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अमृतपाल सिंह के घर पहुंची पंजाब पुलिस, अब तक जो कुछ मालूम है
पंजाब पुलिस बीते पांच दिनों से 'वारिस पंजाब दे' संगठन के प्रमुख अमृतपाल सिंह को पकड़ने के लिए राज्य भर में तलाशी अभियान चला रही है.
अब तक इस मामले में 100 से ज़्यादा लोगों को गिरफ़्तार किया जा चुका है जिनमें अमृतपाल सिंह के चाचा और ड्राइवर भी शामिल हैं.
पुलिस ने अब तक ऐसी तमाम गाड़ियां और हथियार बरामद किए हैं जिनका संबंध अमृतपाल सिंह से बताया जा रहा है.
इनमें वह मर्सिडीज़ कार भी शामिल है जिसे अमृतपाल सिंह इस्तेमाल किया करते थे.
इसके साथ ही पुलिस ने उस ब्रेज़ा गाड़ी और मोटरसाइकिल को भी बरामद किया है जिससे अमृतपाल सिंह कथित रूप से भागने में सफल हुए थे.
पंजाब पुलिस इस मामले की अलग-अलग कोणों से जांच करने की कोशिश कर रही है. इनमें वित्तीय एंगल के साथ-साथ विदेशी शक्तियों की भूमिका आदि शामिल है.
लेकिन अब तक पुलिस को ये पता नहीं चल पाया है कि अमृतपाल इस समय कहां हैं?
अमृतपाल सिंह के घर पहुंची पुलिस
समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक़, पंजाब पुलिस की एक टीम बुधवार को अमृतपाल सिंह के अमृतसर स्थित आवास पर पहुंची है.
कुछ ख़बरों के मुताबिक़, पुलिस ने अमृतपाल सिंह की पत्नी और माँ किरणदीप सिंह के साथ पूछताछ की है.
हालांकि, अब तक पुलिस की ओर से इस बारे में पुख़्ता जानकारी नहीं दी गयी है.
अमृतपाल सिंह के ख़िलाफ़ पिछले 24 घंटों में लुक आउट नोटिस और ग़ैर जमानती वारंट जारी किया गया है.
इसके साथ ही अमृतपाल सिंह और उनके पांच सहयोगियों के ख़िलाफ़ राष्ट्रीय सुरक्षा क़ानून के तहत भी मामले दर्ज किए गए हैं.
पंजाब पुलिस के आईजी सुखचैन सिंह गिल ने बताया है कि अमृतपाल सिंह के ख़िलाफ़ लुकआउट नोटिस के साथ-साथ ग़ैर-जमानती वारंट जारी किया गया है.
समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक़, एसएसएपी स्वर्णदीप सिंह ने बताया है कि अमृतपाल सिंह जिस मोटरसाइकिल पर बैठकर भागा था, उसे बरामद कर लिया गया है.
आईजीपी सुखचैन सिंह गिल ने ये भी कहा है कि 'अब तक 114 लोगों को कस्टडी में लिया गया है. 78 लोगों को पहले दिन, 34 को दूसरे दिन और 2 लोगों को तीसरे दिन कस्टडी में लिया गया. इन सब पर राज्य में शांति भंग करने का आरोप है.'
सुखचैन सिंह गिल ने बताया है कि अमृतपाल जिस मारूती ब्रेज़ा कार में फ़रार हुए हैं उसे बरामद कर लिया गया है.
उन्होंने बताया कि अमृतपाल ने अपने कपड़े बदले थे और फ़रार होने के लिए कई गाड़ियों और मोटरसाइकिलों का इस्तेमाल किया था.
इसके साथ ही अमृतपाल की भागने में मदद करने वाले चार लोगों को हिरासत में लिया गया है.
पुलिस ने अब तक जिन लोगों को गिरफ़्तार किया है, उनमें दलजीत सिंह काल्सी भी शामिल हैं जिन्हें 'वारिस पंजाब दे' का फाइनेंसर बताया जा रहा है.
