
कैल्डन कहती हैं कि दिल्ली में भी उनके साथ वैसा ही बर्ताव किया जाता है जैसा दूसरे शहरों में
पिछले दिनों बंगलौर और मुंबई जैसे महानगरों में पूर्वोत्तर के लोगों के खिलाफ फैली अफवाहों ने हज़ारों लोगों को अपने-अपने राज्यों का रुख करने पर मजबूर कर दिया.
जहां बंगलौर, पुणे और मुंबई जैसे कॉस्मोपॉलिटन शहर अफवाह के जाल में फंस गए, वहीं राजधानी दिल्ली में ये अफवाहें अपने पैर नहीं जमा पाई.
क्या दिल्ली में पूर्वोत्तर के लोग खुद को ज़्यादा सुरक्षित महसूस करते हैं?
क्या दिल्ली की संस्कृति हर तबके के लोगों को गले लगाती है?
दिल्ली में एक निजी कंपनी में काम करने वाली सिक्किम की निवासी कैल्डन ओन्गमु लाचुंग्पा को तो ऐसा नहीं लगता.
कैल्डन एक कामकाजी महिला हैं और बंगलौर, मुंबई और दिल्ली जैसे महानगरों में काम कर चुकी हैं.
उनका कहना है कि दिल्ली में पूर्वोत्तर के लोगों के बीच अफरा-तफरी न होने का मतलब ये नहीं है कि ये शहर मुंबई और बंगलौर के मुकाबले ज़्यादा कॉस्मोपॉलिटन है.
भेदभाव का शिकार
"ज़ाहिर है कि बंगलौर में जो हुआ, उससे हमें थोड़ी घबराहट ज़रूर हुई, लेकिन दिल्ली में रह कर मुझे डर इसलिए नहीं लगा इस घटना के बाद यहां की पुलिस और प्रशासन चौकस हो गए हैं. लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि जो बंगलौर में हुआ वो दिल्ली में नहीं हो सकता"
कैल्डन, सिक्किम की निवासी
बीबीसी से बातचीत में कैल्डन ने कहा, ज़ाहिर है कि बंगलौर में जो हुआ, उससे हमें थोड़ी घबराहट ज़रूर हुई, लेकिन दिल्ली में रह कर मुझे डर इसलिए नहीं लगा इस घटना के बाद यहां की पुलिस और प्रशासन चौकस हो गए हैं. शायद इसलिए भी मुझे ज़्यादा घबराहट नहीं हुई क्योंकि दिल्ली सत्ता का केंद्र है. लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि जो बंगलौर में हुआ वो दिल्ली में नहीं हो सकता. डर तो हमें यहां भी है.
दिल्ली की सामाजिक स्थिति पर सोशल मीडिया पर बहस शुरू हो गई है और कई लोगों का कहना है कि राजधानी में सांप्रदायिक भावना और शहरों के मुकाबले कम है.
लेकिन कैल्डन ऐसा नहीं मानती. उनका कहना है कि पूर्वोत्तर के लोगों के लिए हर महानगर एक सा ही है.
उन्होंने कहा, हर शहर में हमारे साथ ऐसा बर्ताव किया जाता है जैसे कि हम भारतीय ही न हों. लोग हमें तरह-तरह के नाम लेकर बुलाते हैं. हमारे लिए दिल्ली क्या और मुंबई क्या. ऐसा बिलकुल नहीं है कि हम दिल्ली में बंगलौर से ज़्यादा सुरक्षित या अपनापन महसूस करते हों.
प्रशासन पर भरोसा
"हर शहर में हमारे साथ ऐसा बर्ताव किया जाता है जैसे कि हम भारतीय ही न हों. लोग हमें तरह-तरह के नाम लेकर बुलाते हैं. हमारे लिए क्या दिल्ली और क्या मुंबई!"
कैल्डन, सिक्किम की निवासी
कैल्डन का कहना है कि हालांकि मौजूदा तनाव असम से जुड़ा था, लेकिन सभी पूर्वोत्तर राज्यों के लोगों पर उसका बुरा असर पड़ा.
हालांकि बंगलौर में रहने वाले कैल्डन के कुछ दोस्त तनाव के बाद कुछ समय के लिए दिल्ली आ गए हैं क्योंकि उन्हें लगा कि राजधानी में उन्हें प्रशासन द्वारा सुरक्षा दी जाएगी.
इसका मतलब ये हुआ कि पूर्वोत्तर के लोगों को राजधानी के लोगों से ज़्यादा प्रशासन पर भरोसा है.
तनाव की ख़बरें पूरे भारत में फैलते ही सिक्किम में बैठे कैल्डन के माता-पिता भी परेशान हो गए थे और उन्होंने कैल्डन को फोन कर सावधान रहने को कहा.
कैल्डन का कहना है कि हालांकि उन्होंने बाहर आना-जाना कम कर दिया है, लेकिन वे डर की वजह से घर में नहीं बैठ सकतीं.
उन्हें बस भरोसा है कि दिल्ली के प्रशासन ने बंगलौर के हादसे के बाद सही सबक ले लिया है और ऐसी घटना को राजधानी में दोहराने नहीं दिया जाएगा.








