झारखंड के कई गाँवों में पेंशन का 'आधार' हुआ गड़बड़, पाई-पाई को तरसते बुज़ुर्ग

डोरसोना जोंकी व उनकी पत्नी जिंगी कुई

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    • Author, मोहम्मद सरताज आलम
    • पदनाम, झारखंड से, बीबीसी हिंदी के लिए

"मैं बुढ़ापे में 14 साल का हूँ, आप हाई स्कूल में मेरा दाख़िला करवा दीजिए..."

ये शब्द 75 वर्षीय डोरसोना जोंको के हैं, जिनका जन्म आधार कार्ड के मुताबिक़ एक जनवरी, 2008 को हुआ है.

आधारकार्ड में उनकी ग़लत उम्र दर्ज होने की वजह से डोरसोना जोंको को कथित रूप से वृद्धावस्था पेंशन जैसी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है.

स्थानीय ज़िला प्रशासन ने उनके आधार कार्ड में त्रुटियाँ होने की बात स्वीकार की है.

लेकिन डोरसोना जोंको की तरह कई वरिष्ठ नागरिक इस वजह से वृद्धावस्था पेंशन जैसी सुविधाओं का लाभ मिलने में परेशानियों का सामना कर रहे हैं.

डोरसोना जोंको कहते हैं, "अगर मुझे और मेरी पत्नी को पेंशन से दो हज़ार मिलने लगें, तो हमारी बची ज़िंदगी सुकून से गुज़रेगी."

झारखंड के पश्चिम सिंहभूम ज़िले में 'खाद्य सुरक्षा जन अधिकार मंच' नाम की सामाजिक संस्था इस तरह के मामलों को प्रशासन के संज्ञान में ला रही है.

इस संस्था को अब तक ऐसे 216 मामले मिले हैं, जिनमें वरिष्ठ नागरिकों की उम्र 60 वर्ष से कम दर्ज है.

ग्रामीणों का मानना है कि अगर उनके आधार कार्ड में उम्र संशोधित हो जाए, तो उन्हें वृद्धावस्था पेंशन जैसी स्कीम का लाभ मिल सकता है.

सामाजिक कार्यकर्ता सुरेश जोंको कहते हैं, "अगर राज्य के आदिवासी बाहुल्य ज़िले की पंचायतों में डोर टू डोर वरिष्ठ नागरिकों का डेटा जुटाया जाए तो आधार कार्ड में कम उम्र अंकित होने की वजह से वृद्धावस्था पेंशन स्कीम का लाभ उठाने में समस्याओं का सामना करने वालों की संख्या कहीं ज़्यादा होगी."

वरिष्ठ नागरिक

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188 लोगों के लिए पेंशन पाना मुश्किल

आधार कार्ड में उम्र कम होने के कारण पेंशन की स्वीकृति नहीं मिलने के मामले में 'खाद्य सुरक्षा जन अधिकार मंच' संस्था ने बताया है कि चक्रधरपुर के 100 मामलों के अलावा तांतनगर, हाटगम्हरिया, टोंटो ब्लॉक से कुल 88 मामले सामने आए हैं.

'खाद्य सुरक्षा जन अधिकार मंच' से जुड़ीं शीला जोंको बताती हैं कि इन 213 मामलों में से 100 मामले तो सिर्फ़ चक्रधरपुर ब्लॉक से हैं. जबकि इन 100 मामलों में से 37 मामले सिर्फ़ बाइपी पंचायत से हैं.

इसके साथ ही वह दावा करती हैं कि उनकी पंचायत की सात हज़ार लोगों की आबादी में लगभग दो हज़ार वरिष्ठ नागरिक हैं जिनमें से लगभग 1500 लोगों के आधार कार्ड में दर्ज उनकी वास्तविक उम्र से कम है.

बीबीसी ने पश्चिम सिंहभूम ज़िले की तीन पंचायतों पदमपुर, गुलकेरा व बाइपी का दौरा किया. यहाँ हर दूसरे या तीसरे बुज़ुर्ग के आधार कार्ड में जन्म तिथि एक जनवरी पाई गई और उम्र 60 से कम थी.

पोकवाबेड़ा गाँव के रहने वाले नंदलाल खंडाईत कहते हैं, "मेरी वास्तविक उम्र 73 साल है लेकिन आधार कार्ड में 51 वर्ष दर्ज है. इस लिए वृद्धावस्था पेंशन मुझे नहीं मिल रही."

