सरकार की नीतियों के विरुद्ध विपक्ष सड़क पर उतरा

डीजल के दामों में वृद्धि, रसोई गैस पर सब्सिडी घटाने और खुदरा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की अनुमति के विरोध में भारत बंद और राष्ट्रव्यापी हड़ताल हो रही है.
गुरुवार को इस हड़ताल में विपक्षी पार्टियों के अलावा सरकार का साथ दे रही डीएमके और समाजवादी पार्टी के साथ ही दो दिन पहले तक यूपीए की अहम सहयोगी रही तृणमूल कांग्रेस भी हिस्सा ले रही है.
सरकार ने पिछले हफ्ते डीजल की कीमतों में 5 रुपये की वृद्धि करने के अलावा प्रत्येक परिवार को साल में सब्सिडी वाले सिर्फ छह रसोई गैस सिलेंडरों की सीमा तय कर दी है. साथ ही खुदरा क्षेत्र और नागरिक उड्डयन क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को अनुमति दे दी.
सरकार जहाँ इन फैसलों को आर्थिक सुधारों की दिशा में अहम कदम बता रही है, वहीं विपक्ष इन्हें जनविरोधी करार दे रहा है.
कौन-कौन विरोध में
मुख्य विपक्षी गठबंधन राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन ने सरकार के हालिया फैसलों के विरोध में गुरुवार को भारत बंद का आयोजन किया है. इस गठबंधन की सबसे बड़ी पार्टी भाजपा के प्रवक्ता प्रकाश जावडेकर का दावा है, “भारत बंद जबरदस्त सफल होगा.”

इसके अलावा गुरुवार को यूपीए सरकार की नीतियों के विरोध में सड़क पर उतरने वालों में समाजवादी पार्टी, मार्क्सवादी पार्टी, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, तेलुगु देशम पार्टी, बीजू जनता दल, जनता दल सेक्लुर, फॉरवर्ड ब्लॉक और आरएसपी भी शामिल हैं.
ताजा आर्थिक फैसलों पर कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार का साथ छोड़ने वाली ममता बनर्जी ने भी गुरुवार को सरकार की नीतियों का विरोध करने का एलान किया है. यूपीए सरकार में शामिल डीएमके भी इस राष्ट्रव्यापी हड़ताल में हिस्सा ले रही है.
'ज्यादातर सांसद खिलाफ'
सीपीएम का कहना है कि हालिया आर्थिक फैसलों के कारण यूपीए में होने वाला बिखराव दिखाता है कि सरकार की नीतियों को व्यापक राजनीतिक समर्थन प्राप्त नहीं है.
सीपीएम की एक विज्ञप्ति के मुताबिक, “यूपीए में शामिल में कांग्रेस के सहयोगियों के रुख से साफ हो गया है कि ज्यादातर सांसद इन नीतियों के खिलाफ हैं.”
अखिल भारतीय व्यापारी परिसंघ (सीएआईटी) ने भी भारत बंद का आह्वान किया है. परिसंघ की विज्ञाप्ति में कहा गया है कि गुरुवार को कोई व्यापारिक गतिविधि नहीं होगी और 25 हजार से ज्यादा व्यापार संघ भारत बंद में शामिल होंगे.

दिल्ली में जंतर मंतर पर सीएआईटी के विरोध प्रदर्शन में जनता दल (यू) के प्रमुख शरद यादव, भाजपा नेता मुरली मनोहर जोशी, सीपीएम महासचिव प्रकाश करात और सीपीआई नेता एबी बर्धन शामिल होंगे.
सरकार निश्चिंत
व्यापक विरोध के बावजूद सरकार को फिलहाल कोई खतरा नहीं नजर आता. तृणमूल कांग्रेस के अलग होने के बावजूद यूपीए सरकार को समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी बाहर से समर्थन दे रही हैं.
हालांकि समाजवादी पार्टी खुदरा क्षेत्र में विदेशी निवेश का विरोध कर रही है लेकिन उसने सरकार से समर्थन वापस लेने का अभी कोई संकेत नहीं दिया है जबकि बसपा प्रमुख मायावती इस सिलसिले में अगले महीने अपने पार्टी के नेताओं से चर्चा करने वाली हैं.
लेकिन सरकार के माथे पर अभी ज्यादा चिंता की लकीरें नहीं दिखतीं. वित्त मंत्री पी चिदंबरम साफ कर चुके हैं कि हालिया आर्थिक फैसलों में से किसी को भी वापस नहीं लिया जाएगा.












