You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
प्रवासी भारतीय सम्मेलन: खाड़ी देशों से होंगे सबसे अधिक प्रतिनिधि
- Author, सलमान रावी
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
मध्य प्रदेश के इंदौर में आयोजित होने वाले 17वें प्रवासी भारतीय सम्मेलन में सबसे ज़्यादा खाड़ी देशों से भागेदारी हो रही है. राज्य सरकार के एक प्रवक्ता ने बीबीसी से बात करते हुए कहा कि सिर्फ़ यूएई से ही 715 प्रवासी भारतीयों ने सम्मेलन में शामिल होने के लिए विदेश मंत्रालय के समक्ष अपना पंजीकरण कराया है.
इसके अलावा क़तर से 275 प्रवासी आ रहे हैं जबकि ओमान से 233, कुवैत से 95 और बहरीन से 72 प्रतिनिधियों ने सम्मलेन में भागेदारी की स्वीकृति हासिल कर ली है. अमेरिका से भी 167 प्रतिनिधि शामिल होने आ रहे हैं. युएई के बाद मॉरिशस ऐसा देश है जहां से 447 प्रतिनिधि सम्मलेन में शामिल हो रहे हैं.
सरकार की तरफ़ से जानकारी देते हुए वरिष्ठ अधिकारी एपी सिंह का कहना था कि कुल 66 देशों से 2705 प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं. इस समारोह में विदेश मंत्रालय की साझेदारी है जबकि निवेशकों का सम्मलेन पूरी तरह से राज्य सरकार आयोजित कर रही है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नौ जनवरी को प्रवासी भारतीय सम्मेलन की औपचारिक शुरुआत करेंगे. सम्मेलन की शुरुआत आठ जनवरी से होगी.
साल 1915 में महात्मा गाँधी नौ जनवरी को दक्षिण अफ्रीका से भारत लौटे थे.
अगले दिन यानी 10 जनवरी को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू इसका समापन करेंगी. फिर अगले दो दिनों तक यानी 11 और 12 जनवरी को इंदौर में ही निवेशकों का सम्मलेन आयोजित किया जा रहा है, जिसे प्रधानमंत्री वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग के माध्यम से संबोधित करेंगे.
दक्षिण अमेरिकी देश सूरीनाम के राष्ट्रपति चन्द्रिका प्रसाद संतोखी प्रवासी भारतीय सम्मलेन के मुख्य अतिथि होंगे जबकि गुयाना के राष्ट्रपति मोहम्मद इरफ़ान अली इस आयोजन में बतौर विशिष्ठ अतिथि शामिल होंगे. ऑस्ट्रेलिया की सांसद ज़नेटा मैस्करेनहास ने भी सम्मेलन में शिरकत की पुष्टि कर दी है.
मध्य प्रदेश सरकार इस आयोजन को लेकर उत्साहित हैं क्योंकि सरकार का कहना है कि विदेश में रहने वाले मध्य प्रदेश के प्रवासियों से संपर्क रखने के लिए सरकार के विदेश विभाग ने 'फ्रेंड्स ऑफ़ मध्य प्रदेश चैप्टर्स' का गठन किया है. राज्य सरकार का दावा है कि सम्मलेन में सबसे ज़्यादा भागीदारी मध्य प्रदेश के प्रवासियों की ही है.
सबसे ज़्यादा प्रतिनिधि यूएई से
मध्य प्रदेश के इन प्रवासियों में भी सबसे ज़्यादा संख्या संयुक्त अरब अमीरात से आने वाले प्रवासियों की ही है. सम्मलेन में शामिल होने वाले प्रतिनिधियों में यूएई में रहने वाले मध्य प्रदेश के प्रवासियों की संख्या लगभग 300 है जबकि यहाँ के प्रवासियों में अमेरिका से 75, ब्रिटेन से 55, दक्षिण अफ्रीका से 10, सिंगापुर से 12, जापान से 11, नीदरलैंड्स से चार और स्विट्ज़रलैंड से चार प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं.
