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गौतम अदानी वक़्त से पहले 9000 करोड़ रुपये का लोन क्यों चुका रहे हैं?- प्रेस रिव्यू
भारतीय उद्योगपति गौतम अदानी लगातार ख़बरों में बने हुए हैं.
मंगलवार की सुबह अखबारों के पहले पन्ने पर भी गौतम अदानी की सुर्खियां बनी हुई हैं.
बिजनेस स्टैंडर्ड की ख़बर के मुताबिक़, अदानी ग्रुप के प्रमोटर्स तय वक़्त से पहले लोन चुका रहे हैं. इस लोन को चुकाने की तारीख़ सितंबर 2024 थी.
मगर अदानी समूह ने फ़ैसला किया है कि वो इसका भुगतान पहले ही करेगा. कंपनी के मुताबिक़, अदानी पोर्ट्स, अदानी ट्रांसमिशन और अदानी ग्रीन एनर्जी के गिरवी शेयर अब रिलीज़ किए जाएंगे.
इसी के तहत अदानी पोर्ट्स के 168 मिलियन, अदानी ग्रीन एनर्जी के 27 मिलियन और अदानी ट्रांसमिशन के लगभग 11 मिलियन गिरवी शेयर छुड़ाए जाएंगे.
ये लोन 1.11 बिलियन डॉलर यानी लगभग नौ हज़ार करोड़ रुपये का है. अदानी समूह का ये फ़ैसला ऐसे वक़्त में हुआ है, जब कंपनी पर विश्वसनीयता का संकट बना हुआ है.
माना जा रहा है कि गौतम अदानी ने ये फ़ैसला निवेशकों और बाज़ार के बीच अपना भरोसा बनाए रखने के लिए किया है ताकि ये संदेश जाए कि कंपनी के पास वित्तीय संसाधनों की कमी नहीं है.
24 जनवरी 2023 को हिंडनबर्ग रिसर्च की रिपोर्ट आने के बाद से अदानी समूह आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहा है. यही नहीं, यूरोपीय फ़ाइनेंशियल कंपनी क्रेडिट सुइस ने भी अदानी के बॉन्ड्स की वैल्यू शून्य कर दी थी और अपने ग्राहकों को इन बॉन्ड्स के बदले लोन देने से इनकार कर दिया था.
रिपोर्ट के आने से पहले गौतम अदानी एक वक़्त में दुनिया के तीसरे सबसे रईस कारोबारी थे.
मगर रिपोर्ट आने के बाद गौतम अदानी दुनिया के टॉप 20 रईसों की लिस्ट से भी बाहर हो गए. नतीजतन गौतम अदानी के नीचे खिसकने से मुकेश अंबानी एक बार फिर एशिया के सबसे रईस आदमी बन गए हैं.
हिंडनबर्ग एक अमेरिकी फाइनेंशियल रिसर्च कंपनी है. इस कंपनी ने अपनी रिपोर्ट में अदानी समूह पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए थे. साथ ही हिंडनबर्ग ने अदानी समूह से 88 सवाल भी पूछे थे.
इस रिपोर्ट का असर यूं भी समझिए कि पिछले हफ़्ते की शुरुआत में अदानी समूह की कंपनियों का कुल मूल्य 220 अरब डॉलर था, लेकिन हिंडनबर्ग की रिपोर्ट आने के बाद से ये लगभग आधा हो गया है.
अदानी समूह ने हिंडनबर्ग रिसर्च के इन आरोपों को ख़ारिज किया था.
अदानी पर लगे आरोपों को लेकर विपक्ष भी केंद्र सरकार को घेर रहा है और जांच की मांग कर रहा है.
हज जाने वालों के लिए मोदी सरकार के नए नियम
केंद्र सरकार के अल्पसंख्यक मंत्रालय ने सोमवार को हज यात्रा से जुड़ी नई पॉलिसी का एलान किया है.
इंडियन एक्सप्रेस की ख़बर के मुताबिक़, अब हज जाने के लिए भरा जाने वाले फॉर्म निशुल्क उपलब्ध होगा और नई पॉलिसी में हर यात्री के पैकेज में क़रीब 50 हज़ार रुपये की कमी आएगी.
एक हज यात्री आमतौर पर तीन से साढ़े तीन लाख रुपये का भुगतान करता है.
ये रकम यात्री किस राज्य से है, इस पर भी निर्भर करती है. नई हज पॉलिसी के आने से पहले फॉर्म 300 रुपये का होता था. हालांकि फॉर्म भरना इस बात की गारंटी नहीं है कि हज यात्रा यात्रा के लिए आपका चुनाव हो ही जाएगा.
अब ये फॉर्म निशुल्क उपलब्ध होंगे और फॉर्म के पैसे उन्हीं लोगों से लिए जाएंगे, जिन्हें हज यात्रा में भेजने के लिए चुना जाएगा.
