BBC Hindi: बीते हफ़्ते की वो ख़बरें, जो शायद आप मिस कर गए

नृसिंह मंदिर, जोशीमठ

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नमस्ते. उम्मीद है कि आप अच्छे होंगे, खुश होंगे और सकारात्मक ऊर्जा के साथ आगे बढ़ रहे होंगे.

हम जानते हैं कि रोज़मर्रा की आपा-धापी के बीच आपके लिए देश-दुनिया की हर ख़बर पर नज़र रखना मुश्किल रहता होगा.

ऐसे में हम लाए हैं बीते सप्ताह की कुछ दिलचस्प और अहम ख़बरें, जिन पर शायद आपकी नज़र ना गई हो.

ये पाँच ख़बरें आपने पढ़ लीं तो ये समझिए कि आप पूरी तरह से अपडेटेड हो गए.

जोशीमठ के चमकने से दरकने तक की पूरी कहानी

गढ़वाल हिमालय का गजेटियर लिखने वाले अंग्रेज़ आईसीएस अफ़सर एचजी वॉल्टन ने 1910 के जिस जोशीमठ का ज़िक्र किया है, वह थोड़े से मकानों, रैनबसेरों, मंदिरों और चौरस पत्थरों से बनाए गए नगर चौक वाला एक अधसोया-सा कस्बा है, जिसकी गलियों को व्यापार के मौसम में तिब्बत से व्यापार करने वाले व्यापारियों के याक और घोड़ों की घंटियाँ कभी-कभी गुंजाती होंगी.

पुराने दिनों में इन व्यापारियों की आमोदरफ़्त के चलते जोशीमठ एक संपन्न बाज़ार रहा होगा.

अलबत्ता वॉल्टन के समय तक ये व्यापारी अपनी मंडियों को दक्षिण की तरफ यानी नंदप्रयाग और उससे भी आगे तक शिफ्ट कर चुके थे.

वॉल्टन तिब्बत की ज्ञानिमा मंडी में, पीढ़ी-दर-पीढ़ी हर साल तिजारत के लिए जाने वाले उन भोटिया व्यापारियों की मंडियों के उन अवशेषों का भी ज़िक्र करते हैं, जो उन्होंने जोशीमठ में देखे थे.

वैज्ञानिक और विशेषज्ञ बताते हैं कि जिस ढाल पर यह ऐतिहासिक नगर बसा हुआ है वह एक बेहद प्राचीन भूस्खलन के परिणामस्वरूप इकठ्ठा हुए मलबे के ढेर से बना है.

मुजफ़्फ़र अली

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मुज़फ़्फ़र अली: आशा भोंसले के 'मिस्टर हैंडसम', ख़य्याम के 'राजा साहब' की आत्मकथा में किन बातों का 'ज़िक्र'

साठ के दशक में एक दिन अलीगढ़ के रेलवे स्टेशन पर तीसरे दर्जे के अनारक्षित (अनरिज़र्व्ड) डिब्बे से एक नौजवान उतरा. उनका नाम था मुज़फ़्फ़र अली.

उनके साथ काले रंग का एक ट्रंक था जिसपर सफ़ेद अक्षरों में लिखा हुआ था 'एम ए ज़ैदी'.

चलते वक़्त पिता ने उनसे मज़ाक किया था अगर कहीं दंगे वगैरह हो जाएं तो तुम्हारा नाम है 'मॉरिस अल्बर्ट ज़ैदी'.

तीसरे दर्जे में सफ़र करने की वजह थे संविधान सभा के सदस्य हसरत मोहानी, जो हमेशा महात्मा गांधी की तरह तीसरे दर्जे में सफ़र करते थे.

एक बार उनसे पूछा भी गया कि आप तीसरे दर्जे में क्यों सफ़र करते हैं तो उनका जवाब था, क्योंकि भारतीय रेल में कोई चौथा दर्जा नहीं है.

वे संसद भवन भी तांगा शेयर करके जाते थे. शुक्र है, मुज़फ़्फ़र अली के पिता राजा साजिद हुसैन ने उनसे रिक्शा शेयर कर विश्वविद्यालय जाने के लिए नहीं कहा.

मुज़फ़्फ़र अली बताते हैं कि अलीगढ़ में बिताए अगले कुछ साल उनकी ज़िंदगी के बेहतरीन साल थे. वो समय उनकी रचनात्मक यात्रा की रीढ़ की हड्डी था.

मुज़फ़्फ़र अली ने अपनी आत्मकथा ज़िक्र में इस ज़माने का बखूबी ज़िक्र किया है. आगे की कहानी यहां पढ़िए.

