स्वर्ण मंदिर में तिरंगे के टैटू के साथ पहुंची युवती को रोकने का क्या है मामला

पंजाब के अमृतसर स्थित स्वर्ण मंदिर में कथित रुप से एक युवती को प्रवेश नहीं दिए जाने से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है. इसे लेकर विवाद शुरू हो गया है.

वायरल वीडियो में दावा किया जा रहा है कि युवती ने अपने 'चेहरे पर तिरंगे झंडे का टैटू लगाया हुआ था, इसलिए उन्हें स्वर्ण मंदिर में दाखिल नहीं होने दिया गया.'

इसे लेकर युवती और उनके साथ मौजूद एक पुरुष की स्वर्ण मंदिर के एक सेवादार से बहस होती नज़र आती है.

ट्विटर और दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वीडियो शेयर कर रहे कई लोगों ने दावा किया है कि सेवादार ने युवती को प्रवेश देने से मना कर दिया.

इस मामले पर शिरोमणि गुरुद्वारा प्रंबधक कमिटी (एसजीपीसी) ने प्रतिक्रिया दी है और विवाद को 'बेवजह तूल' देने की निंदा की है.

एसजीपीसी के महासचिव गुरचरण सिंह ग्रेवाल ने कहा है कि अगर यात्री को ठेस पहुंची है तो वो 'माफी मांगते हैं.'

हालांकि, उन्होंने ये भी कहा है कि धार्मिक स्थान पर आने वालों को उसकी मर्यादा का ध्यान रखना चाहिए. ग्रेवाल ने ट्विटर पर 'विवाद को तूल दे रहे' लोगों की मंशा पर सवाल उठाए हैं और केंद्र सरकार से कहा है कि वो 'ऐसी हरकतों पर लगाम कसे.'

वायरल वीडियो में क्या है?

सोशल मीडिया पर एक 40 सेकेंड का वीडियो शेयर किया जा रहा है. ये वीडियो कब का है और इसे किसने रिकॉर्ड किया है, इस बारे में कोई जानकारी सामने नहीं आई है.

वीडियो में एक महिला की आवाज़ सुनाई देती है, एक पुरुष उससे सवाल करता है, "किसने रोका?"

महिला जवाब देती है, "इसने पग (पगड़ी) वाले ने."

पुरुष पूछता है, "इसने." महिला सहमति जताती है.

पुरुष पगड़ी वाले व्यक्ति से मुखातिब होता है और कहता है, "हां जी सरदार जी, आपने गुड़िया को अंदर जाने से रोका क्या कारण है."

पगड़ी वाला व्यक्ति कहता है, "ये फ्लैग साफ़ कर लें"

पुरुष सवाल करता है, "क्यों, इंडिया नहीं है ये"

पगड़ी वाला व्यक्ति गर्दन हिलाते हुए कहता है, "ये पंजाब है."

पुरुष कहता है, "रिकॉर्डिंग करो"

इसके बाद महिला और पुरुष दोनों की पगड़ी वाले व्यक्ति से बहस शुरू हो जाती है. आखिर में पगड़ी वाला व्यक्ति फ़ोन की तरफ हाथ बढ़ता नज़र आता है.

क्या कह रहे हैं लोग?

ये वीडियो कई लोग सोशल मीडिया पर शेयर कर रहे हैं. कई लोग इस पर अपनी प्रतिक्रिया भी दे रहे हैं.

कुछ लोग पगड़ी वाले सेवादार पर सवाल उठा रहे हैं तो कुछ लोग वीडियो बनाने वालों की मंशा को लेकर सवाल पूछ रहे हैं.

नवप्रीत कौर नाम की ट्विटर यूज़र ने लिखा है, "एक लड़की को स्वर्ण मंदिर में दाखिल होने से रोक दिया गया क्योंकि उन्होंने अपने चेहरे पर भारतीय झंडा पेंट कराया हुआ था. जिस व्यक्ति ने उन्हें स्वर्ण मंदिर में दाखिल नहीं होने दिया, उन्होंने कहा, ये पंजाब है भारत नहीं."

इस्कॉन के प्रवक्ता राधारमण दास ने ट्विटर पर लिखा है, "ये सदमे में डालने वाली बात है! स्वर्ण मंदिर में महिला को प्रवेश करने से रोक दिया गया क्योंकि उनके चेहरे पर भारतीय झंडे का टैटू था. "

पत्रकार और लेखक जगतार सिंह ने ट्विटर पर लिखा है, "पंजाब का स्वर्ण मंदिर (दरबार साहिब) पर्यटन स्थल नहीं है और इसके अलग नियम और पवित्रतता है. एसजीपीसी को पर्यटकों को इस बारे में शिक्षित करना चाहिए. इस परिसर में अकाल तख्त सिख संप्रभुता का प्रतिनिधित्व करता है. इसके अंदर सिर्फ़ सिख झंडा लाने की इजाज़त है."

