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मुकर्रम जाह: कभी 'दुनिया के सबसे बड़े ख़ज़ाने' के मालिक जो दो बेड रूम के अपार्टमेंट में रहे
हैदराबाद की निज़ामशाही के आठवें निज़ाम नवाब मीर बरकत अलीख़ान वालाशन मुकर्रम जाह बहादुर का 14 जनवरी को इंस्ताबुल में इंतकाल हो गया.
मुकर्रम जाह 89 वर्ष के थे. बुधवार की शाम पूरे राजकीय सम्मान के साथ उन्हें ऐतिहासिक मक्का मस्जिद के ख़ानदारी क़ब्रिस्तान में दफ़्न किया जाएगा.
उनके दफ़्तर से जारी एक बयान में कहा गया था, ''बड़े दुख के साथ हम ये सूचित कर रहे हैं कि हैदराबाद के आठवें निज़ाम महामहिम नवाब मीर बरकत अली ख़ान वालाशान मुकर्रम जाह बहादुर का तुर्की के इंस्ताबुल में इंतकाल हो गया है. ''
इस बयान में कहा गया, ''उनकी आख़िरी इच्छा के मुताबिक़, उन्हें उनके जन्मस्थल हैदराबाद में दफ़नाया जाएगा. उनका परिवार उनका शव लेकर मंगलवार को हैदराबाद आएगा.''
''हैदराबाद पहुंचने पर उनका शव चौमहल्ला पैलेस ले जाया जाएगा. वहीं शव को दफ़नाए जाने से पहले सारी प्रक्रियाएं पूरी की जाएंगी.
इसके बाद शव को आसफ़ जाही मकबरे में ले जाया जाएगा, जहां उनके पुरखों को दफ़नाया गया है. आगे के कार्यक्रम के बारे में बाद में सूचना दी जाएगी.''
कौन थे मुकर्रम जाह?
मुकर्रम जाह हैदराबाद पर शासन करने वाले आख़िरी निज़ाम मीर उस्मान अली ख़ान बहादुर के पोते थे.
मीर उस्मान अली ख़ान ने 1948 तक हैदराबाद पर शासन किया था. वो सातवें निज़ाम थे. मुकर्रम जाह, आज़म जाह और राजकुमारी दुर्रु शहवर के बेटे थे. उनका जन्म 1933 में हुआ था. आज़म जाह मीर उस्मान अली ख़ान के सबसे बड़े बेटे थे.
द हिंदू की एक रिपोर्ट के मुताबिक़, उस्मान अली ख़ान ने अपने बेटों को दरकिनार कर अपने पोते मुकर्रम जाह को अपना उत्तराधिकारी घोषित किया था.
इस रिपोर्ट के मुताबिक़ अप्रैल 1967 में एक ताजपोशी समारोह के बाद मुकर्रम जाह औपचारिक रूप से आठवें निज़ाम बने थे. ये ताजपोशी समारोह चौमहल्ला पैलेस में हुआ था.
इसके बाद वो भारत से ऑस्ट्रेलिया चले गए. वहां कुछ वक़्त तक रहने के बाद उन्होंने तुर्की को ही अपना ठिकाना बना लिया. बाद में वो वहां स्थायी रूप से बस गए.
मुकर्रम, निज़ाम चैरिटिबल ट्रस्ट और शिक्षा के क्षेत्र में काम करने वाले मुकर्रम जाह ट्रस्ट फ़ॉर एजुकेशन एंड लर्निंग के अध्यक्ष थे.
अकूत संपत्ति ख़त्म हो गई
हैदराबाद से निकलने वाले दैनिक अख़बार 'सियासत' के मुताबिक़, सातवें निज़ाम के उत्तराधिकारी के तौर पर मुकर्रम जाह दुनिया के 'सबसे बड़े ख़ज़ाने' के मालिक बने.
लेकिन विलासी जीवनशैली, संपत्तियों और शाही महलों के रख-रखाव में लापरवाही और बेहिसाब महंगी जूलरी पर दिल खोल कर ख़र्च करने की आदत की वजह से उनकी सारी संपत्ति ख़त्म हो गई.
