You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
रीना वर्मा छिब्बर ने पाकिस्तान के पुश्तैनी मकान में बिताई रात, भारत आकर इतना कुछ कहा
"मेरा एक सपना था कि मैं एक बार अपना घर देखूं क्योंकि मैंने हमेशा हर किसी से कहा कि मेरा होमटाउन रावलपिंडी है. मैं उनका जितना शुक्रिया करूं उतना ही कम है. क्योंकि मेरे पास शब्द नहीं है इस एहसास को बयान करने के लिए."
ये शब्द रीना वर्मा छिब्बर के हैं. जो पाकिस्तान के रावलपिंडी में अपने पुश्तैनी घर में कुछ दिन रहकर भारत लौटी हैं. उन्होंने इस यात्रा में एक रात अपने उसी घर में सोकर बिताई जहाँ उनका बचपन बीता.
रीना उस घर में रहकर लौटी हैं, जिसे देखना भर उनके लिए एक सपना था. उस बालकनी में बचपन के वो गीत गाकर लौटी हैं, जो रह रहकर उन्हें याद आती हैं.
भारत के बँटवारे के 75 साल बाद पुणे की रहने वालीं रीना वर्मा छिब्बर पाकिस्तान के रावलपिंडी में 18 जुलाई को पहुंची थीं. उनकी ये तीर्थयात्रा उस घर में जाकर पूरी हुई जो रीना वर्मा के मुताबिक़ उनके पिता ने अपनी सारी ज़िंदगी की जमा पूँजी ख़र्च कर बनवाया था. रीना वर्मा हमेशा इस घर को फिर से देखने का सपना देखती रहीं थीं.
पाकिस्तान से भारत लौटने पर क्या कहा?
सोमवार को अटारी बॉर्डर के रास्ते रीना वर्मा छिब्बर ने भारत में वापसी की. उन्हें लेने के लिए उनके परिवार के लोग आए हुए थे. मीडिया से बात करते हुए उन्होंने बताया कि अपने पाकिस्तान में अपने घर लौटने के एहसास को शब्दों में बयान करना मुश्किल है.
उन्होंने कहा, "बहुत ही अच्छी फिलिंग है. मैं एक रात वहाँ अपने ही कमरे में सोकर आई हूँ. मुझे बहुत ज़्यादा मोहब्बत मिली है. इतनी ज़्यादा कि उसकी उम्मीद मुझे नहीं थी."
रीना वर्मा से पूछा गया कि क्या वे पाकिस्तान से कोई याद लेकर आई हैं. इस सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि मैंने बहुत कोशिश की कि कोई चीज़ मिल पाए, लेकिन घर का कुछ था ही नहीं वहाँ पर.
बचपन की याद ताजा करते हुए उन्होंने कहा कि हमारे घर के अंदर अंगीठी बनती थी. उनके नीचे मेरे पिताजी ने डिजाइन बनाया था. उसके साथ एक तस्वीर खिंचवाई है.
रीना वर्मा ने बताया कि जब उन्होंने घर देखा तो पूरा समय उन्हें उनका परिवार ही याद आता रहा. "ऐसे लग रहा था जैसे मैं बचपन ही जी रही हूँ और मुझे अपने भाई बहन, माता-पिता सब वहीं नज़र आ रहे थे. अपने जैसा प्यार मिला, भारत और पाकिस्तान में कोई फ़र्क़ नहीं है."
रावलपिंडी में अपना घर देखकर रीना वर्मा भावुक हो गई थीं. उन्होंने घर के हर कमरे में जाकर उन दीवारों को देखा जो उन्होंने 75 साल पहले छोड़ी थीं. बचपन में वे अपना ज़्यादातर समय बालकनी में गीत गुनगुनाते हुए बिताती थीं. जब उन्होंने फिर से उस बालकनी को देखा तो वे भावुक हो गईं.
उन्होंने उसी बालकनी में कुछ वक़्त बिताया और वही गाना गाया जो वे बचपन में गुनगुनाया करती थीं.
सरकार से रीना वर्मा की अपील
उन्होंने भारत और पाकिस्तान सरकार से अपील की है कि लोगों को उनके पुश्तैनी मकान देखने के लिए मदद करनी चाहिए.
उन्होंने कहा कि 90 साल की उम्र के लोग बहुत कम रह गए हैं. जिन्होंने वहाँ पर थोड़ी भी ज़िंदगी गुज़ारी है, उनके लिए एक दूसरे के देश में जाना आसान करना चाहिए. 90 साल से ज़्यादा उम्र के सभी लोग यात्रा करने की स्थिति में भी नहीं है. अगर कोई जाना चाहता है तो उसकी मदद होनी चाहिए.
रीना वर्मा साल 1965 से पाकिस्तान के लिए वीज़ा पाने की कोशिश कर रही थीं. आख़िरकार इस साल वे अपनी इस कोशिश में सफल रहीं. भारत-पाकिस्तान हेरिटेज क्लब ने रीना वर्मा की मदद की.
पाकिस्तान के लोगों ने क्या कहा
रावलपिंडी लौटने पर उनका शानदार स्वागत हुआ. जब उन्होंने गली में क़दम रखा तो उन पर गुलाब के फूलों की बारिश की गई. स्थानीय लोगों ने 90 वर्षीय रीना वर्मा के साथ ढोल नगाड़ों पर डांस किया. वो इस स्वागत से अभिभूत थीं.
1947 में भारत-पाकिस्तान के बँटवारे से कुछ दिन पहले ही रीना वर्मा का परिवार रावलपिंडी के 'प्रेम निवास' इलाक़े को छोड़कर भारत पहुँचा था. अब इसे कॉलेज रोड कहा जाता है.
