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कर्नाटक: लिंगायत मठ के स्वामी पर यौन शोषण के आरोप- पूरा मामला
- Author, इमरान कुरैशी
- पदनाम, बेंगलुरू से, बीबीसी हिंदी के लिए
कर्नाटक के सबसे ताकतवर लिंगायत स्वामियों में से एक डॉ. शिवमूर्ति मुरुगा शरणरु के खिलाफ दो नाबालिग लड़कियों के कथित यौन शोषण का मामला दर्ज किया गया है.
अब उनके खिलाफ अनुसूचित जाति, जनजाति अत्याचार निरोधक कानून के प्रावधान भी जोड़ दिए गए हैं.
स्वामी शिवमूर्ति पर चार दिन पहले पोक्सो के तहत मैसुरू में एफआईआर दर्ज कराई गई थी.
इसके बाद मंगलवार को कथित यौन हिंसा के शिकार दो लड़कियों ने उनके खिलाफ सीआरपीसी की धारा 164 तहत मजिस्ट्रेट के सामने बयान दर्ज कराए.
उनके खिलाफ अनुसूचित जाति, जनजाति अत्याचार निरोधक कानून के तहत भी केस दर्ज किया गया.
इस केस को मैसुरू से चित्रदुर्ग ट्रांसफर कर दिया गया है. चित्रदुर्ग में ही मुरुगा स्वामी का मठ है.
केस ट्रांसफर करने के बाद कथित यौन शोषण की शिकार एक लड़की ने महिला और बाल कल्याण विभाग से कहा कि वह अनुसूचित जाति समुदाय से आती है.
चित्रदुर्ग के एसपी के परशुराम ने बीबीसी हिंदी से कहा कि कथित यौन हिंसा की शिकार लड़कियों में से एक ने कहा था कि वह अनुसूचित जाति से ताल्लुक रखती है, लिहाजा मठ के गुरु के खिलाफ अनुसूचित जाति, जनजाति अत्याचार निरोधक कानून के तहत धाराएं लगाई गई हैं.
'स्वामीजी के खिलाफ आरोप बेबुनियाद'
मठ के वकील एनबी विश्वनाथन ने बीबीसी हिंदी से कहा,'' स्वामीजी के खिलाफ जो आरोप लगाए जा रहे हैं वे बेबुनियाद हैं. ''
स्वामीजी के खिलाफ जो शिकायत दर्ज कराई गई है उसमें कहा गया है कि वह अपने मठ के होस्टल में रहने वाली हाई स्कूल की छात्राओं का यौन शोषण करते थे.
यौन शोषण की कथित शिकार दोनों लड़कियां क्रमश: 15 और 16 साल की उम्र की हैं. दोनों मठ के स्कूल में पढ़ती थीं. जांच अधिकारियों ने छात्रावास में रहने वाली और लड़कियों से भी पूछताछ की है.
कर्नाटक के दूसरे मठों की तरह ही मुरुगा मठ भी अपने चित्रदुर्ग स्थित मुख्यालय से 150 आध्यात्मिक और शैक्षणिक संस्थाएं चलाता है.
लिंगायत 12वीं सदी के समाज सुधारक वासवन्ना के अनुयायी हैं. कर्नाटक की कुल आबादी में लिंगायत 17 फीसदी हैं.
कथित यौन शोषण से जुड़े इस मामले में डॉ. शिवमूर्ति मुरुगा शरणरु की अग्रिम जमानत पर चित्रदुर्ग के सेशन कोर्ट में 1 सितंबर को सुनवाई होगी.
शिकायत दर्ज कराने में इतना समय क्यों लगा?
मैसुरू के एनजीओ ओडांडी सेवा समस्ते के मुताबिक कथित यौन शोषण की शिकार दोनों नाबालिग लड़कियों ने पहले चित्रदुर्ग में शिकायत दर्ज कराने की कोशिश की और फिर वे बेंगलुरू की ओर चल पड़ीं.
