भारत सरकार ने कहा- बीबीसी पंजाबी का अकाउंट ब्लॉक करने का निर्देश नहीं दिया

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बीबीसी पंजाबी के ट्विटर अकाउंट को मंगलवार को कई घंटों तक ब्लॉक रखने के बाद इसे बहाल कर दिया गया.

बीबीसी को इस ब्लॉक की जानकारी देते हुए ट्विटर ने ईमेल के ज़रिए बताया था कि ये एक्शन भारत सरकार की मांग पर किया गया.

लेकिन भारत सरकार ने बीबीसी को दिए जवाब में इलेक्ट्रॉनिक एवं सूचना प्रद्यौगिकी मंत्रालय की ओर ऐसे किसी निर्देश दिए जाने से इनकार किया.

बीबीसी के ईमेल पर भारत सरकार की ओर से जवाब देते हुए कहा गया है कि "रिकॉर्ड के आधार पर, इलेक्ट्रॉनिक एवं सूचना प्रौद्यौगिकी मंत्रालय ने बीबीसी पंजाबी के ट्विटर अकाउंट को ब्लॉक करने का कोई निर्देश जारी नहीं किया."

मंत्रालय ने कहा है कि बीबीसी की शिकायत ट्विटर के पास भेजी गई है और उन्हें इस पर स्पष्टीकरण देने को कहा गया है. मंत्रालय ने ये भी कहा है कि बीबीसी सीधे ट्विटर से भी संपर्क कर सकता है.

मंत्रालय ने कहा है- 'अगर आप ट्विटर के जवाब से संतुष्ट नहीं होते हैं तो इस स्थिति में https://gac.gov.in पर संपर्क करें.'

'वारिस पंजाब दे' संगठन के प्रमुख अमृतपाल सिंह के ख़िलाफ़ पंजाब पुलिस की कार्रवाई के बाद कई ट्विटर अकाउंट्स को ब्लॉक किया जा रहा है.

इस फ़ेहरिस्त में बीबीसी न्यूज़ पंजाबी भी शामिल रहा, जिसका ट्विटर अकाउंट कई घंटों तक ब्लॉक रखा गया.

हालांकि अब ये अकाउंट बहाल कर दिया गया है.

बीबीसी न्यूज़ पंजाबी का ट्विटर अकाउंट ब्लॉक करने के बाद पन्ने पर लिखा आ रहा था- 'अकाउंट विदहेल्ड'

ट्विटर अकाउंट्स के ख़िलाफ बड़ी कार्रवाई

चंडीगढ़ स्थित एक डिजिटल मीडिया संगठन के लिए काम करने वाले गगनदीप सिंह का ट्विटर अकाउंट 19 मार्च को सस्पेंड कर दिया गया था.

बीबीसी पंजाबी सेवा की पत्रकार अर्शदीप कौर से बात करते हुए गगनदीप सिंह ने कहा, "मेरा ट्विटर अकाउंट 19 मार्च को ब्लॉक कर दिया गया था. ट्विटर की ओर से शेयर की गई जानकारी के मुताबिक़, भारत सरकार ने मेरे अकाउंट को ब्लॉक करने के लिए ट्विटर से अनुरोध किया है."

गगनदीप सिंह ने बताया, 'मैंने 18 मार्च को ट्विटर पर एक वीडियो पोस्ट किया था, जो सोशल मीडिया पर पहले ही वायरल हो चुका था. इस वीडियो में अमृतपाल सिंह और उनके साथी एक कार में बैठे नज़र आ रहे हैं. यह वीडियो 18 मार्च का ही था."

गगनदीप की तरह ही कई राष्ट्रीय और क्षेत्रीय मीडिया संगठनों के लिए स्वतंत्र पत्रकार के तौर पर काम करने वाले संदीप सिंह का ट्विटर अकाउंट भी ब्लॉक कर दिया गया है.

गगनदीप

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संदीप सिंह ने बीबीसी पंजाबी सेवा के पत्रकार अवतार सिंह से कहा, "20 मार्च को मैंने दो पत्रकारों के ब्लॉक किए गए ट्विटर अकाउंट के स्क्रीनशॉट ट्वीट किए थे. शाम को किसी ने फ़ोन करके बताया कि मेरा अकाउंट भी विदहेल्ड कर दिया गया है."

संदीप सिंह बताते हैं, "जिस दिन से पंजाब में अमृतपाल सिंह और उसके साथियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई का मामला शुरू हुआ, उसी दिन से हम सूचनाएँ शेयर कर रहे थे. जो भी कुछ टीवी पर दिखाया जा रहा था, मैं बस वही ख़बर शेयर कर रहा था."

''दरअसल सरकार की मर्ज़ी से काम करने वाले समाचार संगठनों को खुला छोड़ दिया गया है लेकिन जो लोग या न्यूज़ संगठन अलग-अलग सूचनाएँ सामने ला रहे हैं, उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई की जा रही है.''

नाम न छापने की शर्त पर एक पत्रकार ने बीबीसी पंजाबी के साथ 75 खातों की एक सूची साझा की है.

इस लिस्ट के मुताबिक़, भारत सरकार ने भारत में 75 ट्विटर अकाउंट को ब्लॉक करने को कहा था.

हालांकि बीबीसी स्वतंत्र रूप से इस सूची की पुष्टि नहीं करता है.

