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अरुणाचल के तवांग में हिंसक झड़प के चार दिन बाद बोले रक्षा मंत्री, विपक्ष ने किया वॉकआउट
अरुणाचल प्रदेश में तवांग सेक्टर के यांगत्से में भारत और चीन के सैनिकों के बीच झड़प हुई है. इसमें दोनों तरफ के सैनिक घायल हुए हैं.
इससे पहले जून 2020 में पूर्वी लद्दाख के गलवान हिंसक झड़प में भारतीय सेना के 20 जवान मारे गए थे.
गलवान के बाद यह पहला मौका है जब चीन और भारत के सैनिक इस तरह से आमने -सामने आए हैं. घटना के बाद से विपक्ष, सरकार पर हमलावर है.
संसद में विपक्ष ने सरकार के खिलाफ 'तानाशाह' और 'चार दिन के बाद क्यों बताया गया' जैसे नारे लगाए और बाद में संसद से वॉकआउट कर लिया.
घटना को लेकर राजनाथ सिंह ने मंगलवार, 13 दिसंबर को संसद में जानकारी दी.
राजनाथ सिंह ने कहा, "अरुणाचल प्रदेश के तवांग सेक्टर में हमारी सीमा पर 9 दिसंबर 2022 को हुई एक घटना के बारे में अवगत कराना चाहूंगा."
"9 दिसंबर 2022 को पीएलए सैनिकों ने तवांग सेक्टर के यांगत्से एरिया में लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल पर अतिक्रमण कर यथास्थिति को एकतरफा बदलने का प्रयास किया. चीन के इस प्रयास का हमारी सेना ने दृढ़ता के साथ सामना किया है."
उन्होंने कहा, "इस फेस ऑफ में हाथापाई भी हुई है. भारतीय सेना ने पीएलए को उनकी पोस्ट पर वापस जाने के लिए मजबूर कर दिया."
'किसी भारतीय सैनिक की मृत्यु नहीं हुई'
राजनाथ सिंह ने कहा, "इस झड़प में दोनों ओर के सैनिकों को चोटें भी आई हैं. इस घटना में हमारे किसी भी सैनिक की न तो मृत्यु हुई है और न ही कोई गंभीर रूप से घायल हुआ है."
रक्षा मंत्री के मुताबिक 11 दिसंबर को एरिया के लोकल कमांडर ने अपने चीनी समकक्ष के साथ फ्लैग मीटिंग की और चीन को इस तरह की घटना से बचने और शांति बनाए रखने के लिए कहा.
राजनाथ सिंह ने कहा, "इस मुद्दे को चीनी पक्ष के साथ कूटनीति के स्तर पर भी उठाया गया है. हमारी सेनाएं, हमारी भौमिक अखंडता को सुरक्षित रखने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध हैं."
संसद में जब राजनाथ सिंह बोल रहे थे उस वक्त विपक्ष लगातार नारेबाजी कर रहा था. विपक्ष ने जब राजनाथ सिंह से पूछा कि ये जानकारी देने में चार दिन क्यों लग गए तो उन्होंने कहा, "बीच में छुट्टी भी तो थी."
राजनाथ सिंह के संसद में बयान देने से पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी बयान जारी कर कहा कि भारत की भूमि सुरक्षित हैं.
उन्होंने कहा, "ये भारतीय जनता पार्टी की सरकार है, नरेंद्र मोदी इसके प्रधानमंत्री हैं. जब तक बीजेपी की मोदी सरकार चल रही है, एक इंच जमीन पर भी कोई कब्जा नहीं कर सकता, आठ की देर रात और नौ की सुबह को जो हमारी सेना के जवानों ने वीरता दिखाई है मैं उसकी भूरी-भूरी प्रशंसा करता हूं, इन्होंने घुसे हुए लोगों को कुछ ही घंटों में खदेड़ दिया और हमारी भूमि का रक्षण किया है."
अमित शाह ने कांग्रेस को घेरा
अमित शाह ने चीन के साथ कांग्रेस के संबंधों का जिक्र करते हुए पार्टी को घेरने की कोशिश की. इसके लिए उन्होंने राजीव गांधी फाउंडेशन के एफसीआरए के रजिस्ट्रेशन को रद्द करने का मुद्दा उठाया.
अक्टूबर 2022 में गृह मंत्रालय ने गांधी परिवार से जुड़े गैर-सरकारी संगठन राजीव गांधी फाउंडेशन का एफसीआरए लाइसेंस रद्द कर दिया था. इसके बाद किसी भी तरह की विदेशी फंडिंग फाउंडेशन को नहीं मिल सकती है.
पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, इस फाउंडेशन की चेयरपर्सन हैं और इसके ट्रस्टीज में पूर्व पीएम मनमोहन सिंह, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी जैसे लोग शामिल हैं.
