
कैग ने कहा कि कड़े कदम उठाए जाने चाहिए ताकि सस्ते कोयले का फायदा उपभोक्ताओं तक पहुँचे
भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक या कैग ने कहा है कि निजी कंपनियों को कोयले की खानें मिलने से उन्हें 1.86 लाख करोड़ का फायदा हुआ.
कोयले की खान के लिए कंपनियों का चयन किया गया था, जबकि आलोचकों का कहना है कि खानों की बोली लगनी चाहिए थी और सबसे ज्यादा बोली लगाने वाले को खानें दी जानी चाहिए थी.
नियंत्रक और महालेखा परीक्षक के मुताबिक ऐसा करने से राष्ट्रीय खजाने को भारी नुकसान हुआ.
उधर कोयला मंत्री श्रीप्रकाश जयसवाल ने कहा कि वो कैग के आंकलन से सहमत नहीं हैं और जिस तरीके से कोयले की खानें कंपनियों को दी गईं, उसमें कुछ गलत नहीं था.
इससे पहले लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पर निशाना साधते हुए कहा कि वो खुद इस घाटे के लिए जिम्मेदार हैं क्योंकि कथित घौटाले के दौरान उनके पास कोयला मंत्रालय का कार्यभार था.
शुक्रवार को संसद में पेश हुई कैग की रिपोर्ट के मुताबिक एसार पावर, हिंडाल्को, टाटा स्टील, टाटा पावर, जिंदल स्टील एंड पावर सहित 25 कंपनियों को विभिन्न राज्यों में कोयले की खानें दी गईं.
समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार कैग ने कहा, बोली के आधार पर खान देने की प्रक्रिया की शुरुआत में देरी से निजी कंपनियों को फायदा हुआ. जाँच के मुताबिक निजी कंपनियों को इससे 1.86 लाख करोड़ का आर्थिक फायदा हुआ.
कैग ने कहा कि इस आंकड़े का आधार वर्ष 2010-11 में खानों की औसत उत्पादन लागत और औसत बिक्री लागत है.
कैग ने कहा, अगर बोली के आधार पर खानों को देने की प्रक्रिया की शुरुआत सालों पहले हुई होती तो इस आर्थिक फायदे का इस्तेमाल राष्ट्रीय खजाने के लिए किया जा सकता था.
कैग ने कहा कि कड़े कदम उठाए जाने चाहिए ताकि सस्ते कोयले का फायदा उपभोक्ताओं तक पहुँचे.
पीटीआई के मुताबिक बोली के आधार पर कोयले की खानों को देने की घोषणा वर्ष 2004 में की गई थी लेकिन सरकार ने अभी तक कार्य प्रणाली पर अंतिम निर्णय नहीं लिया है.