'खाद्य सुरक्षा जन अधिकार मंच' से जुड़ीं शीला जोंको

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नंदलाल ने पेंशन नहीं मिलने की शिकायत अपने गाँव के प्रधान से की है.

वो बताते हैं कि गाँव के प्रधान ने कहा है कि आधार कार्ड में आपकी उम्र ग़लत दर्ज है. लेकिन ग्राम प्रधान पिछले एक साल से कह रहे हैं कि आधार कार्ड में उम्र सुधार के लिए उन्हें चाईबासा ले जाएंगे. लेकिन कब ले जाएंगे ये नहीं बताते.

इसके साथ ही उन्होंने बताया कि 'राशन में चावल, गेहूँ और मिट्टी तेल मिलता है, लेकिन सिर्फ़ चावल से घर नहीं चलता. रिश्तेदार हैं, पर्व त्यौहार हैं, कपड़े हैं, दवा इलाज आदि का भी ख़र्च है.

उनका कहना है कि उनकी पत्नी की दिमागी स्थिति डगमग है, वह कुछ कर नहीं सकतीं. ऐसे में उन्हें व उनकी पत्नी को अगर वृद्धावस्था पेंशन मिलने लगे, तो बचा जीवन आसानी से कटेगा.

घर को लेकर चिंतित नंदलाल कहते हैं कि पीएम आवास के लिए उन्होंने अपना नाम मुखिया के पास लिखवाया है, लेकिन अभी तक आवास नहीं मिला है.

चक्रधरपुर ब्लॉक से ढाई किलोमीटर दूर पदमपुर पंचायत है.

इस पंचायत के अंतर्गत आने वाले लौड़िया गाँव में रहने वाले प्रधान वोयपाई कुछ साल पहले तक एक कंपनी में गार्ड के रूप में काम करते थे. इस काम के बदले में उन्हें रोजाना 200 रुपए मिलते थे.

लेकिन पैरों में समस्या होने के बाद वह पिछले सात साल से घर पर ही रहते हैं.

झारखंड

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प्रधान वोयपाई की वास्तविक उम्र 67 साल है लेकिन आधार के अनुसार उनकी जन्मतिथि 1 जनवरी 1973 है.

वोयपाई कहते हैं, "आधार के अनुसार मेरी उम्र 49 साल है इसलिए मुझे वृद्धावस्था पेंशन नहीं मिल सकी. उम्र संशोधन के लिए मैंने अपने मुखिया से कहा था लेकिन सहायता नहीं मिली."

प्रधान वोयपाई कहते हैं, "काम छूटने के बाद से मैं गाय और भेड़ पालता हूँ. इससे कुछ आमदनी हो जाती है. लेकिन ये काफ़ी नहीं है."

वोयपोई की 62 वर्षीय पत्नी भी मज़दूरी करती हैं. और दोनों अपने छोटे बेटे बूढ़न वोयपाई के साथ रहते हैं.

प्रधान वोयपाई कहते हैं, "मैं किसी पर बोझ नहीं बनना चाहता इसलिए कई सालों से वृद्धावस्था पेंशन की राह देख रहा हूँ."

लौड़िया गांव का स्कूल

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मंत्री ने दिया गोलमोल जवाब

'खाद्य सुरक्षा जन अधिकार मंच' ने प्रधान वोयपाई, नंदलाल खंडाईत व डोरसोन जोंकी जैसे 213 मामलों की शिकायत ज़िले के सभी ब्लॉकों के प्रखंड विकास अधिकारियों, ज़िला उपायुक्त, स्थानीय विधायक के साथ-साथ बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा मंत्री जोबा मांझी को लिखित में दी है.

बीबीसी के साथ बातचीत में मंत्री जोबा मांझी ने स्वीकार किया है कि उन्हें गृह ज़िले के ग्रामीणों से आवेदन मिले हैं.

इस संबंध में मंत्री जोबा मांझी ने कहा, "उम्र सुधार का एक फ़ॉर्म है जिसे भर कर देने से सुधार होगा, कहीं-कहीं सुधार हो भी रहा है."

लेकिन बीबीसी ने जब मंत्री से पूछा कि ग्रामीणों का कहना है कि वे साक्षर नहीं हैं तो वे फ़ॉर्म की प्रक्रिया स्वयं पूरी करने में असमर्थ हैं, ऐसे लोगों की समस्या कैसे आसान होगी, उन्हें पेंशन कैसे और कब तक मिलेगी?

