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यूपी में वाल्मीकि समाज की शादी में 60 पुलिसवालों की तैनाती का पूरा मामला क्या है- ग्राउंड रिपोर्ट
- Author, शहबाज़ अनवर
- पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए
बीते शुक्रवार की रात उत्तर प्रदेश के संभल ज़िले की गुन्नौर तहसील के गांव लोहामई में हुई एक शादी इन दिनों सुर्ख़ियों में है. ऐसा इसलिए है क्योंकि गांव के राजेंद्र उर्फ़ राजू वाल्मीकि की बेटी रवीना की शादी में क़रीब 60 पुलिसकर्मी शामिल हुए.
ये पुलिसकर्मी किसी बुलावे पर यहां नहीं आए थे बल्कि इसलिए आए थे ताकि रवीना की शादी में गांव में बारात चढ़त और दूल्हे की घुड़चढ़ी के दौरान कोई व्यवधान पैदा न कर सके.
राजू वाल्मीकि ने 31 अक्तूबर को पुलिस अधीक्षक (संभल) को एक शिकायती पत्र सौंपा था. उन्होंने लिखा था कि 25 नवंबर को उनके गांव में बेटी की शादी है, लेकिन सजातीय लोग गांव में दूल्हे की बारात नहीं चढ़ने देने की धमकी दे रहे हैं.
इस शिकायत के बाद संभल के ज़िला पुलिस अधिकारी चक्रेश मिश्र ने संज्ञान लेकर सीओ आलोक कुमार को मामले को देखने को कहा. संभल के एडिशनल पुलिस अधीक्षक श्रीश श्चंद्र ने बताया, "इस बारे में शिकायत मिली थी. उन्होंने आशंका जताई थी कि कोई विरोध कर सकता है, लेकिन विरोध जैसी कोई बात नहीं दिखी. पूरे गांव में बारात चढ़ी और विवाह ख़ुशी के साथ संपन्न हुआ."
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वाल्मीकि बस्ती में पहुंचने से पहले क्या था माहौल?
गुन्नौर तहसील का लोहामई गांव बुलंदशहर सीमा के नज़दीक ही है. तहसील से इस गांव की दूरी लगभग 22 किलोमीटर है जहां पहुंचने के लिए तमाम संकरे रास्तों और भीड़ भरे गांव के छोटे बाज़ार से होकर जाना पड़ता है.
गांव से तक़रीबन दो किलोमीटर पहले एक बरसाती नदी से होकर भी गुज़रना पड़ता है. यहां कुछेक स्थान ऐसे मिले जहां टूटी सड़क थी जिसमें पानी भरा था. सड़क के दोनों ओर मुस्लिम परिवारों के लोग धूप सेंकते दिखाई दिए. राजू वाल्मीकि के घर के बारे में पूछने पर एक बुज़ुर्ग ने कहा, "आपको वाल्मीकियों में जाना है ना तो आप सबसे आख़िर वाले घर में जाएं, बस वहीं है उनका घर."
राजू वाल्मीकि की बेटी रवीना के विवाह के बारे में पूछने पर ख़ुशी मोहम्मद कहते हैं, "मेरी आयु क़रीब 60 साल है. ये पहली बार देखा है कि वाल्मीकि समाज की बारात की चढ़त पूरे गांव में हुई है. जिस दिन शादी हुई उस दिन पूरे गांव में पुलिस ही पुलिस थी."
एक दूसरे ग्रामीण जावेद ने बताया, "यहां ऐसा पहली बार हुआ है जब किसी वाल्मीकि समाज की बारात पूरे गांव में निकली है. लड़ाई-झगड़ा न हो इसके लिए पुलिस सुरक्षा भी थी. बारात को गांव के एक कोने से दूसरे कोने तक घुमाकर ले जाया गया था."
ये पूछने पर कि झगड़ा कौन लोग करते हैं, दोनों लोगों ने चुप्पी साध ली.
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क्या विरोध घुड़चढ़ी का है?
गांव के आख़िर में राजू वाल्मिकी का घर है, वहीं एक पेड़ के नीचे समाज और उनके परिवार के कुछ लोग बैठे दिखाई दिए. क़रीब दो सौ गज़ में राजू का घर है. दो कमरे, दालान और बाहर एक बड़ा सहन है. सहन में एक बुज़ुर्ग महिला छोटी चारपाई पर बैठी हैं. पास ही धुले हुए कुछ बर्तन रखे हैं.
राजू वाल्मीकि ने कहा, "हम वाल्मीकि समाज के चौहान कुल से आते हैं. मैंने अपनी बेटी की बारात गांव में चढ़ाने के लिए सुरक्षा की मांग की थी. हिंदुओं की जाति खागी (खड़गवंशी) चौहान के लोग बारात को गांव में चढ़ने नहीं देते हैं."
