हज यात्रा 21 मई से शुरू, जानिए हज के नाम पर धांधली से कैसे बचें?

    • Author, सुशीला सिंह
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

राजस्थान के कोटा शहर के रहने वाले इलाही बख़्श अंसारी अपनी पत्नी के साथ हज जाने की योजना बना रहे थे.

वो साल 2018 था.

इलाही बख़्श अंसारी को अपने पड़ोसियों से एक प्राइवेट टूर ऑपरेटर के बारे में जानकारी मिली.

इस प्राइवेट टूर कंपनी को चलाने वाले व्यक्ति का नाम जमीरुद्दीन था और वो बूंदी में रहते थे.

इलाही बख़्श अंसारी पेशे से दर्ज़ी हैं.

वे कहते हैं, "मैंने ज़मीरुद्दीन के बारे में अपने पड़ोसियों से जाना फिर मेरे रिश्तेदार से बूंदी में उसके बारे में पता कराया. मेरे रिश्तेदार ने कहा अच्छा आदमी है और क़ाज़ी का बेटा है आप इतमीनान रखें. हमें भी पूरा भरोसा हो गया. मैंने सरकारी फ़ॉर्म भरा था लेकिन नंबर नहीं आया तो प्राइवेट टूर का सहारा लिया."

वो बताते हैं कि उन जैसे क़रीब 20 लोगों ने ज़मीरुद्दीन पर भरोसा किया और हज यात्रा के लिए एडवांस रुपये दे दिए.

हज के बारे में जानकारी

  • इस साल 21 मई से हज यात्रा शुरू हो रही है.
  • सऊदी अरब के अधिकारियों के मुताबिक़ क़रीब 20 लाख लोग हज करेंगे.
  • भारत से 1,75,025 हज यात्री जा रहे हैं.
  • इस बार 4000 से ज़्यादा महिलाएं बिना महरम (गार्जियन) के हज करने जाएंगी.
  • इस्लाम में महरम वो पुरुष होता है जो महिला का पति हों या ख़ून के रिश्ते में हो.
  • अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय के अनुसार, हज कमेटी के ज़रिए जाने वाले दोबारा आवेदन नहीं दे सकते हैं.

हज पर जाने का सपना

इलाही बख़्श अंसारी बताते हैं, "मेरे पांच बच्चे हैं. मैंने सभी की शादी कर दी. मेरा एक प्लॉट था वो बेच दिया. दो आदमियों के हिसाब से एडवांस दिया और रियाल (सऊदी अरब की करंसी) के लिए 70,000 रुपये और दे दिए. मैंने इसकी पर्ची भी ली थी."

वहीं शाहिद, इलाही की दुकान पर आते-जाते रहते थे. इसी दौरान हज का ज़िक्र भी छिड़ा.

वो अपने अम्मा अब्बा को उमरा के लिए भेजना चाह रहे थे. उमरा भी एक धार्मिक यात्रा होती है. लेकिन हज की तुलना में यह छोटी प्रक्रिया है. हज के लिए साल के पांच दिन निश्चित हैं लेकिन उमरा इन पांच दिनों को छोड़कर पूरे साल कभी भी किया जा सकता है.

शाहिद का कहना था, "मैंने ज़मीरुद्दीन को बैंक से सीधे 80 हज़ार रुपये ट्रांसफ़र किए. हालांकि ट्रांसफ़र हुआ पैसा तो देखा जा सकता है लेकिन मेरे पास इसका कोई सबूत नहीं है कि मैंने उमरा के लिए उसे ये रक़म दी थी."

अपनी बात को बढ़ाते हुए इलाही कहते हैं कि जब ज़मीरुद्दीन ने उन्हें बताया कि उनका नंबर आ गया है तो उनकी ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहा.

वो बताते हैं, "हमारी तैयारी शुरू हो गई. बधाई के संदेश आने लगे. पहले उसने दिल्ली की बुकिंग कराने को कहा फिर उसे कैंसिल करा कर मुंबई की बुकिंग के लिए कहा."