नरेंद्र मोदी और अर्दोआन

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सऊदी अरब, भारत और तुर्की के तेवर की क्यों हो रही चर्चा

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी साल 2019 में 25 और 26 अक्तूबर को अज़रबैजान के बाकू में आयोजित गुटनिरपेक्ष आंदोलन (नॉन एलाइनमेंट मूवमेंट यानी नाम) के 19वें समिट में शामिल नहीं हुए थे.

इससे पहले वह 2016 में भी वेनेज़ुएला में नाम के 18वें समिट में शामिल नहीं हुए थे.

गुटनिरपेक्ष आंदोलन के इन दोनों समिट में भारत की ओर से उपराष्ट्रपति गए थे.

2016 में वेनेज़ुएला समिट में भारत के तत्कालीन उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी और 2019 में बाकू समिट में तत्कालीन उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे थे.

गुटनिरपेक्ष आंदोलन के समिट में पीएम मोदी के शरीक नहीं होने को निर्णायक क़दम के रूप में देखा गया था क्योंकि भारत का संस्थापक सदस्य रहा था.

अपवाद स्वरूप 1979 में चौधरी चरण सिंह केयरटेकर प्रधानमंत्री थे और वे इसमें शरीक नहीं हो पाए थे.

नरेंद्र मोदी के समिट में नहीं जाने को भारत की विदेशी नीति में नेहरू युगीन विरासत को बदलने के तौर पर भी देखा गया.

लेकिन क्या ऐसा है कि नरेंद्री मोदी की विदेश नीति गुटनिरपेक्षता के सिद्धांत से अलग हो चुकी है? आगे की कहानी यहां पढ़िए.

सौम्या तिवारी

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सौम्या तिवारी: कपड़े धोने की मोगरी से महिला अंडर-19 टीम की उपकप्तानी तक का सफ़र

"घर में वो मोगरी (कपड़े धोने वाले बैट) से खेलती थी. फिर सौम्या और उसकी बड़ी बहन साक्षी घर के नीचे क्रिकेट खेलने लगीं और कुछ दिनों बाद मोहल्ले के मैदान में. बहन ही उसे अरेरा क्रिकेट क्लब लेकर गई और अब वो अंडर-19 टीम की उपकप्तान हैं."

स्कूटर संभालकर सौम्या के पिता मनीष तिवारी ने बड़े इत्मीनान से अपनी बिटिया के बारे में कई बातें कहीं.

अब जब मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से ऑलराउंडर सौम्या तिवारी सीधे भारतीय अंडर-19 क्रिकेट टीम में उपकप्तान चुन ली जाए तो पिता के चेहरे पर इत्मीनान और गर्व का होना स्वाभाविक है.

सौम्या भोपाल की पहली महिला क्रिकेटर हैं जिन्होंने टीम इंडिया की नीली जर्सी पहनी है. भोपाल की अरेरा अकादमी से इंडिया टीम तक का सफ़र उन्होंने महज़ छह साल में ही पूरा कर लिया. सौम्या के पिता मनीष तिवारी कलेक्टर दफ़्तर की निर्वाचन शाखा में सुपरवाइज़र हैं.

वो ख़ुद भी क्रिकेट खेलते थे, लेकिन 1986 में स्कूटर से ऐसा हादसा हुआ कि पैर की हड्डी के दो टुकड़े हो गए और पेशेवर क्रिकेट खेलने का सपना भी टूट गया. लेकिन मनीष तिवारी का यह सपना उनकी बेटी की आंखों में पलने लगा. आगे की कहानी यहां पढ़िए.

क्या मछली के बाद दूध पी सकते हैं

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क्या मछली खाने के बाद दूध पी सकते हैं? पढ़िए डॉक्टरों की राय

अक्सर डिनर टेबल पर खाने के फ्लेवर को लेकर बातें होती हैं, लेकिन कुछ धारणाएं ऐसी भी हैं, जिन्हें सच माना जाता है.

सर्दियों में आम तौर पर मछली खाने का चलन बढ़ जाता है. ऐसे में घरों के डाइनिंग टेबल पर वह बहस एक बार फिर से लौट आती है कि क्या मछली खाने के बाद दूध पीया जा सकता है? क्या ऐसा करने से विटिलिगो यानी त्वचा पर सफेद चकत्ते या मोतियाबिंद तो नहीं हो जाएगा?

विटिलिगो में त्वचा का कुछ हिस्सा अपना पिग्मेंट खोने लगता है, जिसके चलते वे हिस्से अलग से दिखाई देने लगते हैं.

एक तरफ ध्यान खास तौर पर भारत के एक ट्विटर यूजर ने खींचा है. उनका नाम है उज़ैर रिज़वी. उन्होंने ट्वीट कर लिखा कि उनकी मां अभी भी घबरा जाती हैं अगर वे मछली खाने के बाद दूध पी लें तो. आगे की कहानी यहां पढ़िए.

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