इसकी वजह पूछे जाने पर उन्होंने बताया, "ये तो वे ही लोग जानें, लेकिन पहले भी जब कभी वाल्मीकि समाज के लोगों ने यहां बारात चढ़ाने की कोशिश की है, झगड़ा हुआ है."
क्या दूल्हे की घुड़चढ़ी का विरोध भी होता है, इस बारे में पूछे जाने पर राजू कहते हैं, "देखिये घोड़ी चढ़ने का विरोध नहीं है. लेकिन समस्या ये है कि हम बारात को गांव में नहीं घुमा सकते हैं. यहां हमारे घर से लेकर सौ मीटर की दूरी तक ही हम बारात चढ़ा सकते थे, इतनी ही दूर तक हमारे समाज के लोगों का घर है. अगर इससे आगे या गांव में किसी और जगह बरात चढ़ी तो गांव के लोग विरोध करते थे."
क़रीब 32 सौ की आबादी और 21 सौ वोट वाले इस गांव की प्रधान एक मुस्लिम महिला हैं, लेकिन उनकी ओर से इस मुद्दे पर उनके पति भूरे ने बात की. भूरे ने बताया, "हम भी देखते आ रहे हैं कि वाल्मीकि समाज की बारात पूरे गांव में कभी नहीं चढ़ी, झगड़ा इस बात का रहा है कि पूरे गांव में दूसरे समाज के लोगों के घरों के सामने के रास्ते से बारात को गुज़रने नहीं दिया जाता था. कई बार इसको लेकर झगड़े हुए हैं."
गांव के ही महेंद्र वाल्मीकि की बेटी की शादी में भी बारात को पूरे गांव में नहीं चढ़ने दिया गया था. महेंद्र कहते हैं, ''7 मई 2021 को मेरी बेटी की शादी थी. बारात चढ़त होनी थी, लेकिन गांव में बारात चढ़त को लेकर झगड़ा हो गया. सभी लोग लाठी-डंडो के साथ वहां खड़े हो गए."
स्थानीय पत्रकार महेश गिरी कहते हैं, "इन क्षेत्रों में अक्सर ऐसी शिकायतें मिलती रहती हैं. इस मामले में भी ये ही हुआ है, जब तक मामला पुलिस तक नहीं पहुंचा था तब तक जो हुआ सो हुआ, लेकिन अब पुलिस की सख़्ती के बाद शायद यहां कोई बारात चढ़त रोकने की हिम्मत नहीं करेगा."
क्या कह रही है पुलिस?
संभल के एएसपी श्रीश चंद्र ने पूरे गांव में बारात चढ़त के विरोध को लेकर कहा, ''विरोध जैसी कोई बात नहीं थी बल्कि राजू ने बारात चढ़त को लेकर आशंका जताई थी कि कुछ लोग विरोध कर सकते हैं. एहतियात के तौर पर पुलिस तैनात की गई थी."
श्रीश चंद्र ने यह भी कहा, "कुछ लोग कह रहे होंगे कि दशकों से यहां बारात चढ़त नहीं हो पाई है. लेकिन जांच में ऐसी कोई बात नहीं मिली. पहले भी यहां शादियां हुई हैं."
इलाके के एसओ पुष्कर सिंह ने बीबीसी से कहा, "मैं जनपद में ज़्यादा पुराना नहीं हूं. लेकिन राजू की बेटी की शादी के बारे में उन्होंने एसपी साहब से शिकायत की थी. जांच में अन्य जाति के लोगों ने बताया था कि जब भी वाल्मीकि समाज की बारात निकलती थी, वे अपने ही ऐरिया में निकालते थे, लेकिन इस बार ये कह रहे थे कि पूरे गांव में बारात निकालेंगे. हमने दो-चार बार मीटिंग की और उन लोगों से स्पष्ट ये कह दिया कि बारात तो निकलेगी ही."
1700 लोगों की आबादी वाले गांव में खागी चौहान को उत्तर प्रदेश में कल्याण सिंह के मुख्यमंत्री काल में राज्य में तो पिछड़ा वर्ग की सूची में शामिल किया गया था, लेकिन इस समाज के लोग खुद को राजपूत समाज से ही जोड़कर देखते रहे हैं.
'21वीं सदी में ऐसा होता है?'
राजू वाल्मीकि के परिवार के अन्य सदस्यों में उनकी पत्नी उर्मिला, दो बेटियां रवीना और प्रीति के अलावा एक छोटा बेटा भी है. रवीना कक्षा नौ तक पढ़ी हैं जबकि राजू की पत्नी उर्मिला अंग्रेज़ी के तमाम शब्दों का इस्तेमाल करती दिखीं. वह बारहवीं कक्षा तक ही पढ़ी हैं.
