You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
बिलकिस बानो के पति बोले- 'एक बार फिर बढ़ गया है हमारा डर'
- Author, रॉक्सी गागडेकर छारा
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
गुजरात में 2002 में हुए दंगों के दौरान बिलकिस बानो से सामूहिक बलात्कार किया गया था. बिलकिस के परिवार के सात सदस्यों की भी हत्या कर दी गई थी. अब इस मामले में सज़ा काट रहे सभी 11 दोषियों को रिहा कर दिया गया है.
गुजरात सरकार की माफ़ी नीति के तहत मिली रिहाई पर बिलकिस बानो के पति याक़ूब रसूल आश्चर्य जता रहे हैं.
बीबीसी से बातचीत में वो कहते हैं कि इतनी लंबी लड़ाई लड़ने के बाद उनके परिवार का जो डर कम हुआ था वो डर एक बार फिर बढ़ गया है.
याक़ूब का दावा है कि दोषियों को रिहा करने से पहले उनके परिवार को किसी भी तरह की कोई जानकारी नहीं दी गई. वो कहते हैं, ''कल हमें मीडिया के माध्यम से ये पता चला है, हम ख़ुद चौंक गए कि ये क्या हो गया.''
याक़ूब बताते हैं, ''ये ख़बर सुनते ही बिलकिस सोचने लगीं कि ये कैसे हो गया, वो थोड़ी अपसेट हो गईं.''
'हम शांति से ज़िंदगी जीना चाहते हैं'
याक़ूब कहते हैं कि उनका परिवार शांति से ज़िंदगी जीना चाहता है.
वो कहते हैं, ''हमें शांति से ज़िंदगी जीना है, पहले भी ये लोग जब परोल पर छूटकर आते थे तब भी डर रहता था, अब ये डर ज़्यादा बढ़ गया है. हम ज़्यादा कुछ कहना नहीं चाहते क्योंकि हमें पता ही नहीं कि वो लोग किस तरह से छूटे हैं. हम अपना परिवार खो चुके हैं. हम रोज़ परिजनों को याद करते हैं, तीन साल की बेटी हमने खोई, हम लोग रोज़ उसके लिए दुआएं करते हैं. अब हम सोच रहे थे कि हम चैन-सुकून से रह लेंगे. लेकिन अब...''
अब आगे क्या?
बीबीसी से बातचीत में याक़ूब ने अपने अगले क़दम के बारे में कुछ साफ़ नहीं किया. उनका कहना है कि उन्हें कोई नोटिस नहीं मिली है.
कई सालों की लड़ाई के बाद बिलकिस बानो और उनके परिवार को इंसाफ़ मिला था, लेकिन याक़ूब ये भी बताते हैं कि अब भी उनका परिवार एक जगह ज़्यादा दिन नहीं टिकता है, उन्हें कई वजहों से घर बदलना पड़ता है.
सुप्रीम कोर्ट ने 2019 में बिलकिस बानो को दो सप्ताह के भीतर 50 लाख रुपये मुआवज़ा, घर और नौकरी देने का आदेश दिया था.
नौकरी के आदेश पर याक़ूब कहते हैं, ''वो लोग बिलकिस के नाम पर जॉब देने का आदेश दे रहे थे. लेकिन उन्हें बच्चों को संभालना है और बाकी दूसरी चीज़ें करनी है. हमने कहा है कि बिलकिस की जगह मुझे जॉब दे दें क्योंकि उन्होंने (बिलकिस) इतना टाइम निकाला है और अब डर भी है. लेकिन अभी तक इस पर (जॉब) कोई समाधान नहीं निकला है.''
बिलकिस बानो और उनके परिवार के साथ क्या हुआ था?
2002 के गुजरात दंगों के दौरान अहमदाबाद के पास रंधिकपुर गांव में एक भीड़ ने बिलकिस बानो के परिवार पर हमला किया था.
इस दौरान पांच महीने की गर्भवती बिलकिस बानो के साथ गैंगरेप किया गया. उनकी तीन साल की बेटी सालेहा की भी बेहरमी से हत्या कर दी गई. उस वक़्त बिलकिस क़रीब 20 साल की थीं.
इस दंगे में बिलकिस बानो की मां, छोटी बहन और अन्य रिश्तेदार समेत 14 लोग मारे गए थे.
इस मामले कि सुनवाई की शुरुआत अहमदाबाद में हुई थी, लेकिन सबूतों और गवाहों से छेड़छाड़ कीआशंका जताने पर मामले को साल 2004 में बॉम्बे हाई कोर्ट ट्रांसफ़र कर दिया गया था.
21 जनवरी 2008 को स्पेशल कोर्ट ने 11 लोगों को हत्या और गैंगरेप का दोषी मानते हुए उम्रक़ैद की सज़ा सुनाई थी. इस मामले में पुलिस और डॉक्टर सहित सात लोगों को छोड़ दिया गया था.
सीबीआई ने बॉम्बे हाई कोर्ट में दोषियों के लिए और कड़ी सज़ा की मांग की थी.
इसके बाद बॉम्बे हाई कोर्ट ने मई, 2017 में बरी हुए सात लोगों को अपना दायित्व न निभाने और सबूतों से छेड़छाड़ को लेकर दोषी ठहराया था.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)