मुकर्रम जाह को विरासत में 25 हजार करोड़ रुपये की संपत्ति मिली थी. उस वक़्त उनकी उम्र सिर्फ़ 30 साल थी. लेकिन अपनी विलासी जीवनशैली पर सारे पैसे खर्च कर देने की वजह से अपनी ज़िंदगी के आख़िरी दिनों में उन्हें दो बेडरूम वाले अपार्टमेंट में रहना पड़ा.
बहरहाल, मुकर्रम जाह की मौत के साथ ही एक विरासत का अंत हो गया है.
हैदराबाद में निज़ाम शाही की शुरुआत निज़ाम उल-मुल्क के साथ 1724 में हुई थी. निज़ाम परिवार ने हैदराबाद पर 1724 से लेकर 1948 तक शासन किया.
तेलंगाना के मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव ने मुकर्रम जाह के निधन पर शोक व्यक्त किया है.
तेलंगाना सीएमओ ने ट्वीट कर कहा है, ''आठवें निज़ाम गरीबों के लिए काम करते रहे थे. शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में उनके काम के सम्मान में उनका पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जाएगा. ''
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मुकर्रम जाह के दादा सातवें निज़ाम कौन थे?
ब्रिटिश सरकार के बेहद वफ़ादार रहे आसफ़ जाह मुज़फ़्फ़रुल मुल्क सर उस्मान अली ख़ान 1911 में हैदराबाद रियासत के शासक बने.
22 फ़रवरी 1937 के टाइम मैगज़ीन में मीर उस्मान अली पर कवर स्टोरी छापी गई थी. उन्हें 'दुनिया का सबसे अमीर शख़्स' बताया गया था.
सातवें निज़ाम के पास 282 कैरेट का जैकब डायमंड था. यह दुनिया के सबसे बड़े हीरों में से एक है. जिन लोगों ने इसे देखा था उनके मुताबिक़, ये हीरा एक छोटे नींबू के आकार का था.
लोगों से इसे बचाने के लिए वो इसे साबुन के एक बक्से में छिपा कर रखते थे. कभी-कभार वो इसे पेपरवेट की तरह भी इस्तेमाल करते थे.
हैदराबाद उन तीन रियासतों मे शामिल था जिसने आज़ादी के बाद भारत के साथ विलय से इनकार कर दिया था. हालांकि भारत सरकार ने 1948 में पुलिस कार्रवाई के बाद इसे अपने साथ मिला लिया था.
हैदराबाद की सेना के आत्मसमर्पण के बाद भारत सरकार ने निज़ाम के समर्थक कासिम रिज़वी और लईक अहमद को हिरासत में ले लिया था. लईक अहमद हिरासत से भाग कर बॉम्बे (अब मुंबई) एयरपोर्ट पहुंच गए. वहां से वो विमान से पाकिस्तान चले गए.
भारत सरकार ने सातवें निज़ाम और उनके परिवार को कोई नुक़सान नहीं पहुंचाया. सातवें निज़ाम उस्मान अली ख़ान और उनके परिवार को उनके अपने महल में ही रहने दिया गया.
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हैदराबाद का भारत में विलय
हैदराबाद भारत में शामिल होने वाली 562वीं रियासत थी. भारत सरकार और सातवें निज़ाम के बीच 25 जनवरी 1950 को एक समझौता हुआ. इसके मुताबिक़ भारत सरकार को उन्होंने सालाना 42,85,714 रुपये का प्रिवी पर्स देने का फ़ैसला किया था.
सातवें निज़ाम नवंबर 1956 तक हैदराबाद के राज प्रमुख यानी गवर्नर रहे थे. भारत सरकार की ओर से राज्यों से किए गए पुनर्गठन के मुताबिक़, पुराने निज़ाम राज्य को तीन हिस्सों में बांट कर तीन नए राज्य बनाए गए. ये राज्य थे- आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और महाराष्ट्र.
24 फ़रवरी 1967 को सातवें निज़ाम का निधन हो गया था.
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