राजू की छोटी बेटी प्रीति इस पूरे प्रकरण को लेकर काफ़ी आहत दिखीं. प्रीति ने मुंबई से स्नातक की पढ़ाई की है. वह कहती हैं, "दूसरी जाति के लोग हमलोगों से जलन रखते हैं, समाज के कुछ दलित नेताओं और पुलिस की मदद से मेरी बहन की बारात पूरे गांव में घूमकर आई, हमें बहुत ख़ुशी है. झगड़ा नहीं हुआ."
प्रीति ने कहा, "21वीं सदी में भी ऐसे लोग हैं जो कास्टिज़्म कर रहे हैं, ऐसे लोगों को समाज के सामने लाना चाहिए. आज के वक्त में भी ऐसे लोग हैं. हमारे क्या सींग लगे हैं जो किसी को मार देंगे. लोगों को तो ख़ुशी होनी चाहिए कि बारात उनके घरों के सामने से निकल रही है, लेकिन ये लोग विरोध कर रहे हैं."
राजू की पत्नी उर्मिला ने कहा, "हमें बारात निकालने को लेकर डर तो था. ये सब कई सालों से हो रहा है, मेरे जेठ की लड़की शादी थी, कुछ और शादियां थीं, लेकिन गांव के रास्तों में बारात नहीं निकलने दी. लेकिन हमने कोशिश की और पुलिस ने सुरक्षा दी और बारात पूरे धूमधाम से निकली."
रवीना के परिवार के लोग जिन दलित नेताओं की तारीफ़ कर रहे हैं, उनमें वाल्मीकि आश्रम, हरिद्वार के कर्मवीर विरोत्तम श्रेष्ठ भी शामिल हैं. उन्होंने फ़ोन पर बताया, "ये लोग विवाह से पंद्रह दिन पहले मेरे पास इस समस्या को लेकर पहुंचे थे. हमने एसपी संभल और प्रशासन से इस समस्या को लेकर बात की, मीडिया से भी बात की और बारात पूरे गांव में धूमधाम के साथ निकल गई. 60 के लगभग पुलिसकर्मी इस दौरान गांव में मौजूद रहे."
पूरे मामले पर क्या बोला नव-विवाहित जोड़ा
शादी हो चुकी है और जब हमलोग राजू वाल्मिकी के घर पहुंचे तब दूसरे रस्मों की तैयारी चल रही थी. नव-विवाहित जोड़े में रवीना और उनके पति रामकिशन और कुछ अन्य मेहमान राजू के घर के बाहर आकर उतरे. रवीना ने लाल रंग का जोड़ा पहना हुआ था.
गाड़ी से उनके उतरते ही राजू वाल्मीकि दोनों को घर के बाहर ही बने मंदिर में मत्था टेकने की नसीहत देते हैं. रवीना परिजनों को देखकर खिलखिलाकर हंसती हैं और दौड़ कर मां और बहन के गले लग जाती हैं. कैमरे के सामने आने में कुछ सहज नहीं थीं. अधिक बोल नहीं पाईं. बस इतना कहा कि वह शादी से काफ़ी ख़ुश हैं, पहली बार पूरे गांव में बारात चढ़त धूमधाम से हुई.
उनके पति रामकिशन भी कैमरे के सामने कुछ बोलने में काफ़ी झिझक रहे थे. ज़ोर डालने पर कहते हैं, "25 नवंबर को मेरी बारात आई थी. अभी तक गांव के बारे में सुना था कि यहां पूरे गांव में बारात नहीं चढ़ती है, लेकिन पुलिसवाले थे, हमारी बारात निकली."
कैमरे से कतराते दूसरी जातियों के लोग
ग्राम प्रधान के पति भूरे ने बताया कि गांव में पांच सौ से अधिक वाल्मीकि समाज के लोग हैं. साथ ही लगभग एक हज़ार से अधिक की आबादी मुसलमानों की है जबकि खागी चौहान समाज के लोग सबसे ज़्यादा हैं.
मुस्लिमों के अलावा खागी चौहान समुदाय के लोगों से भी हमने बात करने की कोशिश की, लेकिन कोई इस मामले पर कैमरे पर ऑन द रिकॉर्ड बोलने को तैयार नहीं हुआ.
हालांकि एक दो युवाओं ने पहचान ज़ाहिर नहीं करने की शर्त पर कहा, "वाल्मीकि समाज के लोग कभी पूरे गांव में बारात नहीं चढ़ा पाए हैं, वे बारात निकालने के दौरान अशोभनीय हरकतें करते हैं. इसलिए जहां से वे अभी तक बारात निकालते आए हैं वहीं से निकालें तो अच्छा होगा. वैसे इस शादी में बारात पूरे गांव में निकली और किसी ने विरोध नहीं किया."
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