इंटरनेट फ्रीडम फाउंडेशन के एग्ज़ीक्यूटिव डायरेक्टर अपार गुप्ता ने इस मामले पर बीबीसी से बात करते हुए कहा, "बिना किसी क़ानूनी आदेश को सार्वजनिक किए हुए सरकार की ओर से ट्विटर अकाउंट ब्लॉक किए जाने से लोगों के लिए कानूनी मदद लेना भी मुश्किल हो जाता है, क्योंकि कार्रवाई क्यों की गई है इसकी वज़ह साफ़ नहीं होती."

"कई सम्मानित मीडिया संस्थाओं के अकाउंट पर रोक लगा कर सूचनाओं को बाहर आने से रोका जा रहा है और ये लोगों के सूचना पाने के अधिकार पर हमला है. ये एक परेशान करने वाला ट्रेंड है, चार दिन तक पंजाब में इंटरनेट बंद रखा गया जिससे लोगों के बीच कोई सूचना नहीं पहुंच पाई."

अमृतपाल सिंह और उसके साथियों के ख़िलाफ़ पुलिस कार्रवाई 18 मार्च से शुरू हुई थी.

इस कार्रवाई के शुरू होने के एक दिन बाद से ही भारत में पंजाब से जुड़े कई पत्रकारों, लेखकों, टिप्पणीकारों, सामाजिक और राजनीतिक कार्यकर्ताओं के ट्विटर अकाउंट ब्लॉक किए जा रहे हैं.

अमृतपाल कौन हैं?

अमृतपाल सिंह वारिस पंजाब दे संगठन के प्रमुख हैं. वह सिखों के लिए खालिस्तान नाम का एक अलग देश बनाने की मांग कर रहे हैं.

कई साल दुबई में रहने के बाद वह पिछले साल अगस्त में पंजाब लौटे और अमृत संचार और नशा मुक्त आंदोलन के नाम पर युवाओं को अपने साथ जोड़ना शुरू किया.

लेकिन वे अपने विवादित भाषणों और अजनाला थाने के सामने हिंसा के कारण विवादों में रहे.

पुलिस 18 मार्च से उन्हें तलाश करने में जुटी हुई है और इस कार्रवाई में पंजाब में उनके समर्थकों की बड़े पैमाने पर गिरफ़्तारी हो रही है.

बीबीसी पंजाबी

ट्विटर ने क्या कहा

बीबीसी को भेजे गए ईमेल में ट्विटर ने लिखा था, "पारदर्शिता के हित में, हम आपको लिखित रूप में सूचित कर रहे हैं कि हमें आपके ट्विटर अकाउंट को रोकने के संबंध में भारत सरकार की ओर से क़ानूनी मांग मिली है."

ट्विटर ने बीबीसी पंजाबी की दो ख़बरें शेयर करते हुए लिखा था कि "ये दो ख़बरें भारत के सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000 का उल्लंघन है."

ट्विटर ने लिखा था कि "यह क़ानून ट्विटर को भारत में इस कंटेंट को ब्लॉक करने के लिए बाध्य करता है, यह कंटेंट भारत के बाहर अन्य जगहों पर उपलब्ध रहेगा."

ट्विटर ने बीबीसी को ईमेल में बताया था कि वे इस बारे में भारतीय अधिकारियों के संपर्क में हैं, और अगर आपके अकाउंट की स्थिति में कोई बदलाव होता है, तो इसकी सूचना दी जाएगी.

पंजाब में खालिस्तान की मांग कर रहे अमृतपाल सिंह के ख़िलाफ़ कार्रवाई के बाद पंजाब में कई पत्रकारों के ट्विटर अकाउंट बंद कर दिए गए.

पंजाब पुलिस के मुताबिक़ अमृतपाल सिंह अभी फरार हैं.

ट्विटर अकाउंट 'विदहेल्ड' होने का मतलब?

ट्विटर के हेल्प सेंटर के मुताबिक़, 'ज़्यादातर देशों में ट्विटर अकाउंट के कंटेंट और ट्विट्स को लेकर कुछ नियम हैं. अगर हमें किसी कंटेंट या अकाउंट के संबंध में अधिकृत विभाग से कोई शिकायत मिलती है, तो अकाउंट को रोक दिया जाता है."

ट्विटर के अनुसार, "अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए पारदर्शिता आवश्यक है. इसलिए ब्लॉक किए गए कंटेंट या अकाउंट के लिए नोटिस पॉलिसी भी है. जैसे ही हमें अकाउंट ब्लॉक जाने की शिकायत मिलती है, हम यूज़र को सूचित करते हैं (अदालत के आदेश की स्थिति में सूचित नहीं किया जा सकता है.)

बीबीसी न्यूज पंजाबी का ट्विटर अकाउंट ब्लॉक होने पर किसने क्या कहा था?

ट्विटर

बीबीसी न्यूज़ पंजाबी का ट्विटर अकाउंट ब्लॉक होने के बाद कई लोगों ने इस पर प्रतिक्रिया दी थी.

पत्रकार आदित्य राज कौल ने लिखा था, "पंजाब में क़ानून व्यवस्था को लेकर ग़लत सूचना फ़ैलाने और भारत विरोधी प्रचार के कारण बीबीसी न्यूज़ पंजाबी के ट्विटर अकाउंट पर प्रतिबंध लगा दिया गया है."

वरिष्ठ पत्रकार हरतोष सिंह बल ने लिखा था, "पारदर्शिता का डर तानाशाही की मूर्खता है. "

हरतोष बल
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