इस सवाल पर मंत्री ने कोई जवाब नहीं दिया.

शीला जोंकी कहती हैं, "पिछले साल हमारी संस्था ने मांग की थी कि 213 लाभान्वितों की वास्तविक उम्र साठ साल से अधिक है, इसलिए आधार में आयु संशोधन करते हुए उनकी पेंशन स्वीकृत की जाए. लेकिन समस्या का समाधान अब तक नहीं हुआ."

शीला जोंकी का दावा है कि आधार कार्ड में कम उम्र को लेकर 79 साल के विक्रम केराई का मामला सबसे पहले सामने आया जो अब जीवित नहीं हैं. इनकी उम्र आधार कार्ड में 46 वर्ष थी. वह आर्थिक तंगी से बहुत परेशान थे.

शीला जोंकी कहती हैं कि उम्र में संशोधन के लिए प्रशासन से सहायता न मिलने पर उनकी संस्था ने ट्वीट के ज़रिए समस्या को उठाया था.

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इसके बाद वह पश्चिम सिंहभूम ज़िला के आधार परियोजना पदाधिकारी संपर्क में आईं, लेकिन अब तक समस्या का समाधान नहीं हो सका है.

ब्लॉक विकास अधिकारी संजय कुमार सिंहा

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क्या कहते हैं अधिकारी?

आधार के ज़िला परियोजना पदाधिकारी शुआन चौधरी ने बीबीसी को इस समस्या की वजहों से अवगत कराया है.

वह कहते हैं, "आधार कार्ड पहले अलग-अलग एजेंसियों की ओर से बनाए जाते थे. उस समय एज प्रूफ के लिए दो विकल्प 'डिक्लेयर्ड एवं वेरिफ़ाइड' 'घोषित या पुष्ट' थे. उस समय जिन लोगों के पास उम्र के प्रमाण पत्र नहीं होते थे, उनके आधार कार्ड एजेंसियाँ डिक्लेयर्ड विकल्प के तहत प्रोसेस कर देती थीं. कई मामलों में जन्म तिथि एक जनवरी बाय डिफ़ॉल्ट आ गई."

शुआन चौधरी कहते हैं, "अब आधार सरकारी एजेंसियों के तहत बन रहे हैं. आयु प्रमाण के लिए 12 विकल्प हैं. जिनके पास कोई आयु प्रमाण न हो, वे 12 नम्बर विकल्प के तहत फ़ॉर्म भर कर गैज़ेटेड ऑफिसर जैसे ग्रामीण क्षेत्र में मौजूद सीएचसी के डॉक्टर भी सत्यापित कर सकते हैं. "

लेकिन बाईपाई पंचायत की मुखिया पिंकी जोंको कहती हैं, "यहाँ लोग डॉक्टर से सत्यापित कराने जाते हैं तो वे सत्यापित नहीं करते. वे कहते हैं कि किस आधार पर आपकी उम्र सत्यापित करें."

मुखिया पिंकी जोंको के मुताबिक़, "आधार बनाने वाले कर्मचारी कहते हैं कि वरिष्ठ नागरिकों के शैक्षणिक प्रमाणपत्र ले आइए. अब बताइए 70 साल के शख़्स जिसने अपने बचपन में स्कूल ही नहीं देखा वह सर्टिफिकेट कहाँ से लाए.'

चक्रधरपर ब्लॉक के ब्लॉक विकास अधिकारी संजय कुमार सिंहा कहते हैं, "जिन लोगों की वास्तविक उम्र आधार से अलग है, उनकी सूची पंचायत स्तर पर तैयार करेंगे. फिर आधार के नियमानुसार क्लास वन ऑफिसर से सत्यापित करवाते हुए आधार में आयु संशोधन करवाएँगे. ये प्रक्रिया आने वाले एक महीने में अमल में आएगी."

शीला जोंको के अनुसार एक साल पहले मामले की लिखित शिकायत पश्चिम सिंहभूम ज़िला के उपायुक्त को दी गई थी.

बीबीसी ने पश्चिम सिंहभूम ज़िले के उपायुक्त अनन्य मित्तल से एक हफ़्ते तक लगातार बात करने की कोशिश की, लेकिन उनकी ओर से कोई जवाब नहीं मिला.

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