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तेजस्वी यादव बोले, 'नीतीश कुमार प्रधानमंत्री नहीं बनना चाहते': प्रेस रिव्यू
बिहार के उप-मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने बीते सोमवार को बिहार विधानसभा में नीतीश कुमार की राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को लेकर एक अहम बयान दिया है.
इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित ख़बर के मुताबिक़, राजद नेता तेजस्वी यादव ने कहा है कि 'नीतीश कुमार प्रधानमंत्री नहीं बनना चाहते हैं.'
अख़बार के मुताबिक़, इस बयान का मक़सद राजद और जदयू के बीच अनबन होने से जुड़ी अफ़वाहों का खंडन करना था.
दिलचस्प बात ये है कि इस बयान से ठीक पहले जदयू कार्यालय के बाहर नीतीश कुमार की ओर से पीएम पद की रेस में शामिल होने के संकेत देने वाली विशालकाय होर्डिंग्स नज़र आई थीं.
इन होर्डिंग्स में लिखा था - 'मन की नहीं...काम की' और 'जुमला नहीं, हक़ीक़त.'
इन सभी होर्डिंग्स में सिर्फ़ नीतीश कुमार की विशालकाय तस्वीर नज़र आ रही थी. राजनीतिक हलकों में इसे नीतीश कुमार और उनकी पार्टी की ओर से 2024 की ओर क़दम बढ़ाने के संकेत के रूप में देखा गया है.
क्या बोले तेजस्वी यादव
तेजस्वी यादव ने कहा, "मैं माननीय मुख्यमंत्री जी को धन्यवाद देता हूं कि उन्होंने सही समय पर निर्णय लिया. पूरा देश उन्हें देख रहा है, बधाई दे रहा है कि आपने सही समय पर सही निर्णय लिया.
हमारी कोशिश है कि सब लोग मिल-जुल कर लड़ें. न हमको मुख्यमंत्री बनना है और न उनको प्रधानमंत्री बनना है. हम जहां हैं, ख़ुश हैं. उनके नेतृत्व में काम करने में हमें ख़ुशी है."
बता दें कि लालू यादव और उनके परिवार के ख़िलाफ़ सीबीआई और ईडी की कार्रवाई के बाद राजद और जदयू में अनबन से जुड़ी अफ़वाहें आ रही हैं.
इन ख़बरों और अफ़वाहों पर तेजस्वी यादव ने कहा, "कोई इधर-उधर से बात करता है, वो ग़लत बात न किया करे. तरह-तरह की बातें होती हैं. कोई कुछ भी करेगा...जब हम इनके (नीतीश कुमार) साथ खड़े हैं तो मज़बूती के साथ खड़े हैं. कोई डगमगा नहीं रहे हैं. लोग सपना देखते रहें कि महागठबंधन अब टूटेगा..."
तेजस्वी यादव इससे पहले भी ऐसे बयान देते रहे हैं. लेकिन ये पहला मौका है जब उन्होंने विधानसभा के पटल पर इस तरह का बयान दिया है.
पिछले दिनों केंद्रीय जांच एजेंसियों ने बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू यादव और उनके पारिवारिक सदस्यों से जुड़े भ्रष्टाचार के अलग-अलग मामलों में कार्रवाइयां की हैं.
इनमें पटना और दिल्ली स्थित आवासों पर छापा मारा जाना शामिल है.
इन कार्रवाइयों के साथ ही महागठबंधन में दरारें पड़ने की अफ़वाहों का बाज़ार गर्म हो गया है.
विपक्षी दल बीजेपी ने भी इस मुद्दे पर राजद को घेरने की कोशिश की है.
बीजेपी नेता सुशील मोदी ने बीते रविवार तेजस्वी यादव से पूछा कि वह ये बताएं कि उनके परिवार ने पटना में इतनी ज़्यादा ज़मीन कैसे हासिल की.
अमृतपाल पर चुप क्यों हैं अमित शाह
'वारिस पंजाब दे' संगठन के प्रमुख को गिरफ़्तार करने के लिए पुलिस पिछले चार दिनों से लगातार तलाशी अभियान चला रही है.
लेकिन अब तक अमृतपाल सिंह का पता नहीं लगाया जा सका है. इसी बीच इस मुद्दे पर अमित शाह की चुप्पी ने सुरक्षा तंत्र को सकते में डाल दिया है.
टेलीग्राफ़ अख़बार में प्रकाशित ख़बर के मुताबिक़, गृह मंत्रालय से जुड़े एक सुरक्षा अधिकारी ने कहा है कि इस मामले पर गृहमंत्री की चुप्पी परेशान करने वाली है.
उन्होंने कहा, "शाह की ओर से इस मामले पर साधी गयी चुप्पी परेशान करने वाली है. इसमें कोई राज़ नहीं है कि जब अमृतपाल सिंह सार्वजनिक रूप से भारत से अलग होकर खालिस्तान बनाने की बात कर रहा था, तब उसे विदेशों से पैसा मिल रहा था."
"हालांकि, क़ानून-व्यवस्था राज्य सरकार के अंतर्गत आती है. लेकिन केंद्र और पंजाब सरकार को राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े इस मुद्दे पर एक साथ आना चाहिए.
देश के शीर्ष राजनीतिक नेतृत्व को लघुकालिक राजनीतिक फ़ायदों के बारे में सोचना छोड़कर इस मामले पर कड़े बयान देने चाहिए."
बता दें कि पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कुछ दिनों पहले गृह मंत्री अमित शाह से मुलाक़ात की थी. लेकिन अमित शाह की ओर से इस मुद्दे पर अब तक एक भी बयान सामने नहीं आया है.
पांच सालों में 50 हज़ार सीएपीएफ़ कर्मचारियों ने छोड़ी नौकरी
पिछले पांच सालों में पचास हज़ार से ज़्यादा सीएपीएफ़ (केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल) कर्मचारियों ने अपनी नौकरी से त्यागपत्र दिया है. ये जानकारी राज्यसभा के पटल पर रखी गयी गृह मंत्रालय की रिपोर्ट में सामने आई है.
अंग्रेजी अख़बार द हिंदू में प्रकाशित ख़बर के मुताबिक़, "साल 2018 से 2022 के बीच पांच सालों में 50,155 लोगों ने नौकरी छोड़ी है. इस दौरान सबसे ज़्यादा एट्रीशन रेट यानी नौकरी छोड़ने की दर बीएसएफ़ में दर्ज की गयी है. इसके बाद सीआरपीएफ़ में सबसे ज़्यादा एट्रीशन रेट दर्ज किया गया है. और सबसे कम एट्रीशन रेट सशस्त्र सीमा बल में दर्ज किया गया है.
साल 2021 से 2022 के बीच असम रायफ़ल्स में एट्रीशन 123 से बढ़कर 537 हो गया. वहीं, सीआईएसएफ़ में 966 से बढ़कर 1706 हो गया. इसके साथ ही एसएसबी में एट्रीशन में गिरावट दर्ज की गयी है जहां ये 553 से घटकर 121 हो गया है."
इस रिपोर्ट में ये भी बताया गया है कि साल 2018 से 2022 के बीच 654 सीएपीएफ़ कर्मचारियों ने आत्महत्या की.
सबसे ज़्यादा आत्महत्याएं सीआरपीएफ़ में दर्ज की गयी हैं जिसके बाद बीएसएफ़ और सशस्त्र सीमा बल का स्थान आता है. वहीं, सबसे कम आत्महत्याएं नेशनल सिक्योरिटी गार्ड्स में दर्ज की गयी हैं.
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