'आप' भाजपा और कांग्रेस को हिमाचल में कितनी चुनौती दे पाएगी

- Author, अरविंद छाबड़ा
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
हिमाचल प्रदेश के सोलन शहर में चल रहे आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल के रोड शो में भीड़ भी नज़र आई और वहाँ मौजूद लोगों में उत्साह भी.
अपने चिर परिचत अंदाज़ में केजरीवाल लोगों से पार्टी को एक मौका देने की गुज़ारिश कर रहे थे.
ठीक वैसे ही जैसे पंजाब में दो पार्टियाँ लगभग बारी-बारी से सत्ता में आती रही हैं, हिमाचल में भी कांग्रेस और भाजपा के बीच में यही होता आया है.
केजरीवाल लोगों से कह रहे थे कि पंजाब की ही तरह अब उनके पास अवसर है कि वे लोगों की भलाई का काम करनेवाली एक ईमानदार पार्टी के लिए वोट करें.

केजरीवाल की गारंटी

कुछ पंजाब की तरह ही आम आदमी पार्टी ने यहाँ भी गारंटियाँ दी हैं. आम आदमी पार्टी के हिमाचल प्रदेश अध्यक्ष सुरजीत सिंह ठाकुर ने बीबीसी को बताया कि पहली गारंटी है महिला सम्मान राशि की जिसमें हर महिला को ₹1000 हर महीने दिए जाएंगे, अगर वह 18 साल से ऊपर है.
"बेरोज़गारी हिमाचल में बहुत बड़ी समस्या है. अगर यहां की जनता आम आदमी पार्टी को मौका देती है तो हम 6 लाख नौकरियां यहां की जनता को देंगे. साथ ही ₹3000 बेरोज़गारी भत्ता तब तक देंगे जब तक उन्हें सरकारी नौकरी नहीं मिल जाती या फिर उनकी उम्र 40 साल की नहीं हो जाती."
पुराने पेंशन स्कीम को लागू करना भी एक गारंटी है और वो यहाँ सब से बड़ा मुद्दा भी बना हुआ है क्योंकि सरकारी कर्मचारी नई पेंशन स्कीम से काफ़ी नाराज़ हैं.

'आप आई और गई'

हिमाचल प्रदेश के सभी 68 सीटों पर 12 नवंबर को चुनाव होने हैं और 8 दिसंबर को मतगणना होनी है. फ़िलहाल यहाँ भाजपा की सरकार है.
कांग्रेस दावा कर रही है कि अब सत्ता में आने की उसकी बारी है. पर आम आदमी पार्टी ने भी 67 सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़े किए हैं और उसका मानना है कि उसके बिना अगली सरकार नहीं बन सकती. वहीं दोनों, भाजपा और कांग्रेस आम आदमी पार्टी को चुनाव के मैदान में मान ही नहीं रही.
भाजपा अध्यक्ष जे पी नड्डा एक रैली के दौरान कह रहे थे कि ''एक और पार्टी है आई बाद में और गई पहले, क्रीज़ पर टिकी ही नहीं क्योंकि दिल्ली और पंजाब यहां से बहुत निकट है. यहां की जनता बहुत जागरूक है
... उनको मालूम हो गया कि वह छल-कपट से काम करने वाले हैं. फिर वह (पार्टी) समझ गए कि यहां पर उनका काम नहीं चलेगा, इसलिए वह गुजरात चले गए ताकि वहां कम से कम दिल्ली की हवा ना पहुंचे."
हिमाचल प्रदेश के कांग्रेस उपाध्यक्ष नरेश चौहान से जब हमने यह सवाल किया कि वे 'आप' को कहाँ खड़ा देखते हैं तो उन्होंने कहा, "आम आदमी पार्टी के लिए अभी हिमाचल में सफ़र बहुत लंबा है.
वह आज आ रही है, कोशिश भी कर रही है, लेकिन मुझे लगता है कि हिमाचल में शायद ही कोई ऐसी सीट हो जहां वह अपनी ज़मानत बचा पाए. आम आदमी पार्टी का अभी इस चुनाव में कोई बड़ा रोल होने वाला नहीं है."
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क्या हुईं ग़लतियाँ?

