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मनीष सिसोदिया की गिरफ़्तारी अरविंद केजरीवाल को कितना परेशान करेगी? - प्रेस रिव्यू
केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआई ने बीते रविवार दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया से आठ घंटे तक पूछताछ करने के बाद उन्हें गिरफ़्तार कर लिया. सीबीआई ने सिसोदिया को दिल्ली की शराब नीति में कथित घोटाले के आरोपों की जांच करते हुए गिरफ़्तार किया है.
देश के तमाम अख़बारों ने अपने पहले पन्ने पर इस ख़बर को जगह दी है और इसके अलग-अलग पहलुओं पर विस्तार से ख़बरें प्रकाशित की गई हैं.
लेकिन इस पूरे मामले में एक बड़ा सवाल ये है कि सीबीआई की इस कार्रवाई से आम आदमी पार्टी सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल, उनकी पार्टी और पार्टी की सियासत पर क्या असर पड़ेगा.
अंग्रेजी अख़बार इंडियन एक्सप्रेस ने इन सवालों का जवाब देते हुए एक ख़बर प्रकाशित की है जिसके मुताबिक़ मनीष सिसोदिया की ग़ैर-मौजूदगी अरविंद केजरीवाल के लिए दिक़्क़तें पैदा कर सकती है.
सिसोदिया- केजरीवाल की परछाईं
मनीष सिसोदिया एक ऐसे शख़्स हैं जिन्हें अरविंद केजरीवाल की परछाईं की तरह देखा जाता है.
दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार बनाने से पहले अन्ना आंदोलन और परिवर्तन एनजीओ के ज़माने से दोनों साथ काम करते आ रहे हैं.
दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार बनने के साथ ही उन्हें अहम ज़िम्मेदारियां दी गयीं और ये सिलसिला अब भी जारी है.
सत्येंद्र जैन की गिरफ़्तारी के बाद से सिसोदिया दिल्ली सरकार के 33 में से 18 विभागों की ज़िम्मेदारी संभाल रहे थे.
इनमें शिक्षा से लेकर स्वास्थ्य और लोक कल्याण से लेकर गृह जैसे अहम मंत्रालय शामिल हैं.
सिसोदिया ने रविवार को कहा कि वह कई महीनों तक जेल में रखे जा सकते हैं.
अख़बार के मुताबिक़, अगर ऐसा होता है तो पार्टी के सामने एक बड़ी चुनौती सिसोदिया को दिए गए काम के बंटवारे की होगी.
क्योंकि सिसोदिया को एक ऐसे समय पर गिरफ़्तार किया गया है जब अरविंद केजरीवाल आम आदमी पार्टी को राष्ट्रीय स्तर पर ले जाने की कोशिश कर रहे हैं.
वह आने वाले दिनों में कर्नाटक, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान का दौरा करने जा रहे हैं. इन राज्यों में आने वाले महीनों में चुनाव होने हैं.
केजरीवाल की चुनौती
लेकिन अब केजरीवाल के लिए सरकार का काम चलाना एक समस्या बन सकती है.
अख़बार से बात करते हुए आम आदमी पार्टी के एक नेता ने कहा कि 'सिसोदिया की गिरफ़्तारी से न सिर्फ़ दिल्ली सरकार की प्रशासनिक क्षमता प्रभावित होगी बल्कि इससे पार्टी के मनोबल पर भी असर पड़ेगा. जैन पिछले आठ महीनों से जेल में बंद हैं. उनकी ग़ैर-मौजूदगी में काम भले न रुका हो, लेकिन उनकी अनुपस्थिति महसूस की गयी है.'
नियमों के मुताबिक़, दिल्ली सरकार में एक वक़्त में अधिकतम सात मंत्री रह सकते हैं जिनमें मुख्यमंत्री पद भी शामिल है.
इस समय दिल्ली सरकार के दो शीर्ष मंत्री सत्येंद्र जैन और मनीष सिसोदिया जेल में हैं.
ऐसे में सरकार चलाने का दारोमदार अरविंद केजरीवाल, कैलाश गहलोत, राज कुमार आनंद और इमरान हुसैन पर है.
पार्टी सूत्रों के मुताबिक़, इस समय नए लोगों को मंत्री बनाए जाने की संभावनाएं काफ़ी कम हैं.
अख़बार से बात करते हुए एक पार्टी सूत्र ने कहा, 'ऐसा करने पर एक ग़लत संदेश जाएगा. हम दोनों को अकेला नहीं छोड़ रहे हैं. उनके ख़िलाफ़ शुरू किए गए क़ानूनी मुक़दमे राजनीति से प्रेरित हैं. और हम उन्हें इनकी सज़ा देते हुए भी नहीं दिखना चाहते हैं. ऐसे में मंत्रिमंडल में शेष लोग सरकार चलाएंगे. दूसरे शीर्ष नेताओं जैसे सौरभ भारद्वाज, आतिशी और दुर्गेश पाठक से अपेक्षा है कि वे मंत्रियों के काम में उनकी सहायता करें."
