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नेवी के नए और पुराने ध्वज की कहानी, चार बार हुए बदलाव
भारत का पहला स्वदेशी विमानवाहक पोत (आईएनएस) विक्रांत आज भारतीय नौसेना का हिस्सा बन गया है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केरल के कोच्चि में आईएनएस विक्रांत को देश को समर्पित किया. भारतीय नौसेना का अंग बनते ही विक्रांत के नाम के आगे आईएनएस शब्द जुड़ गया है.
45 हज़ार टन वजन वाले इस युद्धपोत को 20 हज़ार करोड़ रुपये की लागत से बनाया गया है. इसका डेक फुटबॉल के दो मैदान के बराबर है. इस पर एकसाथ 30 फ़ाइटर प्लेन और हेलिकॉप्टर तैनात किए जा सकते हैं.
इस जहाज को आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत बनाया गया है. इस जंगी जहाज़ की 76 प्रतिशत चीज़ें भारत में बनी हैं. इन्हें क़रीब 500 भारतीय कंपनियों ने बनाया है.
सरकार के मुताबिक पिछले 13 सालों में जहाज़ बनाने के क्षेत्र में क़रीब 15000 नौकरियां आई हैं. इसके अंदर 2300 कंपार्टमेंट हैं और ये 262 मीटर लंबा और 60 मीटर ऊंचा जहाज़ है.
दूसरे चरण में देरी हुई
भारत के पहले एयरक्राफ़्ट कैरियर का नाम भी विक्रांत था. उसे ब्रिटेन की रॉयल नेवी से ख़रीदा गया था और 1961 में कमीशन किया गया था. 1997 में आइएनएस विक्रांत को डिकमीशन (सेना की सेवा से हटा दिया गया था) कर दिया गया. इसने कई मिलिट्री ऑपरेशन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी.
नए विक्रांत की बात करें तो इसमें 1700 लोग काम करेंगे. हालांकि, अभी इसमें 2000 और लोग भी काम कर रहे हैं - वो टेक्नीशियन जो केबल वगैरह ठीक कर रहे हैं, पॉलिश कर रहे हैं या इंटीरियर का काम कर रहे हैं.
विक्रांत के आने से भारत के पास अब दो कैरियर हो जाएंगे.
सबसे पहले सरकार ने इस जहाज़ के लिए जनवरी 2003 में मंज़ूरी दी थी. साल 2007 में पहला कॉन्ट्रैक्ट साइन होने के बाद काम शुरू हुआ. लेकिन जहाज़ बनने के दूसरे चरण में देरी हुई, ख़ासतौर पर तब जब इसमें हथियार और प्रोपल्शन सिस्टम और रूस से आए एविएशन कॉम्प्लेक्स लगाने थे. इस जहाज को बनाने में 13 साल लगे हैं.
नौसेना को मिला नया ध्वज
आईएनएस विक्रांत के साथ-साथ भारतीय नौसेना को नया ध्वज भी दिया गया है. अनावरण के कार्यक्रम में नौसेना के नए ध्वज को भी सार्वजनिक किया गया. भारतीय नौसेना के औपनिवेशिक अतीत को ख़त्म करने की कोशिश के तहत इस निशान को बदला गया है.
इस कार्यक्रम में छत्रपति शिवाजी महाराज को याद करते हुए पीएम मोदी ने कहा, "छत्रपति वीर शिवाजी महाराज ने इस समुद्री सामर्थ्य के दम पर ऐसी नौसेना का निर्माण किया, जो दुश्मनों की नींद उड़ाकर रखती थी. जब अंग्रेज़ भारत आए, तो वो भारतीय जहाजों और उनके जरिए होने वाले व्यापार की ताक़त से घबराए रहते थे."
उन्होंने कहा, "अब तक भारतीय नौसेना के ध्वज पर गुलामी की पहचान बनी हुई थी. लेकिन अब आज से छत्रपति शिवाजी से प्रेरित नौसेना का नया ध्वज समंदर और आसमान में लहराएगा.''
