रुश्दी को अंधेरे में रखा गया !

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    • Author, अमरेश द्विवेदी
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, जयपुर से

भारतीय मूल के अंग्रेज़ी लेखक सलमान रुश्दी के जयपुर साहित्य महोत्सव में आने से जुड़ा विवाद तूल पकड़ता जा रहा है.

उनके न आने को लेकर नई-नई जानकारियां सामने आ रही हैं. सलमान रुश्दी ने सोशल नेटवर्किंग साइट ट्विटर पर लिखा है कि राजस्थान पुलिस नहीं चाहती थी कि वो साहित्य महोत्सव में आएं इसीलिए उन्हें गुमराह किया गया कि उनकी जान को ख़तरा है.

दो दिन पहले उन्होंने एक बयान जारी कर कहा था कि महाराष्ट्र और राजस्थान के ख़ुफ़िया सूत्रों से उन्हें ख़बर मिली है कि मुंबई अंडरवर्ल्ड के कुछ लोग उन्हें मारने के लिए पैसे लेकर निकल चुके हैं. हालांकि उन्हें इसके सही होने का पूरा यक़ीन नहीं है.

उस दिन खुलकर ये नहीं बताया गया था कि आख़िर ये जानकारी सलमान रुश्दी को किस ख़ुफ़िया सूत्र से मिली है.

पुलिस ने कहा रुश्दी से संपर्क नहीं

जयपुर साहित्य समारोह में लोगों की काफ़ी भीड़ उमड़ी है
इमेज कैप्शन, जयपुर साहित्य समारोह में लोगों की काफ़ी भीड़ उमड़ी है

दो दिन बाद अब सलमान रुश्दी ने ट्विटर पर लिखा है कि राजस्थान पुलिस ने उनकी जान को ख़तरा वाली बात बताकर उन्हें गुमराह किया ताकि वो साहित्य महोत्सव में न आ पाएं.

लेकिन राजस्थान पुलिस का कहना है कि उनका सलमान रश्दी के साथ किसी माध्यम से कोई संपर्क हुआ ही नहीं है.

जयपुर के पुलिस कमिश्नर डीएल सोनी कहते हैं, ‘‘मैं उनके ट्विट पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहूंगा लेकिन ये ज़रूर कहना चाहूंगा कि हमने न तो उनको कोई ईमेल भेजा न कोई फ़ैक्स भेजा, उनसे हमारा किसी भी प्रकार का संपर्क हुआ ही नहीं है और हमने यहां पर तगड़ी सुरक्षा व्यवस्था कर रखी है.’’

रुश्दी को खतरे की बात किसने बताई?

अब सवाल उठता है कि सलमान रुश्दी जिस राजस्थान पुलिस को झूठ बोलने का दोषी ठहरा रहे हैं अगर उसका उनसे कोई संपर्क हुआ ही नहीं तो फिर ख़ुफ़िया ब्यूरो का हवाला देकर उन्हें किसने बताया कि उनकी जान को ख़तरा है.

ये बात रविवार को तब सामने आई कि आयोजकों ने ही ये बात तब सलमान रुश्दी को बताई थी और फिर उनका बयान पढ़कर सुनाया गया था कि उनकी जान को ख़तरा है.

समारोह के आयोजक संजॉय रॉय कहते हैं, ‘‘ये जानकारी आईबी ने हमें दी और आईबी ने ही हमसे कहा कि ये जानकारी उन्हें दी जाए. उसके बाद ही राजस्थान प्रशासन को सूचित करते हुए ही हमने ये बात सलमान रुश्दी को बताई.’’

सवाल उठता है कि अगर आयोजकों ने ही सलमान रुश्दी को ख़ुफ़िया ब्यूरो के हवाले से जान को ख़तरे वाली बात बताई थी तो उस दिन सलमान रुश्दी का बयान पढ़े जाते वक़्त आयोजकों ने इसका ज़िक्र क्यों नहीं किया.

ऐसा क्यों ज़ाहिर होने दिया गया कि सलमान रुश्दी को ख़ुद महाराष्ट्र और राजस्थान के ख़ुफ़िया सूत्रों से ये जानकारी मिली है.

अब सवाल उठता है कि रूश्दी की सुरक्षा क्या वाकई इतनी बड़ी चुनौती थी कि राज्य सरकार उसे संभाल ही नहीं सकती थी.

राज्य के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत कहते हैं, ‘‘सरकार ने उनकी सुरक्षा के पूरे प्रबंध कर रखे थे, ये हमार ड्यूटी है कि केंद्र से अगर कोई एडवाइज़री आती है, किसी भी का भी कोई कार्यक्रम आता है जिसको ख़तरा है तो उसकी सुरक्षा का बंदोबस्त करना हमारा काम है.’’

यानि राज्य सरकार की तरफ से सुरक्षा की पूरी तैयारी थी. तब फिर ख़ूफ़िया ब्यूरो वाली बात क्या जानबूझकर सामने लाई गई ताकि वो न आएं क्योंकि उनकी तगड़ी सुरक्षा व्यवस्था की वजह से आयोजन की सफलता प्रभावित हो सकती थी. बाकी के साहित्यकार नज़रअंदाज़ हो सकते थे.

चारों तरफ़ बंदूकधारी सुरक्षाकर्मियों की वजह से महोत्सव में शिरकत करनेवाले आम लोगों की संख्या कम हो सकती थी. 19 जनवरी को आयोजक संजॉय रॉय, नमिता गोखले और विलियम डैलरिंपल ने जो प्रेस कॉन्फ़्रेंस की थी उसमें बताया गया था कि 20 जनवरी के उद्घाटन समारोह में सलमान रूश्दी नहीं आ रहे हैं और अगले कुछ दिन तक भी उनका जयपुर आने का कार्यक्रम नहीं है लेकिन आयोजकों की तरफ़ से उनको दिया गया निमंत्रण अभी भी बरकरार है.

लेकिन आगे एक और बात संजॉय रॉय ने कही थी कि ‘‘इस महोत्सव में 258 लेखक और 108 कलाकार हिस्सा ले रहे हैं ये केवल एक लेखक का महोत्सव नहीं है.’’

यानि सलमान रुश्दी नहीं आए तो ये कहीं सबके लिए ‘चित भी हमारी पट भी हमारी’ वाली मिसाल तो नहीं रही.

आयोजकों के विरोधाभासी बयान, पुलिस और प्रशासन के रुख, केंद्रीय और राज्य ख़ुफ़िया ब्यूरो से आयोजकों को दी गई जानकारी इन सबकी गहन पड़ताल होनी चाहिए ताकि सच सामने आ सके.