
रुश्दी 2012 में जयपुर साहित्यिक उत्सव में भाग नहीं ले पाए थे
भारतीय मूल के ब्रितानी लेखक सलमान रुश्दी का कहना है कि 1988 में उनकी किताब ‘सैटेनिक वर्सेज’ पर भारत ने बिना किसी जांच पड़ताल के जल्दबाजी में रोक लगा दी थी.
सलमान रुश्दी ने अपने आगामी संस्मरण जोसफ एनटॉन के बारे में चर्चा करते हुए ये बात कही, जिसके कुछ हिस्से ‘द न्यूयार्कर’ पत्रिका में छपे हैं.
कई मुसलमानों का मानना हैं कि ‘सैटेनिक वर्सेज’ किताब इशनिंदक हैं और इस किताब पर अब भी भारत में रोक लगी हुई है.
सलमान रुश्दी को मिडनाइट्स चिल्डर्न किताब के लिए 1981 में बुकर पुरस्कार से सम्मानित किया गया था.
'सलमान हैदर ने फोन पर बताया'
"ये रोक शायद वित्त मंत्रालय की ओर से लगाई हई है. कस्टम एक्ट की धारा 11 के तहत इस किताब को भारत में आयात करने पर रोक है. वित्त मंत्रालय की ओर से कहा गया हैं कि ये रोक बिना किसी साहित्यिक या कालात्मक आधार के लगाई गई है"
सलमान रश्दी, ब्रिटिश लेखक
सलमान रुश्दी को कई साल भूमिगत रहना पड़ा था जब ईरान के तत्कालीन सर्वोच्च नेता आयोतुल्लाह खोमेईनी ने उनको जान से मार देने का फतवा जारी किया था.
अपने संसमरण में रुश्दी ने लिखा हैं कि छह अक्तूबर 1988 को लंदन में उस समय भारत के उप उच्चायुक्त और उनके दोस्त सलमान हैदर ने फ़ोन कर उन्हें भारत सरकार की ओर से इस फ़ैसले के बारे में आधिकारिक जानकारी दी.
रुश्दी लिखते हैं, किताब के बारे में किसी आधिकारिक संस्था की ओर से कोई जांच पड़ताल नहीं की गई और ना ही किसी न्यायिक प्रक्रिया ने उसकी समीक्षा की.
रुश्दी ने लिखा है, ये रोक शायद वित्त मंत्रालय की ओर से लगाई गई. कस्टम एक्ट की धारा 11 के तहत इस किताब को भारत में आयात करने पर रोक है...हैरानी ये कि वित्त मंत्रालय की ओर से कहा गया हैं कि इस रोक को किताब की साहित्यिक या कालात्मक गुणवत्ता पर टिप्पणी ने माना जाए.
सलमान रुश्दी ने वित्त मंत्रालय की इस व्याख्या पर मन ही मन कहा - "धन्यवाद !"
जनवरी 2012 में सलमान रुश्दी जयपुर साहित्यिक उत्सव में आने वाले थे लेकिन उनके सूत्रों ने उनकी जान पर खतरा बताया था जिसके बाद उन्होंने अपनी यात्रा रद्द कर दी थी.








