
पदोन्नति में आरक्षण के मुद्दे पर सहमति भले ही हो लेकिन जब संसद में संशोधन आएगा तब राजनीतिक दलों के रुख पर सबकी नज़र होगी
सरकारी नौकरियों में अनुसूचित जाति और जनजाति के लोगों को पदोन्नति में आरक्षण को लेकर संविधान संशोधन के मुद्दे पर लगभग सभी दलों में सहमति बन गई है.
उल्लेखनीय है कि नौकरियों में पदोन्नति का मसला काफी पेचीदा रहा है और अप्रैल के महीने में सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार के इस फैसले को खारिज कर दिया था जिसमें राज्य सरकार ने पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लोगों को पदोन्नति में आरक्षण देने की घोषणा की थी.
उत्तर प्रदेश सरकार ने यह घोषणा पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के शासनकाल में की थी.
इसी कारण अब सरकार इस मुद्दे पर संविधान में संसोधन लाने की कोशिश कर रही है जिसके लिए मंगलवार को सर्वदलीय बैठक आयोजित की गई थी.
प्रमुख विपक्षी दल बीजेपी का कहना है कि वो कमजोर तबके के लोगों को ताकत दिलाने के पक्ष में है लेकिन उन्होंने कहा कि सरकार को संवैधानिक और क़ानूनी पक्षों को ध्यान में रखना चाहिए.
समाजवादी पार्टी को आपत्ति
सरकार को समर्थन दे रहे दल समाजवादी पार्टी ने हालांकि पदोन्नति में आरक्षण को लेकर आपत्ति जताई थी.
समाजवादी पार्टी का कहना है कि अगर एससी और एसटी को आरक्षण मिला तो इससे ओबीसी समुदाय को काफी नुकसान हो सकता है.
ऐसा माना जाता है कि समाजवादी पार्टी का एक बड़ा वोट बैंक ओबीसी समुदाय से आता है.
पदोन्नति में आरक्षण के मुद्दे पर संविधान संशोधन को लेकर वाम दलों ने भी सरकार का समर्थन किया है लेकिन कहा है कि जो भी संसोधन हो वो संवैधानिक रुप से आगे चलाने लायक भी होना चाहिए.
अभी ये साफ नहीं है कि सरकार मानसून सत्र में ही ये संसोधन लाएंगे या इसके लिए अगले सत्र का इंतजा़र किया जाएगा.
प्रधानमंत्री का कहना था कि सभी दलों ने बहुत अच्छे सुझाव दिए हैं और कोशिश हो रही कि वैधानिक रुप से ऐसा संशोधन लाया जाए तो लंबे समय तक चल सके.
नौकरियों में पदोन्नति का मामला काफी विवादास्पद रहा है और इसको लेकर काफी राजनीति होती रही है. पदोन्नति ही नहीं बल्कि कई समूह पूरी आरक्षण व्यवस्था का भी विरोध करते रहे हैं लेकिन कोई भी राजनीतिक दल खुल कर इसका विरोध नहीं कर रहा है.
भले ही अभी राजनीतिक पार्टियां संशोधन पर राज़ी दिख रही हैं लेकिन ये गौरतलब होगा कि आने वाले दिनों में जब संशोधन संसद में पेश होता है तब उस पर राजनीतिक दल क्या रुख अपनाते हैं.








