फ़्रांस में चीन के राजदूत ने ऐसा क्या कहा कि यूरोप में मचा हंगामा- प्रेस रिव्यू

फ्रांस में चीन के राजदूत

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फ़्रांस में चीन के राजदूत ने पूर्व सोवियत देशों की संप्रभुता पर सवाल उठाया है.

चीनी राजदूत लू शाये ने कहा कि ऐसे देशों के पास अंतरराष्ट्रीय क़ानून के तहत प्रभावी स्थिति नहीं है.

द टेलीग्राफ अख़बार के मुताबिक़ उनके इस बयान पर फ़्रांस ने रविवार को निराशा जताई है.

अख़बार के मुताबिक़ फ़्रांस के एक न्यूज़ चैनल पर उनसे पूछा गया कि क्या वे क्राइमिया को यूक्रेन का हिस्सा मानते हैं? इसके जवाब में चीनी राजदूत ने कहा कि ऐतिहासिक रूप से क्राइमिया रूस का हिस्सा था और सोवियत नेता निकिता ख्रुश्चेव ने इसे यूक्रेन को दिया था.

रूस ने 2014 में क्राइमिया पर हमला कर इसे यूक्रेन से छीन लिया था. बाद में रूस ने क्राइमिया को ख़ुद में मिला लिया था.

शुक्रवार को हुए इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि सोवियत संघ के पतन के बाद उभरे देशों के पास अंतरराष्ट्रीय क़ानून के तहत वास्तविक स्थिति नहीं है. ऐसे देशों के लिए संप्रभु राष्ट्र के तौर पर उनकी स्थिति की पुष्टि करने वाला कोई अंतरराष्ट्रीय समझौता नहीं है.

गार्डियन न्यूज वेबसाइट के मुताबिक़ चीनी राजदूत लू का बयान फ़रवरी में जारी यूक्रेन पर चीन की स्थिति से अलग दिखाई दे रहा है. तब चीन ने कहा था कि वह सभी छोटे बड़े देशों की संप्रभुता, स्वतंत्रता और क्षेत्रीय अखंडता को बनाए रखने का वादा करता है.

फ़्रांस में यूक्रेन के राजदूत वडिम ओमेलचेंको ने चीनी राजदूत के बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि ऐसे बयान के लिए कोई जगह नहीं है. क्राइमिया यूक्रेन है. सोवियत संघ अब बचा नहीं है और समय काफ़ी आगे बढ़ गया है.

अख़बार के मुताबिक़ फ़्रांस ने पलटवार करते हुए ऐसे देशों के साथ अपनी एकजुटता दिखाई और कहा कि उन्होंने दशकों के उत्पीड़न के बाद अपनी स्वतंत्रता हासिल की है.

फ़्रांस के विदेश मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने कहा कि क्राइमिया और ख़ासकर यूक्रेन को 1991 में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता दी गई थी, जिसमें चीन भी शामिल था.

प्रवक्ता ने कहा कि चीन को ये साफ़ करना होगा कि ये बयान उसकी आधिकारिक स्थिति को बताता है या नहीं.

रूसी नौसेना के जवान क्राइमिया में चौकसी करते हुए हुए

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सोवियत संघ के पतन के बाद उभरे देश एस्टोनिया, लातविया और लिथुआनिया ने भी फ़्रांस की तरह की प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए चीन पर पलटवार किया है.

गार्डियन न्यूज वेबसाइट के मुताबिक लातविया के विदेश मंत्री एडगर रिंकेविक्स ने चीन से अपना बयान पूरी तरह से वापस लेने की मांग की है.

उन्होंने कहा कि ब्रसल्स में यूरोपीय विदेश मंत्रियों की बैठक में यूरोपीय संघ इस मामले में मिलकर और कड़ी प्रतिक्रिया देगा.

एस्टोनिया के विदेश मंत्रालय ने अपने देश देश की संप्रभुता पर चीन की स्थिति को साफ़ करने के लिए राजदूत को तलब किया. उन्होंने चीनी राजदूत के बयान को समझ से परे बताया है.

एस्टोनिया का कहना है कि 1994 से ही चीन ने बुडापेस्ट मेमोरेंडम समझौते को मान्यता दी हुई है. इस समझौते के तहत रूस ने यूक्रेन की सीमाओं को स्वीकार किया है और बदले में यूक्रेन ने सोवियत युग के परमाणु हथियारों को सौंपने पर सहमत हुआ था.

लिथुआनिया के विदेश मंत्री गेब्रियलियस लैंड्सबर्गिस ने कहा कि चीनी राजदूत के बताते हैं कि चीन पर भरोसा नहीं किया जा सकता.

लिथुआनिया ने भी चीनी राजदूत को तलब किया है.

