
महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के प्रमुख राज ठाकरे ने पिछले हफ्ते मुंबई में हुई हिंसा के लिए पुलिस और प्रशासन की नाकामी को जिम्मेदार बताया है.
ठाकरे ने पुलिस की अनुमति के बिना मंगलवार को मुंबई में अपने हजारों समर्थकों के साथ मार्च निकाला. ये मार्च 11 अगस्त को एक मुस्लिम रैली के दौरान हुई हिंसा के विरोध में आयोजित किया गया.
मार्च गिरगांव चौपाटी इलाके से उसी आजाद मैदान तक गया जहां पिछले हफ्ते हिंसा हुई थी.
असम और म्यांमार में मुसलमानों पर कथित अत्याचारों के विरोध में 11 मार्च को कुछ मुस्लिम संगठनों की रैली में हिंसा भड़ उठी थी जिसके बाद पुलिस को गोली चलानी पड़ी थी. इस हिंसा में दो लोग मारे गए थे और दर्जनों पुलिस वाले घायल हो गए थे.
ताकत का प्रदर्शन
आजाद मैदान में अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए राज ठाकरे ने कांग्रेस के नेतृत्व वाली राज्य सरकार पर निशाना साधा और कहा कि उसने मुसलमानों की रैली में हिंसा होने की आशंका से जुड़ी जानकारी को अनदेखा किया.
उन्होंने महाराष्ट्र सरकार पर नकारेपन का आरोप लगाते हुए राज्य के गृह मंत्री आरआर पाटिल का इस्तीफा मांगा. उन्होंने मुंबई के पुलिस कमिश्नर अरुप पटनायक से भी पद छोड़ने को कहा.

राज ठाकरे की पार्टी पुलिस और प्रशासन पर नकारेपन का आरोप लगा रही है.
प्रसाशन ने एमएनएस के मार्च और रैली के लिए पुख्ता इतंजाम किए थे. हालांकि आधिकारिक तौर पर पुलिस ने इसकी अनुमति नहीं दी थी. लेकिन उसने मार्च या रैली को रोकने की कोई कोशिश नहीं की.
प्रशासन को डर था कि कहीं पार्टी के समर्थक इसे मुस्लिम विरोधी रैली न समझ बैठें और बदले में हिंसा की कारवाई करें. हालांकि राज ठाकरे ने साफ कहा था कि ये रैली हिन्दुओं के समर्थन या मुसलमानों के विरोध में नहीं निकाली जा रही है.
एमएनएस कार्यकर्ता ढोल-नगाड़े बजाते और पार्टी के झंडे लिए राज ठाकरे के पीछे पीछे चलते हुए आजाद मैदान में जमा हुए, जहां राज ठाकरे ने बड़ी रैली कर अपनी ताकत का प्रदर्शन करने की कोशिश की.
वैसे राज्य की अहम विपक्षी पार्टी शिव सेना पिछले हफ्ते की हिंसा के लिए मुख्य रूप से मुस्लिम संगठनों को ही जिम्मेदार ठहराती है.