भारत-पाकिस्तान हेरिटेज क्लब के फ़ेसबुक पेज पर ज़ाहिर महबूब ने रीना वर्मा के साथ तस्वीरें डालते हुए उन्हें अलविदा कहा है.
उन्होंने लिखा, "अलविदा माँ जी, आप हमें बहुत याद आएंगी, आपके साथ जिस तरह का वक़्त गुज़रा है. यूं लगता है कि समय ठहर गया हो. आपकी बातें, आपकी सलाह, आपका प्यार और फिर कभी-कभी हल्का ग़ुस्सा और डांट, सब को बहुत याद करूंगा. काश हम ऐसे ही दोबारा मिल सकें."
ऐसा ही कुछ फ़ज़ल रहमान ख़ान ने उनके लिए लिखा है. उन्होंने लिखा कि रीना वर्मा की छोटी सी छात्रा लंबे समय तक याद रखी जाएगी. उनकी यात्रा ने उन लोगों के लिए रास्ते खोल दिए हैं जो भारत और पाकिस्तान में अपनी जन्मभूमि को देखने का बेसब्री से इंतज़ार कर रहे हैं.
फ़ज़ल रहमान खान ने लिखा, "दोनों देशों की सरकारों को ऐसे लोगों का दर्द महसूस करना चाहिए जो 75 साल के बाद भी अपने जन्म स्थान पर नहीं जा सके.
इसके अलावा नोशाबा शहज़ाद मसूद ने रीना वर्मा के पाकिस्तान से जाते हुए तस्वीरें शेयर करते हुए लिखा, "बाबुल की दुआएं लेती जा."
पाकिस्तानी मीडिया ने क्या कहा
भारत की तरह की पाकिस्तान की मीडिया में भी रीमा वर्मा की चर्चा ख़ूब चर्चा हुई. रावलपिंडी की अपनी यात्रा के दौरान पाकिस्तान का मीडिया उन्हें एक नज़र देखने के लिए उनके पुश्तैनी घर के बाहर खड़ा था.
पाकिस्तान की न्यूज़ वेबसाइट ट्रिब्यून ने रीना वर्मा के मरी हिल स्टेशन घूमने को कवर किया. शनिवार को मरी होटल ओनर्स एसोसिएशन के सदस्यों ने रीना वर्मा का गुलाब के फूलों के साथ स्वागत किया था.
मॉल रोड पर घूमते हुए उन्होंने पर्यटकों के साथ बातचीत की और कई लोगों ने उनके साथ सेल्फी भी क्लिक की.
न्यूज़ वेबसाइट के मुताबिक़ कुछ देर माल रोड पर टहलने के बाद रीना वर्मा जीपीओ चौंक भी गईं. इस मौक़े पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि मरी एक बहुत ही ख़ूबसूरत जगह है और सभी को यहाँ आना चाहिए.
इसके अलावा पाकिस्तान की न्यूज़ वेबसाइट डॉन ने भी रीना वर्मा की यात्रा पर काफ़ी कुछ लिखा. वेबसाइट के मुताबिक़ भारत-पाकिस्तान हेरिटिज क्लब के अलावा पाकिस्तान की विदेश राज्य मंत्री हिना रब्बानी खार ने उन्हें पाकिस्तान का वीज़ा दिलवाने में मदद की.
वापसी की कहानी
साल 2021 में पाकिस्तान के एक सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म पर जब रीना वर्मा का साक्षात्कार हुआ तो वो रातोरात सोशल मीडिया पर सनसनी बन गईं.
'इंडिया पाकिस्तान हेरिटेज क्लब' फ़ेसबुक ग्रुप से जुड़े लोगों ने रावलपिंडी में उनके पैतृक घर की तलाश शुरू कर दी और आख़िरकार एक महिला पत्रकार ने इस घर को खोज लिया. रीना वर्मा पाकिस्तान जाना चाहती थीं लेकिन कोविड महामारी की वजह से वो जा नहीं सकीं.
हालांकि इस साल मार्च में उन्होंने अंततः पाकिस्तान के वीज़ा के लिए आवेदन दिया और फिर बिना कोई कारण बताए ख़ारिज कर दिया गया.
रीना कहती हैं, "मैं टूट गई थी. मैंने ये उम्मीद नहीं की थी कि एक 90 वर्षीय महिला, जो सिर्फ़ अपने घर को देखना चाहती है, उसका वीज़ा रद्द कर दिया जाएगा. मैं ऐसा सोच भी नहीं सकती थी, लेकिन ऐसा हुआ."
रीना कहती हैं कि पाकिस्तान तब राजनीतिक अस्थिरता से गुज़र रहा था वो ये नहीं जान पा रहीं थीं कि आख़िर कैसे वीज़ा के लिए आवेदन करें.
हालांकि वो ये ज़रूर कहती हैं कि वो फिर से वीज़ा के लिए आवेदन देने की योजना बना चुकी थीं, लेकिन उनके दोबारा आवेदन करने से पहले ही उनकी कहानी पाकिस्तान की विदेश मंत्री हिना रब्बानी ख़ार तक पहुंच गई जिन्होंने दिल्ली में पाकिस्तान के दूतावास को रीना के वीज़ा की प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए.
रीना बताती हैं, "जब पाकिस्तान के दूतावास से मेरे पास फ़ोन आया तो मेरी खु़शी का ठिकाना ही नहीं रहा. उन्होंने मुझसे आने और वीज़ा हासिल करने के लिए कहा. कुछ ही दिन में ये सब हो गया." और आखिरकार 20 जुलाई को रीना रावलपिंडी के अपने पैतृक घर पहुंची.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)