भारत-पाकिस्तान

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भारत-चीन के बीच कोर कमांडर वार्ता

इस हफ़्ते भारत में शंघाई सहयोग संगठन के रक्षा मंत्रियों की बैठक होनी वाली है लेकिन इससे पहले रविवार को भारत और चीन ने पूर्व लद्दाख में 18वें दौर की कोर कमांडर स्तर की बातचीत की.

एससीओ सम्मेलन में चीन के रक्षा मंत्री ली शांगफू और रूस के रक्षा मंत्री सर्गेई शोइगु हिस्सा लेने के लिए भारत आ रहे हैं. ऐसे में यह बातचीत काफ़ी अहम मानी जा रही है.

इंडियन एक्सप्रेस अखबार ने इस खबर को पहले पन्ने पर जगह दी है.

इस दौरान एलएसी पर सैन्य गतिरोध को दूर करने पर और दोनों सेनाओं के बीच विश्वास बढ़ाने को लेकर बातचीत हुई.

भारत की तरफ चुशूल में कोर कमांडर स्तर की बातचीत सुबह 10 बजे शुरू हुई और शाम तक चली. भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व 14 कोर कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल राशिम बाली ने किया.

अखबार ने सूत्रों के हवाले से बताया कि यह बातचीत 27 और 28 अप्रैल को होने वाली एससीओ के रक्षा मंत्रियों की बैठक के लिए मंच तैयार करेगी.

सूत्र के हवाले से बताया गया है कि एलएसी पर डेपसांग प्लेन्स और डेमचोक जैसे मुद्दे भी बातचीत में शामिल होंगे.

भारत और चीन के बीच आखिरी सैन्य वार्ता पिछले साल दिसंबर में हुई थी.

वहीं पिछले साल सितंबर में दोनों पक्षों ने पूर्वी लद्दाख के गोगरा-हॉट स्प्रिंग्स क्षेत्र में पेट्रोलिंग प्वाइंट-15 से अपने सैनिकों को पीछे खींच लिया था.

एससीओ में भारत, रूस, चीन, किर्गिस रिपब्लिक, कजाकिस्तान, ताजिकिस्तान, उज़्बेकिस्तान और पाकिस्तान शामिल हैं.

भारत के रक्षा मंत्री इस सम्मेलन की अध्यक्षता करेंगे. इसमें आतंकवाद, क्षेत्रीय सुरक्षा और अफगानिस्तान के हालात पर चर्चा हो सकती है.

एससीओ के विदेश मंत्रियों की बैठक रक्षा मंत्रियों की बैठक के बाद होगी. इसमें पाकिस्तान के विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो ज़रदारी ने शामिल होने की भी पुष्टि की है.

ये पहली बार है जब 2020 में गलवान घाटी में भारत और चीन के सैनिकों के बीच झड़प के बाद चीन के रक्षा मंत्री भारत का दौरा करेंगे.

अमित शाह

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'तेलंगाना में मुस्लिम आरक्षण खत्म करेंगे'

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि अगर तेलंगाना में बीजेपी की सरकार बनी तो वे राज्य में मुस्लिम आरक्षण खत्म कर देंगे.

इस खबर को टाइम्स ऑफ इंडिया ने पहले पन्ने पर जगह दी है.

अमित शाह ने कहा कि केसीआर की सरकार में यह आरक्षण दिया जाना असंवैधानिक है.

उन्होंने कहा कि हम शिक्षण संस्थाओं में मुस्लिम आरक्षण को खत्म कर देंगे. आरक्षण संवैधानिक रूप से दलित, आदिवासियों और पिछड़े लोगों का अधिकार है और हम उन्हें ये अधिकार देना सुनिश्चित करेंगे.

वहीं दूसरी तरफ राज्य की केसीआर सरकार मुस्लिम आरक्षण को चार प्रतिशत से बढ़ाकर 12 प्रतिशत करने की बात कह रही है.

अखबार लिखता है कि पिछले महीने कर्नाटक में बीजेपी सरकार ने मुस्लिमों को मिलने वाले चार प्रतिशत ओबीसी आरक्षण को खत्म कर दिया. राज्य सरकार ने यह चार प्रतिशत आरक्षण को लिंगायत और वोक्कालिगा में बांट दिया है.

अमित शाह के इस बयान पर एआईएमआईएम के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने पलटवार किया है.

हिंदुस्तान अखबार के मुताबिक ओवैसी ने कहा कि बीजेपी के पास मुसलमानों के खिलाफ हेट स्पीच के अलावा राज्य के लिए कोई दिशा नहीं है.

उन्होंने कहा कि ज्यादा से ज्यादा फर्जी एनकाउंटर, कर्फ्यू, अपराधियों को रिहा करने जैसे काम कर सकते हैं.

उन्होंने पूछा कि अमित शाह तेलंगाना के लोगों से इतनी नफरत क्यों करते हैं?

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