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अतीक़ अहमद: मुक़दमों से घिरे बाहुबली की पत्नी, भाई और बेटों के 'जुर्म' की पूरी दास्तां
- Author, अनंत झणाणें
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, लखनऊ
अतीक़ अहमद और उनके भाई की प्रयागराज में मेडिकल के लिए ले जाते समय हत्या कर दी गई है. पुलिस ने तीन हमलावरों को गिरफ्तार किया है और हत्या की जांच के लिए न्यायायिक आयोग गठित कर दिया गया है.
इस घटना के बाद पूरे उत्तर प्रदेश में धारा 144 लगा दी गई है.
अतीक़ अहमद और उनके परिवार ने निचली अदालतों से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक सुरक्षा की मांग की थी.
एक महीना पहले ही अतीक़ अहमद ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर उमेश पाल की हत्या की जांच के दौरान अपनी सुरक्षा सुनिश्चित किए जाने की मांग की थी.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा था, 'राज्य की मशीनरी आपका ख़्याल रखेगी.'
पूर्व सांसद अतीक़ अहमद का लंबा आपराधिक इतिहास था और उन पर सौ से अधिक मुक़दमे दर्ज थे.
अतीक़ के भाई अशरफ़ का भी आपराधिक इतिहास था और उन पर 52 मुक़दमे चल रहे थे.
पिछले छह साल में उत्तर प्रदेश सरकार ने अतीक़ अहमद, उनके भाई और उनके गैंग से जुड़े लोगों के ख़िलाफ़ कई कार्रवाइयां की हैं और अनुमानों के मुताबिक उनकी और उनसे जुड़े लोगों की लगभग 800 करोड़ रुपए की संपत्तियों को ज़ब्त और ज़मीनदोज़ किया गया है.
अतीक़ के दो बेटे भी अलग-अलग मामलों में जेल में बंद हैं.
बेटे का एनकाउंटर
उमेश पाल हत्याकांड मामले में उत्तर प्रदेश की एसटीएफ़ ने अतीक़ अहमद के बेटे असद और एक और 'शूटर' ग़ुलाम को गुरुवार दोपहर झाँसी में मुठभेड़ में मार गिराया.
उत्तर प्रदेश पुलिस ने उमेश पाल की हत्या से जुड़ी अपनी जांच में इसे बड़ी उपलब्धि बताया.
लेकिन क्या है अतीक़ अहमद और उनके परिवार के सदस्यों का आपराधिक इतिहास और कैसे इस माहौल में उनका परिवार मुक़दमों और आरोपों से घिरा नज़र आ रहा है.
बीबीसी ने दस्तावेज़ों, वकीलों और पुलिस अधिकारियों से जानने की कोशिश की.
असद अहमद, अतीक़ अहमद का तीसरा बेटा
सबसे पहले बात करते हैं असद अहमद की जिसे एसटीएफ ने झांसी में मुठभेड़ में मार गिराया. असद अतीक के तीसरे बेटे थे.
उत्तर प्रदेश पुलिस ने जो प्रेस रिलीज़ जारी की उसके मुताबिक़, असद के ख़िलाफ़ एक ही मुक़दमा था और वो था उमेश पाल और उनके दो गनर ही हत्या का मुक़दमा जिसमें वो घटना के बाद फ़रार चल रहे थे.
पुलिस के मुताबिक़, उमेश पाल की हत्या से जुड़े सीसीटीवी फ़ुटेज में असद को गोली चलाते हुए देखा जा सकता है.
पुलिस के मुताबिक़, असद की पैदाइश सितंबर 2003 की थी और वो 19 साल के थे.
असद ने शुरुआती स्कूली पढ़ाई प्रयागराज से की और बाद में लखनऊ के एक निजी स्कूल में पढ़ाई पूरी की.
अतीक़ अहमद के वकील विजय मिश्रा के मुताबिक़, असद विदेश में लॉ की पढ़ाई करना चाहते थे जिसके लिए उन्होंने पासपोर्ट के लिए भी अप्लाई किया था.