पीएम मोदी के अनुसार, "आज 2 सितंबर, 2022 की ऐतिहासिक तारीख़ को, इतिहास बदलने वाला एक और काम हुआ है. आज भारत ने गुलामी के एक निशान गुलामी के एक बोझ को अपने सीने से उतार दिया है."
चार बार बदला गया पुराना झंडा
भारतीय नौसेना का पुराना झंडा भारत में अंग्रेज़ी शासन के दौर में बनाया गया था. हालांकि, इसमें बदलाव हुए और इसके बाद झंडे में अशोक चिह्न भी जोड़ा गया.
पुराने झंडे में सफेद रंग के आधार पर लाल रंग का सेंट जॉर्ज क्रॉस बना हुआ था. इसके बाईं तरफ़ भारत का झंडा बना हुआ था. क्रॉस के बीच में अशोक चिह्न बना था जिसके नीचे सत्यमेव जयते लिखा हुआ था.
ये क्रॉस का निशान सेंट जॉर्ज के नाम पर पड़ा है. सेंट जॉर्ज के लिए कहा जाता है कि वो एक बड़े धर्मयोद्धा थे जिन्होंने धर्म के लिए ही अपनी जान दे दी. उनका जन्म तीसरी सदी (ईसा के जन्म के बाद) में बताया जाता है. वो रोम की सेना में योद्धा थे लेकिन ईसाई धर्म में उन्हें संत की उपाधि मिली है.
नौसेना के झंडे को पहले भी चार बार बदला गया है. पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, मनमोहन सिंह की सरकार और मौजूदा सरकार में भी इसमें बदलाव हुए हैं.
सबसे पहले भारत के आज़ाद होने के बाद 26 जनवरी 1950 को नौसेना के झंडे को बदला गया था. इसमें पहले सेंट जॉर्ज क्रॉस के साथ बाईं तरफ़ ब्रिटेन का झंडा बना हुआ था जिसे हटाकर भारत का झंडा लगाया गया.
इसके बाद साल 2001 में वाजपेयी सरकार में इस झंडे से सेंट जॉर्ज क्रॉस हटा दिया गया था. इसके बदले नीले रंग में अशोक चिह्न के नीचे एक एंकर बना हुआ था. लेकिन, अप्रैल 2004 में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के नेतृत्व में यूपीए सरकार के आने के बाद इसमें बदलाव किया गया.
ये शिकायत भी थी कि नीला रंग आसमान और समुंद्र के रंग से अलग नहीं दिखता है. इसके बाद नौसेना के झंडे में सेंट जॉर्ज क्रॉस की फिर से वापसी हुई. लेकिन, इस बार क्रॉस के बीच में अशोक चिह्न बना दिया गया.
साल 2014 में बीजेपी की सरकार आने के बाद झंडे में एक और बदलाव हुआ और अशोक स्तंभ के नीचे सत्यमेव जयते लिखवाया गया.
कैसा है नया झंडा?
नए निशान से लाल रंग के सेंट जॉर्ज क्रॉस को हटा दिया गया है. अब ऊपर बाईं ओर तिरंगा बना है. हालांकि, झंडे का आधार सफेद रंग का ही रखा गया है जो नौसेना के अलावा पूरे भारत को सांकेतिक रूप से सम्मिलित करता है.
दाहिनी ओर नीले रंग के बैकग्राउंड वाले एक अष्टकोण में सुनहरे रंग का अशोक चिह्न बना है. अष्टकोण की परिधि पर सुनहरे रंग के दो बॉर्डर भी बने हैं.
इसके नीचे 'सत्यमेव जयते' लिखा हुआ है और एक एंकर बना हुआ है. असल में यह छत्रपति शिवाजी महाराज की शाही मुहर है.
इन सबके नीचे संस्कृत में 'शं नो वरुणः' यानी 'जल के देवता वरुण हमारे लिए शुभ हों.'
इसका अष्टकोण आठ दिशाओं का संकेत देते हैं जिससे भारतीय नेवी की वैश्विक पहुंच को बताता है.
कॉपी - कमलेश मठेनी
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