इसके साथ ही अमृतपाल सिंह के चाचा हरजीत सिंह और ड्राइवर हरप्रीत सिंह को भी गिरफ़्तार करके असम की डिब्रूगढ़ जेल भेजा गया है.
अब तक क्या बोले हैं मुख्यमंत्री मान
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इस मामले में कल ही वीडियो संदेश जारी किया है.
इस संदेश में उन्होंने कहा, "पिछले दिनों कुछ तत्व ऐसे थे जो विदेशी ताकतों के हाथ चढ़कर पंजाब में माहौल खराब करने की बातें कर रहे थे, नफ़रत भरी स्पीच दे रहे थे, क़ानून के ख़िलाफ़ बोल रहे थे. ऐसे लोगों पर कार्रवाई की गई है और उन्हें पकड़ा गया है. ऐसे लोगों को सख़्त से सख़्त सज़ा दी जाएगी."
भगवंत मान ने पंजाब के अमन-चैन को अपनी प्राथमिकता बताते हुए कहा कि देश के ख़िलाफ़ राज्य में पनप रही किसी भी ताकत को बख़्शा नहीं जाएगा.
उन्होंने कहा, "मेरे शरीर में खून का एक-एक कतरा पंजाब के लिए है."
इसके साथ ही मान ने अमृतपाल सिंह के मामले को देश के ख़िलाफ़ साजिश करार दिया है. उनका कहना है कि नफ़रत फैलाने वाले सभी पकड़े गए हैं.
हालांकि, उन्होंने इस दौरान एक बार भी अमृतपाल सिंह या वारिस पंजाब दे संगठन का नाम नहीं लिया.
जैसे-जैसे ये मामला आगे बढ़ता जा रहा है, वैसे-वैसे पंजाब सरकार के लिए दिक्कतें पैदा हो रही हैं.
पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने इस मामले में राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाई है.
उच्च न्यायालय ने इस मामले की सुनवाई करते हुए राज्य सरकार से कहा है कि अगर 80 हज़ार पुलिसकर्मियों के रहते हुए अमृतपाल भाग गया है तो यह ख़ुफ़िया तंत्र की बड़ी चूक है.
कांग्रेस ने लगाए गंभीर आरोप
इसके साथ ही कांग्रेस पार्टी ने भी पंजाब विधानसभा में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी की सरकार को घेरा है.
पंजाब विधानसभा में विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा ने सदन के बाहर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पंजाब सरकार पर आरोप लगाया है कि अमृतपाल सिंह के ख़िलाफ़ पुलिस की कार्रवाई से राज्य और केंद्र सरकार के दो मकसद हैं.
प्रताप सिंह बाजवा ने कहा, "केंद्र की मंशा संसद में इसके जरिए अदानी मुद्दे से लोगों का ध्यान भटकाना था. मीडिया इसे दिखा रहा हैं, वे अन्य सभी मुद्दों को भूल गए."
इसके साथ ही उन्होंने कहा कि लंदन में जो हुआ, हमारे झंडे का अपमान किया गया, हम उसकी निंदा करते हैं.
बाजवा ने कहा, "हमारा यह गंभीर आरोप है कि भगवंत मान केंद्र के हाथों का मोहरा बन गए हैं."
बाजवा ने कहा कि अगर अमृतपाल को गिरफ़्तार करना था तो उनके घर से ही उन्हें पकड़ा जा सकता है. उसके साथ 35-40 आदमी थे. लेकिन जालंधर जिले के शाहकोट लाकर उन्होंने उसे गिरफ्तार करने की कोशिश की.
जालंधर उपचुनाव का फायदा उठाने के लिए भगवंत मान ने केंद्र के साथ मिलकर इस ऑपरेशन को अंजाम दिया. उनका उद्देश्य जालंधर उपचुनाव जीतना था.
बाजवा के मुताबिक, दूसरी तरफ सिद्धू मूसेवाला की बरसी पर तोड़फोड़ करने के लिए 18 तारीख को चुना गया. इसी तारीख़ को इंटरनेट बंद कर दिया गया जिससे श्रमिक, छात्र और बहुत से लोग प्रभावित हुए.
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