बंजारा समुदाय को साथ लाने की कोशिश करती बीजेपी?
केंद्र सरकार ने बंजारा समुदाय के आध्यात्मिक और धार्मिक नेता संत सेवालाल महाराज की 284वीं जयंती के मौके पर साल भर चलने वाले समारोहों की शुरुआत की है.
अंग्रेजी अख़बार द हिंदू में प्रकाशित ख़बर के मुताबिक़, दिल्ली में पिछले तीन सालों से संत सेवालाल महाराज की जयंती पर कार्यक्रमों का आयोजन हो रहा है.
इन कार्यक्रमों का आयोजन संत सेवालाल महाराज दानार्थ ट्रस्ट करता आया है जिसके मुखिया बीजेपी नेता और सांसद उमेश जादव हैं जो खुद भी बंजारा समुदाय से आते हैं.
केंद्र सरकार ने बंजारा समुदाय के लोगों की मौजूदगी सुनिश्चित करने के लिए एक विशेष ट्रेन भी चलाई है जो कि कर्नाटक, मध्य प्रदेश, तेलंगाना और महाराष्ट्र से लगभग 2500 लोगों को लेकर दिल्ली आएगी.
केंद्र सरकार ने एक बयान में कहा है, "संत सेवालाल महाराज हर बंजारा परिवार में श्रद्धा के प्रतीक हैं. और सभी राज्यों में फ़रवरी के महीने में उनकी जयंती को धूमधाम से मनाया जाता है. संत सेवालाल जी का समाधि स्थल महाराष्ट्र के वाशिम ज़िले की मनोरा तहसील के पोहरादेवी में है जिसे बंजारा काशी भी कहा जाता है."
सोमवार यानी आज आयोजित होने जा रहे इस कार्यक्रम में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय मंत्री मीनाक्षी लेखी भी शामिल होंगी.
केंद्र सरकार की इस पहल से कुछ हफ़्ते पहले ही आरएसएस से जुड़े संगठन ने महाराष्ट्र के जलगांव ज़िले में स्थित गोदरी गांव में छह दिनों तक चले बंजारा कुंभ का आयोजन किया था.
बंजारा समुदाय के एक तबके में आरएसएस की ओर से किए जा रहे इन प्रयासों को बंजारा समुदाय का हिंदूकरण करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है.
भारतीय बंजारा समाज कर्मचारी सेवा संस्थान से जुड़े मोहन सिंह चव्हाण ने कहा है कि उनके रीति-रिवाजों में 'कुंभ' जैसा कुछ भी नहीं है.
इस समुदाय के इतिहास का अध्ययन करने वाले शिक्षाविदों ने भी ज़ोर देकर कहा है कि गोदरी गांव का बंजारों के इतिहास से कोई संबंध नहीं है.
बंजारा समुदाय को भारत के कुछ राज्यों में अनुसूचित जनजातियों (एसटी) में शामिल किया गया है. इन राज्यों में आंध्र प्रदेश, बिहार, तेलंगाना, ओडिशा और झारखंड शामिल हैं.
इसके साथ ही हिमाचल प्रदेश और कर्नाटक में ये समुदाय अनुसूचित जाति में शामिल है और छत्तीसगढ़, दमन एवं दीव, हरियाणा, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में ये समुदाय ओबीसी में गिना जाता है.
शिंदे का दावा - फडणवीस को गिरफ़्तार करना चाहती थी ठाकरे सरकार
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने रविवार को दावा किया है कि वह ठाकरे सरकार की उस साज़िश के गवाह रहे हैं जिसके ज़रिए सरकार देवेंद्र फडणवीस और उनके सहयोगी गिरीश महाजन को गिरफ़्तार करना चाहती थी.
हिंदी अख़बार अमर उजाला में प्रकाशित ख़बर के मुताबिक़, शिंदे ने कहा कि उन्होंने इसे रोकने के लिए उस समय जो कहा था वह उसे दोहरा नहीं सकते. फ़ैसला न बदलने पर उन्होंने पूरी सरकार गिरा दी और उन्हें घर बैठा दिया.
उन्होंने दावा किया कि 'गिरफ़्तारी के ज़रिये बीजेपी को बैकफ़ुट पर लाने की रणनीति थी. साज़िश में शामिल लोगों के ख़िलाफ़ कोई कार्रवाई नहीं करने पर सीएम ने कहा कि उनके लिए तख़्तापलट ही काफ़ी है.'
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