You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
गुजरात चुनाव: विधानसभा सीटों और मतदान से जुड़ी हर बात
गुजरात विधानसभा की 182 सीटों के लिए चुनाव आगामी महीनों में होने हैं. उसकी तारीख़ का एलान अभी नहीं किया गया है. आमतौर पर किसी राज्य में चुनाव होने से पहले, केंद्रीय चुनाव आयोग की एक टीम चुनावी प्रदर्शन की समीक्षा के लिए राज्य का दौरा करती है.
केंद्रीय चुनाव आयुक्त राजीव कुमार की नेतृत्व में टीम ने 26 से 27 सितंबर को गुजरात का दौरा किया है. इस दौरे के दौरान चुनाव आयोग की टीम ने दोनों राज्यों के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक से मुलाकात की और तैयारियों का जायज़ा लिया.
उम्मीद जताई जा रही थी कि हिमाचल चुनाव की तारीखों की घोषणा के साथ ही गुजरात के चुनावों का भी ऐलान हो जाएगा, लेकिन चुनाव आयोग ने ऐसा नहीं किया. अब किसी भी दिन चुनाव आयोग तारीखों का एलान कर सकता है.
गुजरात में पिछला चुनाव कब हुआ था?
गुजरात विधानसभा में पिछला चुनाव दिसंबर, 2017 में दो चरणों में हुए थे. पहले चरण के लिए नौ दिसंबर को जबकि दूसरे चरण के लिए 14 दिसंबर को वोट डाले गए थे. वोटों की गिनती 18 दिसंबर को हुई थी. चुनाव में बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर उभरी थी और कुछ दिनों तक चले सियासी घमासान के बाद विजय रुपाणी 26 दिसंबर, 2017 को राज्य के मुख्यमंत्री बने थे.
गुजरात सरकार का कार्यकाल 23 फरवरी, 2023 को पूरा हो रहा है. इसे देखते हुए अंदाज़ा लगाया जा रहा है कि पिछली बार की तरह ही, इस बार भी दिसंबर महीने में चुनाव कराए जा सकते हैं.
कितने मतदाता, क्या है समीकरण
गुजरात विधान सभा में कुल 182 सीटें हैं जिनमें से 13 सीटें अनुसूचित जाति के लिए और 27 सीटें अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हैं. 2022 में 15वें विधानसभा चुनाव के दौरान नागरिक आखिरी बार 182 विधायकों का चुनाव करेंगे. इसके बाद संवैधानिक प्रतिबंध हटने से गुजरात में विधानसभा और लोकसभा में सीटों की संख्या बढ़ाना संभव होगा.
सैंपल रजिस्ट्रेशन सर्वे के मुताबिक, गुजरात की 55 फीसदी आबादी 30 साल से कम उम्र की है, जिसमें 57 फीसदी ग्रामीण इलाकों में और 53 फीसदी शहरी इलाकों में रहती है. इस आबादी ने अपने अधिकांश जीवन में भाजपा को राज्य पर शासन करते देखा है.
इस चुनाव में यदि 80 वर्ष या उससे अधिक आयु के मतदाता किसी कारणवश मतदान केंद्र पर नहीं पहुंच पाते हैं तो उन्हें घर बैठे मतदान करने की सुविधा दी जाएगी.
मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ने मीडिया से कहा कि इस साल गुजरात में 4.83 करोड़ मतदाता पंजीकृत हुए हैं. उन्होंने कहा, "राज्य में 182 सीटों के लिए 51,782 मतदान केंद्र और प्रति मतदान केंद्र 934 मतदाता होंगे."
कुल मतदान केंद्रों में से सर्वाधिक 34,276 मतदान केंद्र ग्रामीण क्षेत्रों में होंगे. जबकि शहरी क्षेत्रों में 17,506 मतदान केंद्र होंगे
2017 के चुनाव में क्या थी दलगत स्थिति?
2017 के विधानसभा चुनावों में बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर उभरी थी. 182 सदस्यीय विधानसभा में 150 सीटें जीतने का दावा करने वाली बीजेपी को 99 सीटों पर कामयाबी मिली थी, जबकि कांग्रेस 77 सीटों पर जीत हासिल करने में कामयाब रही थी.
एनसीपी को एक, बीटीपी को दो और अन्य को एक सीट पर जीत मिली थी. जबकि राज्य की तीन सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवारों को जीत मिली थी.
गुजरात में इस बार क्या क्या मुद्दा है?
परंपरागत रूप से, गुजरात में दो मुख्य दलों भाजपा और कांग्रेस के बीच एक प्रतियोगिता रही है, लेकिन इस बार आम आदमी पार्टी और असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी भी चुनावी लड़ाई में प्रवेश कर रही है, जो दो मुख्य दलों की गणितीय समीकरण को गड़बड़ा सकती हैं. हालांकि कई राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि गुजरात में मुख्य लड़ाई बीजेपी और कांग्रेस के बीच ही होगी.
वैसे दिलचस्प यह भी है कि इन दिनों भारत जोड़ो की यात्रा कर रहे राहुल गांधी की इस यात्रा में ना तो गुजरात शामिल है और ना ही हिमाचल प्रदेश. अभी यह भी तय नहीं है कि वे इन दोनों राज्यों में चुनाव प्रचार करेंगे भी या नहीं. वहीं दूसरी ओर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सरकार में 'नंबर दो' माने जाने वाले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का गृह राज्य गुजरात ही है और ऐसे में गुजरात विधानसभा चुनाव में उनकी प्रतिष्ठा भी दांव पर होगी.
यह चुनाव मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के आधे साल के कार्यकाल के लिए भी जनादेश होगा. कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल होकर उपचुनाव में हारने वाले अल्पेश ठाकोर का राजनीतिक भविष्य और हार्दिक पटेल के भविष्य का फैसला भी इसी चुनाव में होगा.
वडगाम से निर्दलीय विधायक दलित नेता जिग्नेश मेवाणी पहले ही कांग्रेस में शामिल होने की घोषणा कर चुके हैं, ऐसे में उनकी भूमिका की भी परीक्षा होगी. देखना होगा कि उनका आरक्षित सीटों पर क्या असर पड़ता है और साथ ही वडगाम सीट पर ओवैसी और केजरीवाल... मेवाणी के लिए क्या परेशानी खड़ी करते हैं.
ये भी पढ़ें:
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)