एलटी फूड्स लिमिटेड के विजय कुमार अरोरा, लंदन के उप महापौर और ब्रिटेन के 'फ्रेंड्स ऑफ़ मध्य प्रदेश' के समन्वयक राजेश अग्रवाल के अलावा न्यूयॉर्क स्थित 'फ्रेंड्स ऑफ़ एमपी' के अध्यक्ष जीतेन्द्र मुछाल सहित मध्य प्रदेश के छह ऐसे प्रवासी हैं जिनको प्रधानमंत्री के साथ नौ जनवरी को दोपहर के भोजन पर भी आमंत्रित भी किया गया है.
मध्य प्रदेश ने चिह्नित किए निवेश के क्षेत्र
मध्य प्रदेश सरकार का कहना है कि ये राज्य भारत के हृदय की तरह देश के बीचों बीच में स्थित है जहां से किसी भी राज्य तक अपना सामान पहुंचाना आसान है. राज्य सरकार का दावा है कि यहां से देश की 50 प्रतिशत आबादी तक पहुंचा जा सकता है.
दिल्ली-मुंबई का कॉरिडोर हो या फिर दिल्ली- नागपुर औद्योगिक कॉरिडोर या फिर ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर और दिल्ली-मुंबई 'ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे' ही क्यों न हो, मध्य प्रदेश से इन आधुनिक सड़क मार्गों से सामान पहुंचाने की काफ़ी सहूलियत है.
फिलहाल मध्य प्रदेश में मसालों के अलावा, कपास, लहसुन, दलहन, चना, सोयाबीन, गेहूं, मक्का और फूलों की पैदावार इसे देश के अग्रणी राज्यों में शुमार कराता है और इसी वजह से 'फ़ूड प्रोसेसिंग' के उद्योगों को विशेष प्रोत्साहन दिया जाता है. लेकिन राज्य सरकार ने ऐसे सेक्टर चिह्नित किए हैं जहां बड़े निवेश किए जा सकते हैं. जैसे कि फार्मा, ऑटोमोबाइल और टेक्सटाइल या कपड़ा उद्योग.
'ऑर्गेनिक कपास' में एमपी का बोलबाला
मध्य प्रदेश सरकार का कहना है कि भारत में पैदा होने वाले 'आर्गेनिक कपास' के कुल उत्पादन का 43 प्रतिशत इसी प्रदेश में होता है.
ये पूरे विश्व में 'आर्गेनिक कपास' के उत्पादन का 21 प्रतिशत है. राज्य में मौजूदा समय में 60 से ज़्यादा कपड़ा बनाने की इकाइयां हैं जबकि 4000 से ज़्यादा 'लूम्स' भी लगे हुए हैं. यही वजह है कि सरकार इस क्षेत्र में निवेश पर 200 प्रतिशत का 'इंसेंटिव' देने की घोषणा कर चुकी है. भारत सरकार की योजना के तहत इस क्षेत्र में 3513 करोड़ रुपयों का निवेश पहले ही हो चुका है जो भारत में किसी भी राज्य से ज़्यादा है.
मध्य प्रदेश के उद्योग जगत में भी इस सम्मलेन को लेकर उत्साह है. यहां पर काम कर रहे उद्योगपतियों का कहना है कि राज्य की क्षमता के हिसाब से अभी यहां बहुत कुछ करने की गुंजाइश है.
उद्योगपतियों का क्या है कहना?
जीडी लाधा मध्य प्रदेश के जाने माने उद्योगपति हैं. बीबीसी से बात करते हुए वे कहते हैं कि मध्य प्रदेश की सबसे अच्छी बात इसका भौगोलिक रूप से भारत के बीचों बीच होना है.
वे कहते हैं, "ये मध्य भारत है जहाँ से देश के सभी हिस्सों में पंहुचा जा सकता है. यहाँ से आसानी से माल भेजा जा सकता है. लेकिन सरकारों की लचर नीतियों ने राज्य की अनदेखी ही की है. मिसाल के तौर पर ग्वालियर संभाग में इस्पात कारखाने खुले. जिन्होंने कारखाने लगाए, सरकार से कई राहतें भी लीं. सब कुछ लेने के बाद वो कारखानों को बंद कर चले गए. इस पर निगरानी नहीं रखी गई."
