
सदन की कार्यवाही को बुधवार तक स्थगित कर दिया गया है
कोयला आवंटन को लेकर नियंत्रक और महालेखा परीक्षक यानी सीएजी की रिपोर्ट पर प्रधानमंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर बीजेपी ने संसद में हंगामा कर दिया.
बीजेपी ने उनके इस्तीफे की भी मांग की. हंगामें के बाद दोनों सदनों को बुधवार तक स्थगित करना पड़ा.
सीएजी के अनुमान के मुताबिक साल 2005 से 2009 के बीच 57 कोयला खंडों के आवंटन में निजी कंपनियों को 1.86 लाख करोड़ का फायदा हुआ है.
संसद के दोनों सदनों में हंगामा
तीन दिन की छुट्टी के बाद मंगलवार को कार्यवाही शुरु होते ही विपक्ष ने दोनों सदनों में मनमोहन सिंह के इस्तीफे की मांग को लेकर हंगामा कर दिया जिसपर कार्यवाही स्थगित कर दी गई.
दोपहर 12 बजे लोक सभा की कार्यवाही दोबारा शुरु हुई तो फिर हंगामा हुआ जिसकी वजह से उस बुधवार तक स्थगित कर दिया गया. राज्य सभा को भी कल के लिए स्थगित कर दिया गया है.
बीजेपी ने कहा कि सीएजी की रिपोर्ट के बाद प्रधानमंत्री को कोयला आवंटन प्रक्रियाओं और व्यवस्था में हुए बदलाव की जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दे देना चाहिए.
सरकार ने बेबुनियाद बताया
बीजेपी के प्रवक्ता प्रकाश जावडेकर ने सदन की कार्यवाही स्थगित होने पर कहा, "यह होना ही था. लोग हैरान है जिस तरह से यूपीए सरकार लूट मचा रही है."
राज्य सभा में प्रधानमंत्री बोले जरूर लेकिन इस मामले पर नहीं बल्कि पीजे कुरियन को उप-सभापति बनने पर बधाई देने के लिए.
विपक्ष की मांग को बेबुनियाद बताते हुए संसदीय कार्य मंत्री पवन कुमार बंसल ने कहा, ''हम हमेशा की तरह मामले पर चर्चा के लिए तैयार थे लेकिन विपक्ष केवल सदन में हल्ला मचाना चाहता है...प्रधानमंत्री के इस्तीफे की मांग निरथर्क है और मुझे इस पर कोई टिप्पणी नहीं करनी.''
संसदीय कार्य मंत्री पवन कुमार बंसल
"हम हमेशा की तरह मामले पर चर्चा के लिए तैयार थे लेकिन विपक्ष केवल सदन में हल्ला मचाना चाहता है...प्रधानमंत्री की इस्तीफे की मांग निरथर्क है और मुझे इस पर कोई टिप्पणी नहीं करनी."
मनीष तिवारी ने कहा कि विपक्ष की मांग बेबुनियाद है. उनका कहना था, ''सरकार ने कहा है कि हम हर चीज के ऊपर बहस करने के लिए तैयार हैं. इसके बाद संसद को न चलने देने का कोई औचित्य नहीं है.''
इससे पहले केंद्र सरकार ने पिछले शुक्रवार आई सीएजी की रिपोर्ट को खारिज किया था.
रिपोर्ट
इस रिपोर्ट के अनुसार कई निजी कंपनियों को कोयला, नागरिक विमानन और बिजली क्षेत्र में 3.06 लाख करोड़ रुपए का 'अनुचित लाभ' पहुंचाया गया है.
सरकार ने सीएजी के आंकड़ों को 'गुमराह करने वाला' और गलत बताया था और सीएजी पर 'अपने दायरे' को लांघने का आरोप भी लगाया था.
कोयला मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल ने सीएजी के इस अनुमान को खारिज किया था कि 2005 से 2009 के बीच 57 कोयला खंडों के आवंटन में निजी कंपनियों को 1.86 लाख करोड़ का फायदा हुआ है.
सीएजी की रिपोर्ट में जिस अवधि के दौरान कोयला आवंटन में गड़बड़ी की बात कही गई है, तब कोयला मंत्रालय प्रधानमंत्री के ही पास था.
उस समय कोयले की खानों के आवंटन के लिए कंपनियों का चयन किया गया था, जबकि आलोचकों का कहना है कि खानों की बोली लगनी चाहिए थी और सबसे ज्यादा बोली लगाने वाले को खानें दी जानी चाहिए थी.
जायसवाल का कहना था कि कोयले की खानें कंपनियों को दिए जाने वाली प्रक्रिया में कुछ गलत नहीं था.








