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चंडीगढ़ वायरल वीडियो विवाद: ज़रा सी सावधानी कर सकती है निजता की सुरक्षा
- Author, टीम बीबीसी हिन्दी
- पदनाम, नई दिल्ली
शनिवार देर रात चंडीगढ़ के नज़दीक मोहाली में एक निजी विश्वविद्यालय की लड़कियों का प्राइवेट वीडियो वायरल होने का विवाद बढ़ता जा रहा है. शनिवार तक विश्वविद्यालय कैंपस को छात्रों के लिए बंद कर दिया गया है. विश्वविद्यालय प्रशासन ने गर्ल्स हॉस्टल की वॉर्डन को भी निलंबित कर दिया है.
पुलिस के मुताबिक़, इस मामले में अब तक तीन लोगों की गिरफ़्तारी की गई है जिसमें अभियुक्त लड़की और शिमला में रहने वाला उसका एक दोस्त शामिल है.
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में यूनिवर्सिटी की एक लड़की यह स्वीकार करती हुई दिखाई दे रही है कि उसने नहाते समय साथी लड़कियों का वीडियो बनाया था.
मामला सामने आने के बाद इस बात पर बहस तेज़ हो गई है कि कैसे महिलाएं इस तरह के ऑनलाइन क्राइम और निजता के हनन से ख़ुद को बचाएं. अपनी तरफ़ से भी कुछ सावधानियां बरतकर महिलाएं इन समस्याओं से बच सकती हैं.
इस बारे में साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ जितेन जैन सोशल मीडिया पर एक्टिव रहते समय कुछ बातों का ख़्याल रखने की सलाह देते हैं. इनके बारे में हम यहां बता रहे हैं-
क्या करें, क्या न करें
- सबसे पहले तो सोशल मीडिया पर अपनी निजी तस्वीरें/वीडियो डालने से बचें. उनका कोई भी इस्तेमाल कर सकता है
- अपने प्राइवेट पलों में रहते हुए कोशिश करें कि किसी को इसे फ़िल्माने की इजाज़त ना दें
- अगर फिर भी आप तस्वीरें डालना चाहते हैं तो अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर अपनी प्राइवेसी सेटिंग्स को पब्लिक न करें
- सेटिंग्स ऐसी रखें कि आपकी फ़ोटो आपके दोस्त या आपसे जुड़े हुए लोग ही देख पाएं. अनजान लोग उन तक न पहुंचें.
- ट्विटर पर ऐसी सेटिंग्स की जा सकती है कि आपकी अनुमति के बिना लोग आपको फ़ॉलो न कर सकें. लेकिन, अमूमन लोग ऐसा करते नहीं हैं. सेटिंग्स को ज़्यादा निजी करके आपका अकाउंट ज़्यादा सुरक्षित रह सकता है.
निजी वीडियो सोशल मीडिया पर आए तो क्या करें
सुप्रीम कोर्ट के वकील विराग गुप्ता बताते हैं कि आईपीसी की धारा 354C और आईटी एक्ट 66Eई के तहत इस मामले में एफ़आईआर दर्ज की गई है.
- आईटी ऐक्ट 66ई कहता है कि अगर कोई किसी व्यक्ति की निजी तस्वीर इरादतन खींचता है और उसे पब्लिश या ट्रांसमिट करता है तो उसे तीन साल तक की जेल और दो लाख रुपये तक का फ़ाइन भरना पड़ सकता है.
- अगर किसी व्यक्ति का कोई भी निजी वीडियो सामने आता है तो सबसे पहले इसकी एफ़आईआर दर्ज कराएं.
- जिस प्लेटफ़ॉर्म पर ये वीडियो फैलाया जा रहा है उस प्लेटफ़ॉर्म से भी वीडियो या तस्वीर हटाने की अपील की जा सकती है. इन कंपनियों के ग्रिवांस रिड्रेसल सिस्टम होते हैं जहां वीडियो हटाने की अपील की जा सकती है, लेकिन उस पर कितनी देर में ऐक्शन होगा इसे लेकर कोई तय फ़्रेमवर्क नहीं है. कुछ मामलों में केंद्र सरकार चार घंटे के भीतर कोई वीडियो या तस्वीर हटा सकती है, कुछ मामलों में 48 घंटे लगते हैं तो किसी मामले में महीने तक का वक्त लगता है.
साल 2020 में 'ब्वॉयज़ लॉकर रूम' विवाद के समय आरएसएस विचारक केएन गोविंदाचार्य ने दिल्ली हाईकोर्ट में एक याचिका दायर करते हुए कहा था कि "फे़क न्यूज़ और आपराधिक कंटेंट से निपटने में फे़सबुक जैसे सोशल मीडिया ऐप नाकाम साबित हुए हैं. इन कंपनियों को अपने स्थानीय शिकायत अधिकारी की जानकारी देनी चाहिए ताकि उनसे सीधे संपर्क किया जा सके."
हालांकि इस याचिका के जवाब में फे़सबुक ने कहा था कि "ब्वॉज़ लॉकर रूम जैसे ग्रुप फे़सबुक नहीं हटा सकता क्योंकि ये आईटी ऐक्ट के अंतर्गत केंद सरकार के विवेकाधीन शक्तियों के अधीन आता है."
ऐसे में ये कंपनियां कोई कंटेंट या अकाउंट तभी हटाती हैं जब इसके लिए केंद्र सरकार की ओर से कहा जाए या कोर्ट का आदेश हो.
कैसे पता करें फ़ेक अकाउंट
अक्सर ऐसा भी होता है कि किसी फ़ेसबुक अकाउंट में लड़की की तस्वीर लगी होती है, लेकिन वो अकाउंट किसी लड़के ने बनाया होता है. इसी तरह नकली नाम और तस्वीर के साथ भी फ़ेसबुक अकाउंट बना होता है.
जितेन जैन बताते हैं, "ऐसे अकाउंट का पता लगाने के लिए कुछ बातों पर ध्यान देना ज़रूरी है. किसी भी फ़्रेंड रिक्वेस्ट को स्वीकार करने से पहले सामने वाले का अकाउंट अच्छी तरह देख लें."
जितेन जैन के मुताबिक, "ऐसे नकली अकाउंट में अक्सर सारी फ़ोटो उसी दिन डली हुई होती हैं. वो सिर्फ़ तीन-चार ग्रुप्स से जुड़ा होता है और 10-15 दोस्त होते हैं. कई बार ऐसे अकाउंट में अलग-अलग लड़कियों की तस्वीरें होती हैं. तस्वीरें आपत्तिज़नक तक हो सकती हैं."
जितेन जैन कहते हैं कि ऐसा भी होता है कि प्रोफ़ाइल पिक किसी लड़की की होती है, लेकिन गैलरी में उसकी एक भी तस्वीर नहीं होती और न कोई पोस्ट होता है. इस तरह के अकाउंट से बचना ही चाहिए.
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