अमृतपाल सिंह को पकड़ने के लिए 15 दिन पहले इस तरह बनाई गई योजना- प्रेस रिव्यू

'वारिस पंजाब दे' संगठन के प्रमुख अमृतपाल सिंह

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पंजाब पुलिस 'वारिस पंजाब दे' संगठन के प्रमुख अमृतपाल सिंह की शनिवार से तलाश कर रही है. पुलिस के मुताबिक़ अमृतपाल सिंह अभी तक पुलिस की पकड़ से दूर है लेकिन अब तक उनके 78 साथियों को गिरफ़्तार किया गया है.

लेकिन, अमृतपाल सिंह के ख़िलाफ़ पुलिस कार्रवाई अचानक नहीं हुई बल्कि इसकी तैयारियां क़रीब 15 दिन पहले ही चल रही थीं और सरकार को अमृतसर में जी20 की बैठक ख़त्म होने का इंतज़ार था.

अंग्रेज़ी अख़बार द इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक़ 15 दिनों पहले ही पुलिस ने तैयारियां कर ली थीं कि अमृतपाल सिंह को रामपुरा फुल जाते वक़्त गिरफ़्तार किया जाएगा. रामपुरा फुल में अमृतपाल को शनिवार को एक कार्यक्रम में शामिल होना था.

28 फरवरी को पंजाब सरकार ने केंद्रीय गृह मंत्रालय से केंद्रीय सुरक्षाबलों की 120 कंपनियां भेजने की मांग की थी.

अख़बार ने सूत्रों के हवाले से लिखा है कि अमृतपाल सिंह के 23 फरवरी को अजनाला पुलिस थाने में किए गए हंगामे के बाद उस पर कार्रवाई के लिए पंजाब सरकार तैयारियां कर रही थीं. लेकिन, अमृतसर में 15 से 17 मार्च तक चल रही जी20 की बैठक को देखते हुए सरकार रुकी थी.

हालांकि, जी20 की अमृतसर में रविवार और सोमवार को दो और बैठकें होनी हैं.

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान दो मार्च को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मिले थे. इसके तुरंत बाद केंद्रीय सैन्य सुरक्षाबलों के 2,430 जवान और आठ रेपिड एक्शन फोर्स पंजाब में भेजे गए थे.

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सरकार का कहना था कि होली के दौरान होला मोहल्ला त्योहार को देखते हुए सुरक्षाबल भेजे जा रहे हैं. सभी की निगाहें होला मोहल्ला त्योहार पर थीं कि अमृतपाल को इस दौरान गिरफ़्तार किया जा सकता है.

इस दौरान अमृतपाल ने बयान भी दिया था कि उन्हें गिरफ़्तार होने से डर नहीं लगता.

पंजाब सरकार ने शुक्रवार को पुलिस कार्रवाई शुरू कर दी. शनिवार दोपहर से पंजाब में इंटरनेट सेवाएं बंद करने का फ़ैसला किया गया.

अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) अनुराग वर्मा ने शुक्रवार को ही इसके आदेश पारित कर दिए. आदेश में कहा गया कि समाज के कुछ वर्ग क़ानून व्यवस्था बिगाड़ने, सांप्रदायिक तनाव भड़काने, जान-माल को नुक़सान पहुंचाने के लिए हिंसा भड़का सकते हैं.

इसके तहत कहा गया कि 2जी, 3जी, 4जी, 5जी, सीडीएमए, जीपीआरएस, सभी एसएमएस सेवाएं (बैंक और मोबाइल रिचार्ज छोड़कर) और सभी डोंगल सेवाएं अस्थाई तौर पर शनिवार से रविवार दोपहर तक बंद कर दी जाएंगी.

पंजाब पुलिस

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योजना के मुताबिक़ अमृतपाल को लाने वाले रास्ते पर बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया जाना था. ये रास्ता आठ ज़िलों से होकर जाता था- अमृतसर, तरन तारन, फिरोज़पुर, फरीदकोट, मोगा, मुक़्तसर, जालंधर और बठिंडा.

सूत्रों के मुताबिक़ इससे ये आभास दिया जाना था कि ये सामान्य सुरक्षा ड्रिल है क्योंकि अमृतपाल को यहां से जाना है.

अमृतपाल सिंह को जालंधर-मोगा सड़क पर मेहातपुर में गिरफ़्तार किया जाना था. दो अलग-अलग कारों में सवार उनके सहयोगियों को गिरफ़्तार कर लिया गया लेकिन, अमृतपाल सिंह तीसरी गाड़ी मर्सडीज़ में बैठे थे और वो भागने में कामयाब हो गए.

सूत्रों का कहना है, "अमृतसर, जालंधर, मोगा और फिरोज़पुर से निकलने के सभी इलाक़े बंद कर दिए गए हैं. हर तरफ़ कड़ी सुरक्षा व्यवस्था है. अमृतपाल का गांव जुल्लुपुर खेड़ा छावनी में तब्दील हो गया है. इसके अलावा, अर्धसैनिक बल और आरएएफ़ को भेजा गया है. अमृतपाल के लिए अपने गांव में घुसना असंभव है."

