चिदंबरम मुद्दे पर बयानबाज़ी तेज़

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2-जी स्पैक्ट्रम को लेकर गृह मंत्री पी चिदंबरम पर उठते सवालों के बीच केंद्र सरकार और कांग्रेस पार्टी ने उनका बचाव किया है.
वित्त मंत्रालय की ओर से प्रधानमंत्री कार्यालय को भेजे एक पत्र के सार्वजनिक होने के बाद विपक्षी भारतीय जनता पार्टी ने पी चिदंबरम के त्यागपत्र की मांग की है.
इस पत्र के सामने आने के बाद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और पी चिदंबरम की फ़ोन पर बात भी हुई है. चिदंबरम ने ख़ुद इसकी पुष्टि की है.
दूसरी ओर कांग्रेस ने एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस करके कहा है कि पी चिदंबरम की भूमिका पर कोई सवाल नहीं.
दिल्ली में एक संवाददाता सम्मेलन में पार्टी प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि इस मामले में जनता पार्टी अध्यक्ष सुब्रह्मण्यम स्वामी की याचिका राजनीति से प्रेरित है.
भरोसा
उन्होंने कहा, "पार्टी चिदंबरम की विश्वसनीयता पर संदेह नहीं करती. ये दो संवैधानिक पदों में दरार पैदा करने की कोशिश है."
इस मामले में सरकार की ओर से केंद्रीय क़ानून मंत्री सलमान ख़ुर्शीद ने मोर्चा संभाला और कहा कि सरकार को चिदंबरम में पूरा भरोसा है.
उन्होंने कहा, "मैंने वो पत्र पढ़ लिया है. मेरा स्पष्ट रूप से मानना है कि इसमें चिदंबरम की कोई भूमिका नहीं है. सरकार उनके साथ है. मैं ये बात पूरे अधिकार के साथ कह रहा हूँ."
भारतीय जनता पार्टी की ओर से पहले वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी और फिर अरुण जेटली ने मोर्चा संभाला और पी चिदंबरम के मुद्दे पर सरकार को आड़े हाथों लिया.
मुरली मनोहर जोशी ने कहा कि वित्त मंत्रालय के अधिकारी पी चिदंबरम से कह रहे थे कि स्पैक्ट्रम की बोली लगवाई जाए, लेकिन चिदंबरम ने ऐसा क्यों नहीं किया.
अरुण जेटली ने 2-जी मामले पर सरकार की मंशा पर संदेह व्यक्त करते हुए चिदंबरम से इस्तीफ़े की मांग की.