ओडांडी सेवा समस्ते के संस्थापकों में से एक परशुराम एमएल ने बीबीसी हिंदी को बताया, '' लेकिन दोनों जगह उनकी कोशिश नाकाम रही. इसके बाद दोनों अपने-अपने घर लौट गईं. लेकिन उनके माता-पिता को उनका दर्द तब समझ में आया जब वे रात को नींद में चिल्ला कर उठने लगीं. इसके बाद उन्होंने स्कूल लौटने से मना कर दिया. ''
इसके बाद मैसुरू के नज़ाराबाद पुलिस को बाल विकास और संरक्षण अधिकारी ने शिकायत की.
इस शिकायत के बाद मठ के स्वामीजी और अन्य के खिलाफ पोक्सो एक्ट की धारा 5 ( सहवास की कोशिश) के अलावा आईपीसी की धारा 376 (सी) (एन) (एक ही महिला से बार-बार बलात्कार) धारा 376 (3) (16 से कम उम्र की लड़की से रेप) और धारा 149 (गैरकानूनी जमावड़ा) केस दर्ज किया गया.
हॉस्टल के वार्डन के समेत पांच लोगों के खिलाफ एफआईआर की गई है. केस को मैसुरू ट्रांसफर कर दिया गया क्योंकि कथित घटना चित्रदुर्ग में हुई थी.
कथित यौन हिंसा मामले में केस दर्ज किए जाने के बाद चित्रदुर्ग पुलिस ने मठ के प्रशासनिक अधिकारी एसके बासवराजन के खिलाफ यौन हिंसा दुर्व्यवहार के आरोप में शिकायत दर्ज की.
उनकी पत्नी इस कथित अपराध में सह अभियुक्त बनाई गई हैं. बासवराजन जनता दल-एस के पूर्व विधायक हैं और उनकी पत्नी सौभाग्य पूर्व ज़िला पंचायत अध्यक्ष.
मठ में रहने वाली एक लड़की ने ये आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई थी कि बासवराजन 27 जुलाई को शाम छह बजे लड़कियों के छात्रावास गए थे.
लड़की की शिकायत में कहा गया है, '' बासवराजन ने मेरा बलात्कार करने की कोशिश की, मैंने इसका विरोध किया. इससे वो बेहद गुस्सा हो गए और उन्होंने मुझे मार डालने की धमकी दी. ''
लड़की ने आरोप लगाया कि बासवराजन ने उनका यौन उत्पीड़न इसलिए किया क्योंकि वो दोनों लड़कियों को हॉस्टल से बाहर ले जाने की कोशिश कर रहे थे और लड़की ने इस पर सवाल उठाए थे.
इस मामले में आईपीसी की धारा 354 ए ( महिला की गरिमा के साथ छेड़छाड़) धारा 506 (अपराध की नीयत से रोकना) और धारा 504 (व्यक्ति का जानबूझ कर अपमान करना) के तहत भी मामला दर्ज कराया गया है.
स्वामीजी और राजनीति
इस मामले के सामने आने के फ़ौरन बाद पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा ने स्वामीजी ने खुलकर स्वामी का समर्थन किया. उन्होंने कहा, '' ये स्वामीजी के खिलाफ साज़िश है. उनके खिलाफ लगाए गए आरोप में कोई सच्चाई नहीं है. जांच के बाद सच सामने आ जाएगा. ''
हालांकि मुख्यमंत्री बासवराज बोम्मई ने कहा है कि सच का पता जांच के बाद ही चलेगा.
उधर, डॉ. शिवमूर्ति मुरुगा शरणरु ने मठ के अनुयायियों से कहा है कि वे इन आरोपों से घबराएं नहीं. उन्होंने कहा, '' ये मेरी छवि धूमिल करने के लिए रची गई साजिश है''. उन्होंने कहा कि वो जांच में पुलिस का पूरा सहयोग करेंगे.
स्वामीजी ने कांग्रेस सरकार का उस वक्त समर्थन किया था जब उसने लिंगायतों के धर्म को अलग धर्म घोषित करने का प्रस्ताव किया था. पिछले महीने उन्होंने राहुल गांधी को दीक्षा दी थी.
मुरुगा मठ उन मठों में से एक है जो समाज सुधारक संत भगवान बसवेश्वर के सुधारवादी आंदोलन के बताए मार्गों पर चलता है. बसवेश्वर ब्राह्मणवाद और वैदिक कर्मकांडों के खिलाफ विद्रोह किया था.
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