You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
हिजाब विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में कर्नाटक सरकार ने क्या-क्या दलीलें दीं
- Author, सुचित्र मोहंती
- पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए
हिजाब विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई में मंगलवार को कर्नाटक सरकार की ओर से दलीलें पेश की गईं. कर्नाटक सरकार ने कहा कि 2004 से कोई भी हिजाब नहीं पहन रहा था. लेकिन 2022 में पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया ने सोशल मीडिया में हिजाब पहनने को लेकर आंदोलन शुरू कर दिया.
कर्नाटक सरकार की ओर से दलीलें पेश कर रहे सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने कहा,'' 2004 से कोई भी हिजाब नहीं पहन रहा था, लेकिन दिसंबर 2021 में अचानक छात्राएं इसे पहन कर कॉलेज आने लगीं. 2022 में पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया ने सोशल मीडिया पर हिजाब पहनने के लिए सोशल मीडिया पर आंदोलन शुरू कर दिया. ''
उन्होंने कहा,''ये स्टूडेंट्स की ओर से अचानक शुरू किया गया आंदोलन नहीं था. ये छात्र-छात्राएं एक बड़ी साजिश का हिस्सा थे. ये लोग किसी के इशारे पर काम कर रहे थे.''
तुषार मेहता ने कहा कि हिजाब अनिवार्य धार्मिक परंपरा नहीं है. उन्होंने पूछा, यूनिफॉर्म का मकसद क्या है. यूनिफॉर्म एकरूपता और समानता के लिए होता है.''
हिजाब विवाद की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस हेमंत गुप्ता और जस्टिस सुधांशु धूलिया की बेंच कर रही है. हिजाब विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को आठवें दिन सुनवाई हुई. इसके बाद कोर्ट ने सुनवाई बुधवार तक के लिए स्थगित कर दी.
कर्नाटक सरकार ने कहा, ईरान में हिजाब का विरोध हो रहा है
तुषार मेहता ने कहा कि वह किसी समुदाय की आलोचना नहीं कर रहे हैं. लेकिन कुछ देशों में महिलाओं को गाड़ी चलाने का अधिकार नहीं है. ईरान में एक महिला पायलट हैं. लेकिन वो जिस गाड़ी में घर जाती हैं उसे उनके पति चलाते हैं.
उन्होंने कहा कि कई देश ऐसे हैं, जो संवैधानिक तौर पर इस्लामी हैं, लेकिन महिलाएं वहां हिजाब का विरोध कर रही हैं. जब बेंच ने पूछा कि ऐसा किस देश में हो रहा है तो मेहता ने जवाब दिया कि ईरान में ये हो रहा है.
मेहता ने बेंच से कहा कि उनके लिए ये धर्म का मामला बिल्कुल नहीं है. यह बच्चों के बीच एक समान व्यवहार का मामला है.
कर्नाटक के एडवोकेट पी नवाडगी ने बेंच से कहा कि धर्म के हर पहलू की हिफाजत करना व्यावहारिक तौर पर असंभव है. इसलिए धर्म की अनिवार्य परंपराओं का उदय हुआ है.
उन्होंने कहा,'' धार्मिक मामलों और सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक मामलों में अंतर होता है. इसका राज्य नियमन कर सकता है. राज्य ये नहीं कह सकता कि कौन-सी पूजा की जाए, लेकिन यह प्रशासन का नियमन कर सकता है. ''
क्या है मामला?
कर्नाटक के हिजाब विवाद पर मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में आठवें दिन की सुनवाई हो रही थी. दरअसल कर्नाटक हाई कोर्ट ने इस साल मार्च में मुस्लिम छात्राओं की उस याचिका को खारिज कर दिया था जिसमें उन्होंने उडुपी के प्री यूनिवर्सिटी कॉलेज में हिजाब पहनकर आने की मांग की थी.
कर्नाटक हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस रितुराज अवस्थी की अगुआई वाली बेंच ने इस याचिका को खारिज करते हुए फैसला दिया था कि हिजाब इस्लाम में अनिवार्य धार्मिक परंपरा नहीं है. इसलिए यह मामला भारत के संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत नहीं आता है.
कर्नाटक हाई कोर्ट ने ये भी कहा था कि स्कूल यूनिफॉर्म की सिफारिश सिर्फ एक वाजिब प्रतिबंध है. इसे संवैधानिक मंजूरी मिली हुई है. स्टूडेंट्स इसका विरोध नहीं कर सकते. कोर्ट ने कहा था कि सरकार को यह अधिकार है कि वह इस तरह का नोटिस (यूनिफॉर्म अनिवार्य बनाने का) जारी कर सकती है. सरकार के इस तरह के नोटिफिकेशन के खिलाफ़ कोई मामला दर्ज नहीं कराया गया है.
याचिका में क्या कहा गया है?
बहरहाल, 15 मार्च 2022 को कर्नाटक हाई कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ़ सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएं दायर की गई हैं. कर्नाटक हाई कोर्ट के फैसले में राज्य सरकार के उस आदेश का समर्थन किया गया है जिसमें याचिकाकर्ताओं और दूसरी मुस्लिम छात्राओं को प्री यूनिवर्सिटी कॉलेज में हिजाब पहन कर आने से रोका गया था.
कर्नाटक हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस रितुराज अवस्थी, जस्टिस कृष्णा दीक्षित और जस्टिम जेएम काजी की फुल बेंच ने अपने फैसले में कहा था कि महिलाओं का हिजाब पहनना इस्लाम की अनिवार्य धार्मिक परंपराओं में शामिल नहीं है.
इसी फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है. इसमें कर्नाटक हाई कोर्ट के फैसले को दरकिनार कर शिक्षण संस्थाओं में हिजाब को अनुमति देने की मांग की गई है.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)