"लोगों को इकट्ठा होने से रोकने के लिए ज़िलों में धारा 144 लागू कर दी गई है. यहां बहुत बड़ा बंदोबस्त किया है. भागना बहुत मुश्किल है."

सूत्रों का कहना है, "ये पूरा अभियान गुप्त रखा गया था. कड़ी पुलिस व्यवस्था को सामान्य रूप से दिखाया गया क्योंकि अमृतपाल को रामपुरा फुल में शनिवार को और मुक़्तसर में रविवार को कार्यक्रम करना था."

केंद्रीय क़ानून मंत्री किरण रिजिजू

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क़ानून मंत्री और सीजेआई फिर आमने-सामने

अंग्रेज़ी अख़बार टाइम्स ऑफ़ इंडिया में केंद्रीय क़ानून मंत्री किरण रिजिजू और मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ के बयानों को लेकर ख़बर दी गई है जिसमें आपसी तनाव नज़र आ रहा है.

मंत्री किरण रिजिजू ने इंडिया टुडे कॉन्क्लेव में शनिवार को कहा कि सेवानिवृत्त न्यायाधीशों का एक छोटा समूह एक्टिविस्ट की तरह काम कर रहा है और विपक्षी पार्टी की भूमिका निभा रहा है. हालांकि, उन्होंने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि सरकार के सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों और हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों से बहुत अच्छे संबंध हैं.

उन्होंने कहा, "कुछ सेवानिवृत्त न्यायाधीश, शायद तीन या चार एक्टिविस्ट भारत विरोधी गैंग का हिस्सा हैं. कुछ लोग कोर्ट जाते हैं और कहतें हैं कि कृप्या सरकार पर लगाम लगाएं.'"

उन्होंने एडवोकेट सौरभ कृपाल को लेकर खुफ़िया एजेंसियों की रिपोर्ट को सार्वजनिक करने को लेकर सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम पर भी सवाल उठाया. उन्होंने कहा, "मेरे पास सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के न्यायाधीशों से जुड़ीं कई शिकायतें आती हैं. क्या मुझे भी वो सार्वजनिक कर देनी चाहिए?"

इसी कार्यक्रम में बोलते हुए सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि न्यायाधीशों के ख़ुद न्यायाधीशों को चुनने वाले कॉलेजियम सिस्टम को इसलिए बनाया गया था ताकि न्यायापालिका की स्वतंत्रता बनी रही. अगर न्यायपालिका को वास्तव में स्वतंत्र होना है तो उसे बाहरी प्रभावों से बचाना होगा. हालांकि, न्यायाधीशों को चुनने की प्रक्रिया और पारदर्शी बनाई जा रही है.

सीजेआई ने सरकार से किसी तरह का दबाव होने की बात से इनकार किया. उन्होंने कहा कि अगर ऐसा होता तो "क्या सुप्रीम कोर्ट मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की चयन प्रक्रिया को लेकर फ़ैसला सुनाता."

उन्होंने बताया कि हर उम्मीदवार पर न्याय विभाग की आईबी की रिपोर्ट के साथ आईं टिप्पणियों के बाद ही कॉलेजियम उम्मीदवारों के नामों पर विचार करता है.

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महिलाओं और पुरुषों के वेतन में अंतर

टाइम्स ऑफ़ इंडिया में ही महिला और पुरुष के वेतन में होने वाले अंतर को लेकर भारतीय सांख्यिकी सेवा की एक रिपोर्ट दी गई है.

'वुमेन और मेन इन इंडिया 2022' नाम की इस रिपोर्ट के मुताबिक़ ग्रामीण और शहरी दोनों इलाक़ों में महिलाओं को समान काम के लिए पुरुषों के बराबर वेतन नहीं मिलता है.

ग्रामीण इलाक़ों में पिछले एक दशक में वेतन का ये अंतर बढ़ा है और शहरी इलाक़ों में ये अंतर कम हुआ है.

ये सर्वे अप्रैल-जून 2022 के बीच किया गया था और इस दौरान सभी राज्यों के ग्रामीण इलाक़ों में महिला मज़दूरी दर 93.7 प्रतिशत पुरुष मजदूरी दर के आधे से ज़्यादा थी और शहरों में 100.8 प्रतिशत पुरुष मज़दूरी दर के आधे से कम थी.

ओडिशा में महिलाओं को पुरुषों के मुक़ाबले 70 प्रतिशत से कम वेतन मिल रहा है. हरियाणा, राजस्थान और हिमाचल प्रदेश में लैंगिक भेदभाव सबसे ज़्यादा है.

वहीं, उत्तराखंड में स्थिति अलग है और महिलाओं का वेतन पुरुषों के मुक़ाबले 101 प्रतिशत है.

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