"और इसके बाद ख़बर आई वो भाग गया है. ज़मीरुद्दीन ने हमारा फ़ोन उठाना बंद कर दिया फिर उसका कभी फ़ोन ही नहीं लगा."

लेकिन फिर हुई ठगी

शाहिद बताते हैं, "अम्मा-अब्बा बहुत दुखी हुए. हमने पैसा नेक काम के लिए दिया था लेकिन हमें लूट लिया गया."

वो कहते हैं, "हम बूंदी भी गए और ज़मीरुद्दीन के परिवार से मुलाक़ात भी की लेकिन उन्होंने साफ़ कह दिया वो यहां नहीं रहता. वो आएगा तो हम आपको बता देंगे. हमने आपके पैसे नहीं लिए हैं."

इलाही बताते हैं, "हमारे परिवार में कोई हज पर नहीं गया था और इस पवित्र यात्रा को करने वाले हम पहले होते लेकिन अफ़सोस है कि हम हज नहीं कर पाए."

"इस ख़बर के बाद मेरी बीवी की तबीयत भी ख़राब रहने लगी. ये शुक्र है कि हमें हमारा पासपोर्ट वापिस मिल गया नहीं तो और दिक्क़त आ जाती है."

इस मामले में इलाही और शाहिद दोनों ही ने एफ़आईआर दर्ज नहीं कराई लेकिन कुछ लोगों ने मामला दर्ज कराया है.

इलाही कहते हैं कि ज़मीरुद्दीन ने हमें उसके ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज न कराने की गुज़ारिश की और कहा कि वो उनके पैसे लौटा देगा लेकिन एक दमड़ी नहीं मिली.

इलाही और शाहिद के साथ जिस तरह से धांधली हुई है वो पहला मामला नहीं है लेकिन इस मामले में कोई आधिकारिक आंकड़ा भी नहीं है.

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कैसे ठगी से बचा सकता है?

जानकार मानते हैं कि हज या उमरा पवित्र धार्मिक यात्रा होती है ऐसे में लोग ये सोच भी नहीं पाते कि उनके साथ ठगी भी हो सकती है.

यहां ये जानना ज़रूरी है कि सऊदी अरब और भारत सरकार में हज कोटा को लेकर जो सहमति बनी हुई है उसमें 80 फ़ीसदी सीट हज कमेटी ऑफ़ इंडिया को मिलती हैं और 20 फ़ीसदी हज ग्रुप आर्गेनाइजेशन यानी प्राइवेट टूर ऑपरेटर्स को मिलता है.

दिल्ली स्टेट हज कमेटी के पूर्व अध्यक्ष मुख़तार अहमद कहते हैं कि जो भी हज करने जा रहे हैं उन्हें भारत सरकार द्वारा अधिकृत प्राइवेट टूर ऑपरेटर्स से ही संपर्क करना चाहिए.

वे बताते हैं, "लोगों को ये भी पता होना चाहिए कि कोई सब्सिडी नहीं दी जाती है और अगर कोई कहता है कि वीआईपी कोटा के तहत भेज देंगे तो ऐसे झूठ से सचेत हो जाना चाहिए."

आगे के बिंदुओं पर समझाते हुए अफ़रोज़ आलम कहते हैं, "जो भी हज जाने के लिए आवेदन देता है उसे अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय द्वारा जारी सूची को देख लेना चाहिए कि जिस प्राइवेट टूर ऑपरेटर के संपर्क में हैं उसका नाम सूची में है या नहीं."

अफ़रोज़ आलम हज के मामलों की रिपोर्टिंग करने वाले स्वतंत्र पत्रकार हैं.