अमित शाह ने कहा, "राजीव गांधी फाउंडेशन को 2005-06 और 2006-07 के वित्तीय वर्ष में चीनी दूतावास से एक करोड़ 35 लाख का अनुदान प्राप्त हुआ था. ये एफसीआरए कानून और उसकी मर्यादाओं के अनुरूप नहीं था, इसलिए नोटिस देकर कानून का पालन करते हुए गृह मंत्रालय ने इसका रजिस्ट्रेशन रद्द किया."
अमित शाह ने कहा कि राजीव गांधी फाउंडेशन को भारत-चीन संबंधों के विकास पर शोध करने के लिए पैसा दिया गया था.
ज़ाकिर नाइक का जिक्र
अमित शाह ने कांग्रेस पर हमला करते हुए ज़ाकिर नाइक का भी नाम लिया. उन्होंने कहा कि राजीव गांधी फाउंडेशन के एफसीआरए लाइसेंस रद्द होने के पीछे दूसरी वजह इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन के प्रणेता जाकिर नाइक हैं.
उन्होंने कहा, "7 जुलाई 2011 को पचास लाख रुपये राजीव गांधी फाउंडेशन में ज़ाकिर नाइक से प्राप्त किए गए. मैं पूछना चाहता हूं कि ये पैसा किस मकसद के लिए दिया गया था."
तवांग में भारतीय-चीनी सैनिकों के बीच हिंसक झड़प पर जो सफाई केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने संसद में दी उससे विपक्ष खुश नहीं है. बयान के बाद विपक्ष ने एक साथ सदन से वॉक आउट का फैसला लिया.
'चीन की घुसपैठ हुई'
मीडिया से बात करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा, "चीन की घुसपैठ हुई है. उसके बारे में हम चर्चा करना चाहते थे. सभी विपक्षी पार्टियों ने मिलकर नोटिस दिया था, लेकिन वो चर्चा करने के लिए तैयार नहीं थे. रक्षा मंत्री ने एक बयान दिया और जल्दी से चले गए. ये हमारे सदन की प्रथा नहीं है."
उन्होंने कहा, "जब मंत्री किसी विषय पर बयान देते हैं तो क्लेरीफिकेशन पूछा जाता है. हमें इसका मौका नहीं दिया गया. उन्होंने सिर्फ अपनी बात रखी और चले गए."
पंडित नेहरू ने 1962 के युद्ध की सदन में की थी चर्चा
राष्ट्रीय जनता दल के सांसद मनोज कुमार झा ने तवांग की घटना को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि आज सरकार चीजें छिपाना चाहती हैं.
"जितना राजनाथ सिंह ने 200 शब्दों में बयान दिया उससे ज्यादा जानकारी आपके पास है. क्या सदन इसके लिए है? आज सरकार नाकामयाब रही है. चीन के साथ सरकार डिनायल मोड में रहती है जो लोकतंत्र के लिए अच्छा नहीं है."
असदुद्दीन ओवैसी ने क्या कहा?
एआईएमआईएम प्रमुख और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने कहा है कि हमें सरकार की तरफ से बयान नहीं बल्कि पूरे मामले पर चर्चा करनी चाहिए.
उन्होंने कहा, "भारतीय सेना पर मुझे पूरा भरोसा है. मगर भारत के पीएम नरेंद्र मोदी जी की कमजोर पॉलिटिकल लीडरशिप है, जो चीन का नाम लेने से कतराते हैं. देश ये जानता है कि जब गलवान हुआ था तो उस वक्त ऑल पार्टी मीटिंग में पीएम मोदी ने कहा था कि न कोई घुसा है न कोई घुसेगा. क्या अब आप ये बात कहेंगे. इसका मुंहतोड़ जवाब क्यों नहीं देते."
रिजिजू ने क्या कहा?
वहीं क़ानून मंत्री किरेन रिजिजू ने सरकार का बचाव करते हुए कहा, ''आज के दिन हम किसी देश में जाते हैं तो भारत से आए हैं, ये बताने से ही इज़्ज़त मिलती है. इसका कारण है कि भारत का इतिहास हम सामने लाए हैं."
"भारत एकजुट हो गया है. भारत जब एकजुट होता है तो ताक़तवर बन जाता है. प्रधानमंत्री जी की कल्पना है एक भारत, श्रेष्ठ भारत. इसमें भारत को एक सूत्र में बांधने का काम किया गया है."
तवांग में हुई झड़प पर पूछे गए एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा,"कई सारी चीज़ें जो हो रही हैं उसमें हम अपनी संस्कृति को बढ़ावा देना भूल जाते हैं. हमें अपनी संस्कृति को सेलिब्रेट करना चाहिए, उत्सव मनाना चाहिए."
"अतिक्रमण का जो विषय है उस पर आज नहीं बोलूंगा. आज भारत ताक़तवर देश है उसके पास विज़न है. अतिक्रमण पर बात करूंगा तो मुद्दा भटक जाएगा, इस मुद्दे पर बाद में बात करूंगा."
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