तमन्ना नाम की ट्विटर यूज़र ने लिखा है, "मुझे स्वर्ण मंदिर या फिर यहां के किसी और गुरुद्वारा में कभी ऐसी दिक्कत का सामना नहीं करना पड़ा है. ये तथ्य है. मेरे करीब के लोगों को भी कभी ऐसी दिक्कत नहीं हुई लेकिन अगर मुंह पर पेंट लगाकर जोकर बनके तमाशे करने जाओगे तो तमाशा ही मिलेगा ना."

एसजीपीसी ने क्या कहा?

शिरोमणि गुरुद्वारा प्रंबधक कमिटी (एसजीपीसी) ने भी इस मामले का संज्ञान लिया है और एक बयान जारी किया है.

एसजीपीसी के महासचिव गुरचरण सिंह ग्रेवाल ने कहा है कि अगर किसी यात्री को ठेस पहुंची है तो वो माफी मांगते हैं लेकिन साथ ही उन्होंने वीडियो वायरल करने वालों की मंशा पर सवाल भी उठाए हैं.

ग्रेवाल ने कहा, "हम ये स्पष्ट कर देना चाहते हैं कि दुनिया के किसी भी कोने से, किसी भी धर्म या जाति का श्रद्धालु गुरु रामदास पातशाह के दरबार में आता है वो सत्कार योग्य है. उसके चरणों में नमस्कार है. वो यहां आकर क्या करता है, ये बाद की बात है."

उन्होंने बीते दिनों हुई एक घटना का भी ज़िक्र किया जहां कुछ लोगों ने जान बूझकर ऐसे कपड़े पहने जिनसे सिखों की भावनाएं आहत हुईं. ग्रेवाल ने कहा, "दूसरी बात किसी भी धार्मिक स्थान की अपनी एक मर्यादा होती है. उस मर्यादा में पहनावा ठीक रखें, नशा करके न आए. हमारे सेवादार इस बारे में लोगों के सचेत करते हैं."वायरल वीडियो को लेकर ग्रेवाल ने कहा, "पिछले दिनों में हुई घटनाओं की पृष्ठभूमि में यहां के एक प्रबंधक नौजवान ने ज़रूर उनके साथ बहस की. उनके द्वारा उकसाए जाने के बाद उस अधिकारी ने कुछ बातें कहीं."

उन्होंने कहा, "मैं खुले दिन के साथ, एक ज़िम्मेदार व्यक्ति होने के नाते किसी भी यात्री के मन में दुर्व्यवहार की बात आई है, तो इस बात के लिए मैं एसजीपीसी का प्रमुख होने के नाते माफ़ी मांगता हूँ. ये हुई पहली बात." ग्रेवाल ने कहा, "दूसरी बात - ट्वीट करने वालों की मंशा क्या है? और उस ट्वीट के बाद कैसे जवाब दिए जा रहे हैं, उन्हें देखकर मेरा सिर शर्म झुक रहा है. क्योंकि ये बताया जा रहा है कि पंजाब देश का हिस्सा नहीं. क्या उन्हें पता नहीं कि हिंदूस्तान को आज़ाद करवाने के लिए पंजाब ने क्या किया? क्या वो लोग जानते नहीं कि इस तिरंगे को दुनिया में सम्मान मिलता है उसका कारण कौन लोग हैं. सौ में से 90 फांसियां किसे हुईं? इस बारे में कोई ट्वीट करेगा?"

उन्होंने आरोप लगाया, "इनकी मंशा ठीक नहीं है. जानबूझ कर सिखों को बदनाम किया जा रहा है. मैं चाहता हूं कि जो लोग आज ट्विटर पर सवाल उठा रहे हैं वो अपने अंदर झांके और पूछें की इस देश को आज़ाद किसने करवाया."

ग्रेवाल ने कहा, "उस बच्चे के चेहरे पर अगर तीन रंग थे तो वो तिरंगा नहीं हो गया. मैं फिर दोरहाता हूँ कि हर धार्मिक स्थान की एक मर्यादा होती है. इन बातों को इस तरह न किया जाए क्योंकि सिखों ने इस देश के लिए बड़ी कुर्बानियां दी हैं. एक ट्वीट करके आप सिखों की कुर्बानी को नहीं भुला सकते."

ग्रेवाल ने केंद्र सरकार से भी इस ओर ध्यान देने को कहा है.

उन्होंने कहा, "मैं भारत सरकार से स्पष्ट कह देना चाहता हूं कि ऐसी हरकतों पर लगाम कसे, ऐसी साज़िशों में शामिल न हों."

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