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चीन: कोरोना प्रतिबंधों के ख़िलाफ़ फूटा गुस्सा, गलियों में निकल पुलिस से भिड़े लोग
- Author, स्टीफ़न मैकडॉनल
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़, बीजिंग से
चीन में कोरोना संक्रमण रोकने के लिए लगे कड़े प्रतिबंधों के ख़िलाफ़ अब लोगों के सब्र का बांध टूटने लगा है. दक्षिणी चीन के ग्वांगज़ो शहर में लोग अनिवार्य लॉकडाउन को तोड़ कर घरों से निकल आए. इस दौरान उनकी पुलिस से झड़प हुई.
ग्वांगज़ो के कई वीडियो फ़ुटेज में लोग पुलिस वाहनों को उलटते दिख रहे हैं, कुछ लोग कोविड कंट्रोल के लिए लगाए गए बैरियर को तोड़ रहे हैं. इन हंगामों के बाद शहर में दंगा निरोधक पुलिस तैनात कर दी गई है.
कोरोना महामारी फैलने के बाद ग्वांगज़ो में कड़े प्रतिबंध लगाए गए थे. चीन में इस समय अर्थव्यवस्था में गिरावट दिख रही है, लिहाज़ा देश की 'ज़ीरो कोविड' पॉलिसी को लेकर भारी दबाव है.
ग्वांगज़ो शहर के हाइजु ज़िले में काफ़ी तनाव दिख रहा है. यहां लोगों से घरों के अंदर रहने को कहा गया है. यहां बड़ी तादाद में प्रवासी मजदूर रहते हैं.
इन मज़दूरों का कहना है कि अगर वो काम पर नहीं पहुंच पाते हैं तो उनका वेतन रोक दिया जाता है.
इसके साथ इन ही लोगों ने भोजन की कमी और रोज़मर्रा की चीज़ों के बेहद महंगा होने की शिकायत की है.
इन लोगों का कहना है कि कोविड को क़ाबू रखने के लिए उठाए गए क़दमों की वजह से उन्हें काफ़ी दिक़्क़तों का सामना करना पड़ रहा है.
पिछले कई रातों से इन मज़दूरों का सफ़ेद पोशाक पहन कर काम करने वाले कोविड रोकथाम अधिकारियों से टकराव चल रहा था, लेकिन सोमवार की रात को उनका गुस्सा बेकाबू हो गया.
ये मजदूर बड़ी तादाद में कोविड प्रतिबंधों को धता बताते हुए सड़कों पर उतर आए.
टेस्टिंग को लेकर अफवाहें
कोविड को लेकर कई अफवाहें भी फैली हुई हैं. ऐसी खबरें भी आ रही हैं कि कोविड टेस्ट करने वाली कंपनियां रिजल्ट में कोरोना संक्रमण को बढ़ा-चढ़ा कर पेश कर रही हैं.
माना जा रहा है कंपनियां इसके जरिेये टेस्ट की अनिवार्यता को बढ़ावा देने की कोशिश कर रही हैं. इससे उन्हें ज्यादा से ज्यादा पैसा कमाने का मौका मिलेगा.
देश के उत्तरी इलाके में भी कोरोना वायरस से जुड़ी अफवाहों से दबाव बढ़ता दिख रहा है.
हेबेई प्रांत में अधिकारियों ने कहा कि यहां के शिजियाझुआंग में बड़े पैमाने पर सार्वजनिक टेस्टिंग होगी.
लेकिन इन अटकलों को हवा मिली है कि सरकार इसके जरिये ये जानने की कोशिश करेगी कि अगर इस वायरस को फैलने दिया जाए तो क्या हो सकता है.
इस बारे में #ShijiazhuangCovidprevention के जरिये सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर खूब चर्चा चल रही है.
हालात से घबराए लोगों ने चीनी दवाएं जमा करना शुरू किया है. कहा जा रहा है ये देसी दवाएं संक्रमण रोकने में मददगार हैं.
कहा जा रहा है कि शहर में चीजों की आपूर्ति भी लगभग ठप हो गई है. इस तरह की अफवाहों की वजह से दो सप्ताह पहले फॉक्सकॉन के फैक्ट्री परिसर में बड़ी तादाद में लोगों ने जमा हो कर हंगामा किया था.
फॉक्सकॉन में इस हंगामे की वजह से एपल कंपनी के स्मार्टफोन आईफोन की ग्लोबल सप्लाई में दिक्कतें आई थीं.
अर्थव्यवस्था और संक्रमण में संतुलन बिठाने की कोशिश
चीन के सभी इलाकों में प्रांतीय सरकारें कोशिश कर रही हैं कि जीरो कोविड पॉलिसी की वजह से अर्थव्यस्था को नुकसान न हो. सरकारें जीरो कोविड पॉलिसी और अर्थव्यवस्था के बीच संतुलन बिठाने की कोशिश कर रही हैं.
फैक्ट्री उत्पादन और खुदरा बिक्री के हालिय आंकड़ों से पता चलता है कि औद्योगिक उत्पादन पर कोरोना संक्रमण का भारी असर पड़ा है. लिहाजा सरकार को हालात सुधारने के लिए फौरी कदम उठाने होंगे.
हाल के दिनों में किसी भी प्रांत से कोविड के पूरी तरह खात्मे की खबर नहीं आई है. चोंगक्विंग शहर में दो करोड़ लोग एक तरह के लॉकडाउन में रह रहे हैं. इसे लोग ' वोलेंटरी स्टैटिक मैनेजमेंट' कह रहे हैं .
क्योंकि कोरोना लॉकडाउन के बारे में कोई औपचारिक घोषणा नहीं नहीं है. वहां रह रहे समुदायों ने खुद ही लोगों को घरों के अंदर रहने को कहा है.
ऑनलाइन मीडिया पर चोंगक्विंग शहर में इसे लेकर मजाक भी चल रहा है. चूंकि यहां कोविड का आतंक बना हुआ है इसलिए इससे जुड़े हालात को सुधारने में थोड़ा सा भी बदलाव नई घबराहट और डर पैदा कर रहा है.
ल्हासा से लेकर शिनजियांग तक लॉकडाउन का विरोध
इस सप्ताह की शुरुआत में अधिकारियों ने चाओयांग में सड़कों पर खुले कई टेस्टिंग बूथ बंद करने के फैसले किए. इन्हें आवासीय परिसरों में भेज दिया गया है. पीसीआर स्टेशनों में अचानक काफी कटौती कर दी गई.
ज्यादातर दफ्तरों में डेली टेस्ट के बगैर एंट्री नहीं हो सकती. आपको अपना टेस्ट रिजल्ट हर रोज दिखाना होता है. इसलिए जहां टेस्टिंग बूथ हैं, वहां लंबी-लंबी लाइनें लग रही हैं.
हाल में तिब्बत में फंसे कुछ कामगारों ने लॉकडाउन से परेशान होकर ल्हासा से निकलने की कोशिश कर चुके हैं. शिनजियांग प्रांत में भी ऐसी कोशिश हो रही है. इससे पता चलता है कि जीरो-कोविड पॉलिसी कारगर नहीं हो पा रही है.
पिछले सप्ताह कुछ बदलावों का एलान किया गया था. इनमें नियमों को थोड़ा शिथिल किया गया था. इससे लगता है कि आने वाले दिनों में लॉकडाउन के नियम और शिथिल हो सकते हैं. सरकार भले ही इस पर विचार कर रही हो, लेकिन लगता नहीं कि इतनी जल्दी ये होने वाला है.
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