कुछ जानकारों और यहां तक के पार्टी के ही कुछ नेताओं का कहना है कि आम आदमी पार्टी ने शुरुआत तो अच्छी की थी, लेकिन फिर बाद में उनका अभियान फीका पड़ गया है.
इसकी कई वजहें गिनाई जाती हैं हैं—एक उनकी पार्टी के नेताओं का चुनाव से कुछ महीने पहले ही पार्टी छोड़ना, पार्टी में बड़े लीडरों का न होना और पार्टी के अपने नेताओं का हिमाचल से शुरुआती रैलियों के बाद ग़ायब हो जाना.
'आप' के शिमला उम्मीदवार चमन राकेश का कहना है कि पहली ग़लती जो हिमाचल में हुई वो ये कि जो पूर्व अध्यक्ष थे उनको समय से हटाया नहीं गया. उनके बारे में कई चीज़ें चल रही थीं.
"इस देरी की वजह से भाजपा ने उनको अचानक से झटक लिया. उनका जाना तो तय था ही, लेकिन इसकी वजह से संगठन तोड़ दिया गया."
"दूसरी ग़लती यह थी कि संगठन को निचले लेवल तक तोड़ा गया. सिर्फ़ ऊपर के लेवल तक टूटा होता तो शायद इतना असर नहीं होता. उसका नुक़सान हुआ कि संगठन को दोबारा बनाने में बहुत समय लग गया."
वे आगे कहते हैं कि ''फिर हमारे पूर्व प्रभारी सत्येंद्र जैन ने जैसे ही लोगों से मिलना शुरू किया, इन्होंने उन को उठा लिया. (पार्टी के चुनाव प्रभारी और दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन को मई के अंत में मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में गिरफ़्तार किया गया था). अब उसका नुक़सान यह हुआ कि यहां पर कोई ऐसा लीडर नहीं बचा जो रोज़ाना की चीज़ों को देख पाता.
स्थानीय पत्रकार अश्विनी शर्मा का कहना है कि आम आदमी पार्टी ने यह सोचा था कि बीजेपी और कांग्रेस के जो बड़े लोग हैं वह हमारे साथ आ जाएंगे, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ.
"उन्होंने जितने भी बड़े चेहरों को लाने की कोशिश की वह उनके साथ नहीं आए. आहिस्ता-आहिस्ता पार्टी ने अपना फ़ोकस गुजरात की और कर लिया और अपने आप को यहां से बाहर खींच लिया."
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रेवड़ियों पर राजनीति

हालांकि आम आदमी पार्टी के अध्यक्ष सुरजीत ठाकुर कहते हैं कि दूसरी पार्टियों की तरह उन्हें बड़े नेताओं की ज़रूरत नहीं हैं. वे यह भी दावा कर रहे हैं कि केजरीवाल ने सोलन में रोड शो किया है और आने वाले दिनों में उनके और नेता भी राज्य में नज़र आएँगे.
आम आदमी पार्टी बड़े-बड़े वादे कर रही है और साथ ही फ़्रीबीज़ का एलान भी. पर कहा जाता है कि प्रदेश के सीधे-साधे लोग फ़्री की सेवाएं लेना ज़्यादा पसंद नहीं करते.
स्थानीय पत्रकार अश्विनी शर्मा बताते हैं कि हिमाचल में बहुत स्वाभिमानी वाले लोग हैं और यहाँ उस तरह की ग़रीबी भी नहीं है.
"जब आम आदमी पार्टी ने शुरू में इस तरह की बातें कीं कि वो ये फ़्री देंगे, वो फ़्री देंगे तो लोगों को लगा कि हम इस श्रेणी में नहीं आते जो मुफ़्त की चीज़ें लेना चाहते हों. हां, कुछ इस तरीके के लोग हैं जो ग़रीब हैं या उनको इस तरह की मदद की ज़रूरत होती है. पर अगर आप यह सोचें कि सारे हिमाचल के लोग फ़्री की चीज़ें लेना चाहेंगे तो वह इन चीज़ों को स्वीकार नहीं करते."
सुरजीत ठाकुर कहते हैं कि जिन्हें कुछ पार्टियाँ फ़्रीबीज़ कहती हैं वे लोगों की भलाई के लिए हैं और हर सरकार का कर्तव्य है कि वो जनता को ये सुविधाएँ दे, न कि अपने ख़ास लोगों को, जैसा कि कुछ पार्टियाँ करती हैं.
इससे पहले भी आम आदमी पार्टी के नेता अपनी पार्टी की "कल्याणकारी नीति" जैसे कि मुफ़्त स्वास्थ्य सेवा और मुफ़्त बिजली का बचाव करते आए हैं.

आम लोगों की 'आप' के बारे में क्या राय है

वापस सोलन चलते हैं जहाँ अरविंद केजरीवाल भाषण दे रहे थे. हमने भीड़ में लोगों से पूछा कि उनका इस पार्टी के बारे में क्या ख़्याल है. एक महिला जो दो और महिलाओं के साथ वहाँ पहुँची थीं बोलीं कि ''वे तो केजरीवाल को सिर्फ़ देखने के लिए वहाँ पहुँची हैं. सुना है कि वो बहुत अच्छा काम कर रहे हैं. बाकी तो वोटरों को देखना है."
उतने में वहाँ खड़े एक पुरुष बोल पड़े. "यह सिर्फ़ शोर है. सिर्फ़ उत्सुकता है उन्हें देखने-सुनने की. वे तो नौजवानों को घर पर बिठा देंगे. सब कुछ मुफ़्त देकर. तो नौजवान तो बिना काम के ग़लत काम ही करेंगे ना."
एक ने कहा कि चुनाव में अब ज़्यादा दिन नहीं बचे हैं. "लेकिन कौन जानता है, अगर ऐसी रैलियां होती हैं, तो हवा का रुख़ बदल भी सकता है."
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