्यूटी से बिना बताए गैर हाजिर रहे, वे एक विभागीय समिति के समक्ष पेश नहीं हुए और जूनागढ़ में एसआरपी ट्रेनिंग स्कूल में प्रिंसीपल पद पर रहते हुए उन्होंने सरकारी वाहन का कथित दुरुपयोग किया.
उनके खिलाफ एक आपराधिक मामला भी दर्ज है जिसमें उन पर अपने पूर्व सिपाही को जबरन हलफनामा देने के लिए मजबूर करने का आरोप है.
संजीव भट्ट का कहना है कि गुजरात सरकार नहीं चाहती कि कोई भी गवाह राज्य में 2002 में हुए दंगों के मामले में मोदी सरकार के ख़िलाफ़ अपनी आवाज़ उठाए.