लेकिन विजय मिश्रा का कहना है कि असद के पासपोर्ट के पुलिस सत्यापन (वेरिफ़िकेशन) में नेगेटिव रिपोर्ट के कारण उसका पासपोर्ट नहीं बन पाया और वो विदेश पढ़ने के लिए नहीं जा सके.
मुठभेड़ के बाद असद का पोस्टमॉर्टम झाँसी में किया गया और शनीवार को उनका अंतिम संस्कार प्रयागराज में हुआ था.
अतीक़ अहमद अपने बेटे के जनाज़े में शामिल नहीं हो सके थे.
अतीक़ अहमद: 100 से अधिक मुक़दमे
अतीक़ अहमद को साबरमती जेल में रखा गया था और उनके ख़िलाफ़ एमपीएमएलए अदालत में चल रहे 50 से अधिक मामलों में कार्रवाई वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग के माध्यम से की जा रही थी.
लेकिन अतीक़ अहमद के आपराधिक इतिहास में 100 से भी अधिक मुक़दमे दर्ज हैं.
प्रयागराज के अभियोजन अधिकारियों के मुताबिक़, अतीक़ अहमद के ख़िलाफ़ 1996 से अब तक 50 मुक़दमे विचाराधीन हैं.
अभियोजन पक्ष का कहना है कि 12 मुक़दमों में अतीक़ और उनके भाई अशरफ़ के वकीलों ने अर्ज़ियां दाख़िल की हैं जिससे केस में चार्जेज़ फ़्रेम नहीं हो पाए हैं.
अतीक़ अहमद बसपा विधायक राजू पाल ही हत्या के मुख्य अभियुक्त थे. इस मामले की जांच अब सीबीआई कर रही है.
इस साल 28 मार्च को प्रयागराज की एमपीएमएलए अदालत ने अतीक़ अहमद को उमेश पाल का 2006 में अपहरण करने के आरोप में दोषी पाया और उम्र कै़द की सज़ा सुनाई.
उमेश पाल राजू पाल हत्याकांड के शुरुआती गवाह थे, लेकिन बाद में मामले की जांच संभाल रही सीबीआई ने उन्हें गवाह नहीं बनाया था.
अशरफ़, अतीक़ का भाई
अतीक़ के भाई अशरफ उर्फ़ खालिद आज़मी के ख़िलाफ़ 52 मुक़दमे दर्ज हैं. इसमें हत्या, हत्या का प्रयास, बलवा (उपद्रव) और अन्य धाराओं के तहत मामले दर्ज हैं.
अशरफ़ को उमेश पाल की हत्या के मामले में भी अभियुक्त बनाया गया है.
ग़ौर करने वाली बात यह है कि अशरफ़ उमेश पाल के अपहरण वाले मामले के फै़सले में निर्दोष पाया गया था. इसी मुक़दमे में अतीक़ और दो अन्य को दोषी पाया गया और 6 अभियुक्त बरी हुए.
अशरफ़ बसपा विधायक राजू पाल की 2005 में हुई हत्या के भी अभियुक्त हैं और इनका मुक़दमा लखनऊ की सीबीआई अदालत में चल रहा है.
अशरफ को बरेली जेल में रखा गया था और उन्हें पेशी के लिए प्रयागराज लाया जाता था.
शनिवार शाम जब उनकी हत्या हुई तब भी उन्हें पुलिस ने पूछताछ के लिए प्रयागराज बुलाया था.
शाइस्ता परवीन, अतीक़ अहमद की पत्नी
अतीक अहमद की पत्नी शाइस्ता परवीन भी उमेश पाल की हत्या के मामले में नामज़द अभियुक्त हैं.
शाइस्ता परवीन के ख़िलाफ़ 2009 में प्रयागराज के कर्नलगंज में धोखाधड़ी के तीन मामले दर्ज हुए थे जो अभी भी अदालत में विचाराधीन हैं.
शाइस्ता परवीन फ़िलहाल फ़रार चल रही हैं. उन्होंने अदालत से अग्रिम ज़मानत भी माँगी थी, लेकिन उस मांग को ठुकरा दिया गया.