हज कमेटी ऑफ इंडिया के सीईओ याकून शेख ने कहा, ''हज यात्रा के खर्चे में 50 हज़ार रुपये की कटौती मुख्य तौर पर करेंसी को लेकर बदले नियमों की वजह से संभव हो पाई है. पहले हज यात्रा पर जाने से पहले यात्रियों को 2100 रियाल के बराबर रकम यानी लगभग 44 हज़ार रुपये जमा करने होते थे. ये रकम हज कमेटी के पास जमा की जाती थी. अब ये तरीका बदल दिया गया है. अब यात्रियों को जो भी रकम ज़रूरी लगे, वो रकम यात्री ख़ुद साथ लेकर जाया करें.''
यह भी पढ़ें- हज क्या है? इससे जुड़ी बड़ी बातें जानिए
बांग्लादेश के गृह मंत्री मंदिर तोड़े जाने पर क्या बोले?
बांग्लादेश से एक बार फिर हिंदू मंदिरों को निशाने बनाने की ख़बरें आ रही हैं.
ये मंदिर बांग्लादेश के ठाकुरगांव ज़िले के बालियाडंगी में थे. इन 12 मंदिरों में लगी 14 मूर्तियों को रात के अंधेरे में तोड़ा गया है. पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है. अब इस घटना पर बांग्लादेश के गृहमंत्री की प्रतिक्रिया आई है.
इंडिया टुडे की ख़बर के मुताबिक़, बांग्लादेश के गृह मंत्री असदुज़्ज़मां ख़ान ने इंटरव्यू में कहा- हिंदू हमारे देश में थे और आगे भी रहेंगे.
असदुज़्ज़मां ख़ान बोले, ''मंदिरों पर हमला करने वालों की जल्द पहचान की जाएगी और उनके ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया जाएगा. हिंदू समुदाय की सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी. बांग्लादेश की बड़ी आबादी ने कभी आतंकवाद का समर्थन नहीं किया. ये हमारी सरकार को बदनाम करने की साजिश है.''
बांग्लादेश के गृह मंत्री कहते हैं, ''आतंकवादी इस्लाम के नाम पर जो कर रहे हैं, वो पूरी तरह से गलत है. इस्लाम आतंकवाद का समर्थन नहीं करता है. इस्लाम आधारित हमारी पार्टियां और आम लोग ऐसे लोगों से नफ़रत करते हैं. ये आतंकवादी कई बार विदेश भाग जाते हैं. पहाड़ों में ट्रेनिंग लेते हैं और लौटकर आतंक फैलाते हैं. हमारी सरकार ऐसे लोगों के ख़िलाफ़ लड़ने में सफ़ल रही है और आतंकवाद अब नियंत्रण में है. लोगों की जान लेने की इस्लाम में कोई जगह नहीं है.''
बांग्लादेश में इससे पहले भी कई बार हिंदुओं और हिंदू धार्मिक स्थलों पर हमले होते रहे हैं.
असदुज़्ज़मां ख़ान ने कहा, ''सभी धर्मों के लोगों के सामान अधिकार हैं. कुछ संगठन धार्मिक भाईचारे को ख़त्म करने की कोशिश कर रहे हैं. हम इसे सहन नहीं करेंगे. हिंदू मंदिरों पर हमला करने वालों को जल्द पकड़ा जाएगा.''
पाकिस्तान में विकिपीडिया से बैन हटा
पाकिस्तान में ईशनिंदा से संबंधित कंटेंट ना हटाने को लेकर विकिपीडिया पर लगा बैन अब हट गया है.
द हिंदू में छपी ख़बर के मुताबिक़, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने छह फरवरी को जारी आदेश में विकिपीडिया को अनब्लॉक करने के लिए कहा है.
दो दिन पहले ही विकिपीडिया को ब्लॉक किया गया था. ये ब्लॉक करने का फ़ैसला उस चेतावनी के बाद आया था, जिसमें गुरुवार को पाकिस्तान टेलिकम्युनिकेशन अथॉरिटी की ओर से कहा गया था कि 48 घंटों के अंदर अगर ईशनिंदा से जुड़ा कंटेंट नहीं हटाया गया तो विकिपीडिया को प्रतिबंध झेलना पड़ सकता है.
विकिपीडिया ने जब ये कंटेंट नहीं हटाया तो इस पर दो दिन पहले प्रतिबंध लगाया गया था.
पाकिस्तान में ईशनिंदा एक संवेदनशील मुद्दा है और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाले कंटेंट के चलते यू-ट्यूब और फ़ेसबुक को मुल्क में कभी प्रतिबंध का सामना करना पड़ा था.
ऐसे में जब विकिपीडिया पर बैन लगाने का पीटीए ने फ़ैसला किया तो पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने कमेटी बनाकर जांच करने का आदेश दिया.
इस कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर ही विकिपीडिया से बैन हट सका है.
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