सपा-बसपा ने राज्यसभा में केंद्र की नाक बचाई

राज्यसभा में आज आतंकवादी निरोधी खुफिया केंद्र (एनसीटीसी) पर भारतीय जनता पार्टी का संशोधन प्रस्ताव गिर गया है. विपक्ष के कुल चार संशोधनों पर वोटिंग हुई. 82 के मुकाबले 105 सांसदों प्रस्ताव के विरोध में वोट दिया.

राज्य सभा में यूपीए के पास बहुमत नहीं है लेकिन सरकार को बचाने का काम एक बार फिर किया बहुजन समाज पार्टी, समाजवादी पार्टी और तृणमूल कांग्रेस ने.

बीएसपी और सपा ने सरकार के पक्ष में वोट डाला. जबकि तृणमूल कांग्रेस के सदस्यों ने वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया.

राज्य सभा में प्रधानमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि आतंकवाद से लड़ने के लिए एनसीटीसी ज़रूरी है.

लेकिन साथ ही उनका ये भी कहना था कि इस मुद्दे पर अगले महीने मुख्यमंत्रियों की बैठक होगी और ऐसा कुछ भी नहीं किया जाएगा जिससे देश के संघीय ढाँचे को नुकसान पहुँचे.

'आतंकवाद पर एकजुट हों सभी'

भाजपा और वामदल समेत विपक्ष इस बात पर अड़ा हुआ था कि प्रधानमंत्री सदन में ये भरोसा दिलाएँ कि मुख्यमंत्रियों की सहमति के बगैर एनसीटीसी को लागू नहीं किया जाएगा.

विपक्ष के नेता अरुण जेटली और सीपीएम नेता सीताराम येचुरी ने राज्यसभा में बहस के दौरान कहा था कि अगर प्रधानमंत्री भरोसा देते हैं तो संशोधन प्रस्ताव नहीं लाया जाएगा.

लेकिन प्रधानमंत्री के ऐसा न करने पर वोटिंग कराई गई जिसमें संशोधन प्रस्ताव गिर गया.

वोटिंग के बाद भारतीय जनता पार्टी ने वॉकआउट कर दिया. इससे पहले सोमवार को लोकसभा में भी भाजपा का प्रस्ताव गिर गया था.

राज्यसभा में अपने भाषण के दौरान प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने मुख्यत एनसीटीसी, अर्थव्यवस्था और श्रीलंका में तमिलों के मुद्दे पर जोर दिया.

एनसीटीसी पर मनमोहन सिंह का कहना था," इटली के दो पर्यटकों का अपहरण ये दर्शाता है कि देश की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है. आतंकवाद ऐसा मुद्दा है जिस पर सबको एकजुट होना चाहिए. 18 अप्रैल को मुख्यमंत्रियों की बैठक बुलाई गई है. ऐसा कुछ भी नहीं किया जाएगा जिससे संघीय ढाँचा बिगड़े."

12 से ज्यादा राज्यों के मुख्यमंत्री सार्वजनिक रुप से इसका विरोध कर चुके हैं.

वहीं श्रीलंकाई तमिलों के मुद्दे पर प्रधानमंत्री ने आश्वत किया है कि संयुक्त राष्ट्र में भारत इस मसले के मसौदे के पक्ष में मतदान का इच्छुक है.