इस साल जनवरी के महीने में बसपा ने निकाय चुनाव में उन्हें प्रत्याशी घोषित किया था, लेकिन कुछ दिन पहले मायावती ने उनका टिकट काट दिया और एलान किया की वो निकाय चुनाव में अतीक़ अहमद के परिवार के किसी भी सदस्य को पार्टी से प्रत्याशी नहीं बनाएंगी.
उमर अहमद, अतीक अहमद का सबसे बड़ा बेटा
अतीक अहमद के सबसे बड़े बेटे उमर लखनऊ के व्यापारी मोहित जायसवाल के अपहरण के मामले में मुख्य अभियुक्तों में से एक हैं.
उन्होंने अगस्त 2022 में लखनऊ में सरेंडर किया था.
दरअसल अतीक अहमद और उमर पर 2018 में मोहित जायसवाल के अपहरण का आरोप लगा जिसमें कहा गया कि मोहित जायसवाल को लखनऊ से अग़वा करके मारपीट की गई और उनकी कंपनियों को हड़पने की कोशिश की गई.
जब सीबीआई ने मामले की जांच संभाली तब उमर को मुक़दमे में अभियुक्त बनाया गया.
उमर ने भी लॉ की पढ़ाई की है. फ़िलहाल उमर लखनऊ जेल में है और मुक़दमा लखनऊ की सीबीआई अदालत में विचाराधीन है.
अली अहमद, अतीक़ अहमद का दूसरा बेटा
अतीक़ अहमद के दूसरे बेटे हैं अली अहमद. उनके ख़िलाफ़ प्रयागराज में कुल चार मामले दर्ज हैं. लेकिन उनके ख़िलाफ़ प्रमुख मामला प्रयागराज में रंगदारी को लेकर मारपीट का है.
अली पर प्रयागराज में ज़ीशान नाम के प्रॉपर्टी डीलर से रंगदारी वसूलने और जानलेवा हमला करने का आरोप है.
इस आरोप के तहत उनके ख़िलाफ़ उपद्रव करने, हत्या का प्रयास करने का मामला दर्ज है.
अली ने प्रयागराज में जुलाई 2021 में सरेंडर कर दिया था और फ़िलहाल वो प्रयागराज के नैनी जेल में हैं.
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अतीक़ के दो नाबालिग़ बेटे
उमेश पाल की हत्या के बाद फ़रार चल रही अतीक़ की पत्नी शाइस्ता परवीन ने आरोप लगाया कि पुलिस ने उनके दो नाबालिग़ बेटों को ग़ैरक़ानूनी तरीक़े से घर से ले जाकर कहीं रखा है.
उन्होंने दोनों बेटों के नाम से बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दाख़िल की जिसमें उन्होंने पुलिस को अपने दोनों बेटों को अदालत के सामने पेश करने की मांग की.
शाइस्ता परवीन का आरोप है कि 24 फ़रवरी की शाम को पुलिस बिना महिला पुलिस के ज़बर्दस्ती उनके घर में घुस आई और दोनों बेटों को ले गई और किसी अघोषित स्थान पर ग़ैरक़ानूनी तरीक़े से रखा हुआ है और शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रही है.
इनमें से एक बेटा 12वीं में पढ़ता है और दूसरा बेटा कक्षा नौ का छात्र है.
शाइस्ता परवीन की मांग के जवाब में थाना धूमनगंज के एसआई राजेश कुमार मौर्य ने कोर्ट को बताया, "दोनों के चकिया कसारी मसारी क्षेत्र में मिलने की सूचना पर ज़िले की चाइल्ड वेलफ़ेयर समिति (सीडब्लूसी) के सामने पेश करने के बाद बाल संरक्षण केंद्र राजरूपपुर में दो मार्च को दाख़िल कराया गया है."
पुलिस ने शाइस्ता परवीन के आरोपों को ग़लत बताया और हाईकोर्ट ने अतीक़ के बेटों की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका को ख़ारिज कर दिया. पुलिस के मुताबिक़ वो बाल संरक्षण केंद्र में ही मौजूद हैं.
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