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प्रकाश सिंह बादल का निधन, कई दिनों से थे अस्पताल में भर्ती
पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री और शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता प्रकाश सिंह बादल का निधन हो गया है. वो 95 साल के थे. अकाली दल के मीडिया सलाहकार जंगबीर सिंह ने बादल के निधन की पुष्टि की है.
दमा की समस्या गंभीर होने के कारण बादल को सांस लेने में तकलीफ़ हो रही थी, इसलिए इस महीने की 16 तारीख़ को उन्हें मोहाली के फोर्टिस अस्पताल में भर्ती कराया गया था. 18 अप्रैल को उनकी स्थिति बिगड़ने के बाद उन्हें आईसीयू में स्थानांतरित किया गया था.
फोर्टिस अस्पताल, मोहाली की ओर से जारी एक मेडिकल बुलेटिन में बताया गया कि डॉ दिगंबर बेहरा के नेतृत्व में कई विभाग के डॉक्टर उनके इलाज में जुटे थे. लेकिन सभी उपाय करने के बाद भी उन्हें बचाया न जा सका. अस्पताल ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है.
प्रकाश सिंह बादल के निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ट्वीट कर दुख जताया है और उन्हें श्रद्धांजलि दी है.
उन्होंने लिखा, "प्रकाश सिंह बादल का निधन मेरी निजी क्षति है. मेरा उनसे कई दशक से क़रीबी संपर्क रहा और उनसे बहुत कुछ सीखने को मिला. मुझे उनसे हुई कई बातचीत याद है, जिसमें उनकी समझदारी साफ़ तौर दिखती थी. उनके परिजन और उनके अनगिनत प्रशंसकों के प्रति हमारी संवेदनाएँ हैं."
"प्रकाश सिंह बादल जी के निधन से अत्यंत दुख हुआ. वे भारतीय राजनीति की एक महान हस्ती और एक बड़े नेता थे, जिन्होंने देश के लिए बहुत योगदान दिया. उन्होंने पंजाब की प्रगति के लिए अथक परिश्रम किया और कठिन समय में इस राज्य को सहारा दिया."
प्रकाश सिंह बादल का जन्म 8 दिसंबर 1927 को पंजाब के बठिंडा के अबुल खुराना गांव में हुआ था.
बताया जाता है कि वो प्रशासनिक अधिकारी बनना चाहते थे, लेकिन अकाली नेता ज्ञानी करतार सिंह से प्रभावित होकर वो राजनीति में आ गए.
उन्होंने 1947 में अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत गांव के सरपंच के रूप में की.
वो दशकों तक पंजाब की राजनीति का अहम चेहरा बने रहे.
प्रकाश सिंह बादल ने अपना पहला विधानसभा चुनाव साल 1957 में जीता था.
वो 1970 में जब 43 साल के थे तब पंजाब के सबसे युवा मुख्यमंत्री बने.
प्रकाश सिंह बादल ने कुल 5 बार पंजाब के मुख्यमंत्री की शपथ ली.
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने भी बादल की मौत पर दुख व्यक्त करते हुए ट्वीट किया है.
उनके नाम एक अनोखा रिकॉर्ड भी रहा, जहां एक तरफ वो पंजाब के सबसे युवा मुख्यमंत्री बने तो वहीं जब साल 2017 में उन्होंने मुख्यमंत्री के रूप में पांचवां कार्यकाल पूरा किया तो 90 साल की उम्र के वो सबसे बुजुर्ग मुख्यमंत्री भी रहे.
वो शिरोमणी अकाली दल के प्रमुख रहे जो सिखों के प्रतिनिधित्व की बात करती है. वहीं इस दल ने अक्सर हिंदुत्व के मुद्दे को लेकर आगे बढ़ने वाली बीजेपी का साथ दिया.
प्रकाश सिंह बादल की पत्नी सुरिंदर कौर का निधन हो चुका है. उनका बेटे सुखबीर सिंह बादल और बहू हरसिमरत कौर बादल दोनों ही राजनीति में सक्रिय हैं.
1979 से 1980 के बीच वह चौधरी चरण सिंह की अगुवाई वाली केंद्र सरकार में कृषि मंत्री रहे. लेकिन इसके बाद उन्होंने केंद्र की सत्ता का मोह त्याग दिया और पंजाब की राजनीति पर ही पूरा ध्यान केंद्रित किया.
वो शिरोमणि अकाली दल के प्रमुख रहे जो सिखों के प्रतिनिधित्व की बात करता है.
बादल की सियासी चालें उनके आलोचकों को भी कभी-कभी मुरीद बना लेती थीं.
मुख्यमंत्री के तौर पर उनके आख़िरी कार्यकाल में दो बार इस तरह की घटनाएं हुईं. पहले उनके आवास पर कांग्रेस और दूसरी बार आम आदमी पार्टी धरना देने आईं. बादल ने दोनों बार उनके लिए टेंट लगवा दिया और खुद उनका स्वागत करने गए.
शिक्षा पर एक नज़र
उनकी शुरुआती शिक्षा घर पर ही हुई. उसके बाद वे लांबी गांव के एक स्कूल में पढ़ने लगे. वे अपने गांव से घोड़े पर सवार होकर स्कूल जाते थे.
हाई स्कूल की पढ़ाई के लिए वो मनोहर लाल मेमोरियल हाई स्कूल गए.
कॉलेज की पढ़ाई के लिए वो लाहौर के सिख कॉलेज गए लेकिन बाद में फोरमैन क्रिश्चियन कॉलेज चले गए और वहीं से ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की.
सरपंची से हुई राजनीतिक करियर की शुरुआत
प्रकाश सिंह बादल ने राजनीतिक जीवन की शुरुआत 1947 से की. वह अपने पिता रघुराज सिंह के कदमों पर चलते हुए बादल गांव के सरपंच बने. इसके बाद वह लांबी ब्लॉक समिति के चेयरमैन बने.
1957 में पंजाब विधान सभा चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ते हुए वह विधायक बने. बादल उन नेताओं की श्रेणी में आते हैं जिन्होंने क्षेत्रीय दलों की मजबूती पर जोर दिया.
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