"उसी तरह बुरहानपुर और खंडवा में 'स्पिनिंग मिल' यानी कपास से सूत बनाने वाली इकाइयां खुलीं. लेकिन वो भी बंद हो गईं. कपड़े के कारखाने भी खुले लेकिन उन्होंने अपने उपकरणों को अपडेट नहीं किया और वो कारखाने बंद हो गए."
राज्य के उद्योग जगत से जुड़े लोगों का मानना है कि सरकार में बैठे अधिकारी जो औद्योगिक नीति बनाते हैं, वो ज़मीनी हकीक़त से कटे हुए हैं. उनका मानना है कि कृषि और उद्योगों के लिए सरकार को साझा नीति बनाने की ज़रूरत है.
इंदौर के उद्योगपति गौतम कोठारी कहते हैं कि तीन क्षेत्रों में मध्य प्रदेश दूसरे राज्यों की तुलना में और भी बेहतर कर सकता है. जैसे खाद्य प्रसंस्करण उद्योग, खनिज आधारित उद्योग और सूचना तकनीक आधारित उद्योग.
वे कहते हैं, "देश के कुल 17 जलवायु क्षेत्रों में से 11 मध्य प्रदेश में हैं. यही कारण है कि यहाँ हर प्रकार की फ़सल की पैदावार होती है. सरकार उद्योग और कृषि की अलग अलग नीतियों के सहारे यहाँ निवेश ढूंढ नहीं सकती है. दोनों की साझा नीति बनाना बहुत ज़रूरी है. तभी निवेश भी होगा और उद्योग लगेंगे. कृषि को भी उद्योग से जोड़ना होगा. अभी सिर्फ़ इंदौर के आसपास ही उद्योग लग रहे हैं. सरकार दूसरे ज़िलों में भी निवेश के लिए भी सोचना होगा."
'ठोस नीति ज़रूरी'
ये बात सही है कि मध्य प्रदेश में ज़मीन और मज़दूरी सस्ती है इसलिए यहाँ निवेश के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ हैं. मगर उद्योग से जुड़े लोगों का मानना है कि इसके लिए एक ठोस नीति सरकार को बनानी होगी.
राजेंद्र कोठारी भोपाल स्थित 'एचइजी लिमिटेड' में 'वाइस प्रेसिडेंट' के पद से रिटायर हुए हैं. बीबीसी से बात करते हुए वे कहते हैं कि ये बात सही है कि निवेश के लिए मध्य प्रदेश बिल्कुल माक़ूल जगह है. लेकिन वो सरकार की उन नीतियों पर पुनर्विचार करने की बात करते हैं जिसकी वजह से लोगों को मुफ़्त में अनाज देने की योजना चलाई जा रही है.
उन्होंने कहा, "मुफ़्त में अनाज योजना लोगों को काहिल बना रही है. लोग काम नहीं करना चाहते हैं. इसलिए उद्योग अगर लगते भी हैं तो काम करने वालों को बाहर से ही लाना पड़ता है. अब स्वीडन का उदाहरण ही ले लीजिए. वहां पर बेरोज़गारी भत्ता 104 डालर प्रति माह है. लेकिन दैनिक मज़दूरी की दर 110 डालर प्रतिमाह है. बेरोज़गारी भत्ता एक समान रहता है जबकि हर वर्ष मज़दूरी में 10 अतिरिक्त डॉलर जोड़ दिए जाते हैं. इसलिए लोग काम करना बेहतर समझते हैं. कम ही लोग बेरोज़गारी भत्ते की तरफ़ आकर्षित होते हैं."
मध्य प्रदेश में निवेशकों को रिझाने के लिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने देश के प्रमुख महानगरों का दौरा भी किया.
सरकार को उम्मीद है कि इस सम्मलेन के बाद राज्य की तरफ़ निवेशकों का आकर्षण बढ़ेगा.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूबपर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)