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भारत में अभी भी युवक-युवतियों को पंचायत, परिवार और गांव की मान-मर्यादा के नाम पर मौत के घाट उतार दिया जाता है. एक ग़ैर सरकारी संगठन का कहना है कि एक साल में कम से कम 650 युवक युवती इसका शिकार बनते हैं और इनमें से 90 प्रतिशत से ज़्यादा मामले हरयाणा, पंजाब और पश्चिमी उत्तरप्रदेश के होते हैं. बीबीसी संवाददाता श्यामसुंदर और ख़दीजा आरिफ़ ने इसकी विस्तार से जांच करके इस मामले की तह तक पहुंचने की कोशिश की है.
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