मौलाना मोहम्मद नसीमुद्दीन मिफ़ताही के अनुसार, "हमारे औरंगाबाद में छोड़े-बड़े 42 प्राइवेट टूर हैं. ये देखा गया है कि प्राइवेट टूर दो, तीन साल बहुत अच्छा इतंज़ाम करते हैं लेकिन फिर हाजियों का पैसा लेकर ग़ायब हो जाते हैं. इसलिए लोगों को पहले ऐसे प्राइवेट टूर की जांच परख करनी चाहिए और जहां भी पैसों का लेन-देन हो तो उससे संबंधित दस्तावेज़ रखना चाहिए."

कैसे रहें सचेत?

शहरों में या पढ़े लिखे लोग हज कमेटी की वेबसाइट पर जाकर जांच परख कर सकते हैं लेकिन बिना पढ़े लिखे लोग या उन लोगों का क्या जो हज की यात्रा तो करना चाहते हैं लेकिन इतने जागरूक नहीं हैं?

इस सवाल के जवाब में मुख़तार अहमद कहते हैं कि सरकार की तरफ़ से अलग-अलग राज्यों को सीट मिलती हैं. इसमें सरकारी और फिर प्राइवेट टूर का अलग-अलग प्रतिशत होता है.

उनके अनुसार, "हर राज्य में वहां की हज कमेटी के सदस्य मुस्लिम इलाक़ों में काउंटर खोलते हैं और उनके फ़ॉर्म भरे जाते हैं ताकि हज यात्रियों की मदद की जा सके. उन्हें जागरूक किया जाता है ताकि उनके पैसों का ग़लत इस्तेमाल न हो सके."

"जो भी हाजी जाता है, राज्य हज कमेटी के नुमाइंदे उसका पूरा रिकॉर्ड, पैसे की लेन-देन, जानकारी देना, उन्हें भेजने का काम कमेटी के सदस्य करते हैं और फिर सऊदी अरब जाने के लिए फ़्लाइट, वहां रहने के सारे इंतज़ाम करने का काम राज्य कमेटियों की मदद से सेंट्रल हज कमेटी करती है."

इससे पहले तक हज कमेटी ऑफ़ इंडिया (एचसीओआई) हज तीर्थयात्रियों को 2100 रियाल देती थी लेकिन साल 2023 में आई हज नीति तीर्थ यात्रियों को ये विकल्प दिया गया कि वे ख़ुद इसका प्रबंध करें और अपनी ज़रूरत के मुताबिक़ लेकर जाएं.

हालांकि सरकार पहले यात्रियों से लिए गए एडवांस में से ही उन्हें जाते समय 2100 रियाल देती थी.

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हज जाने के नियम क़ायदे

क़रीब तीस साल से हज यात्रियों की रहनुमाई के लिए महाराष्ट्र की एक संस्था के प्रमुख मौलाना मोहम्मद नसीमुद्दीन मिफ़ताही कहते हैं कि हज पर जाने से पहले वो हाजियों को सारी प्रक्रिया समझाते हैं.

मौलाना नसीमुद्दीन ख़िदमत-ए-हुज्जाज कमेटी, औरंगाबाद के प्रमुख हैं.

वे बताते हैं कि ज़िला औरंगाबाद से इस बार क़रीब 1700 लोग हज यात्रा के लिए जा रहे हैं.

उनके अनुसार, हज पर जाने से पहले उन्हें चार सबक़ बताए जाते हैं.

सफ़र कैसे करें, किन-किन बातों का ध्यान रखें, कौन से दस्तावेज़ लेकर चलें, एयरपोर्ट पर कैसी परेशानी आ सकती है उनके बारे में बताते हैं.

दूसरा सबक़ अहराम (हाजियों के ज़रिए बिना सिला हुआ सफ़ेद कपड़ा) और उमरा के बारे में होता है.

हज के पांच दिनों में क्या-क्या किया जाता है इसके बारे में भी पूरी जानकारी दी जाती है.

इधर इलाही बख़्श अंसारी अपनी बीवी के साथ रमज़ान से पहले उमरा करके आ चुके हैं लेकिन हज न कर पाने की टीस अभी भी बाक़ी है.

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