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उद्धव ठाकरे ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पद से दिया इस्तीफ़ा
शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफ़ा दे दिया है.
बहुमत परीक्षण पर सुप्रीम कोर्ट का आदेश आने के कुछ वक़्त बाद सोशल मीडिया पर लाइव आकर ठाकरे ने कहा कि वो नहीं चाहते कि शिवसैनिकों का 'ख़ून बहे. इसलिए वो महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री का पद छोड़ रहे हैं.' ठाकरे ने कहा कि उन्हें 'पद छोड़ने का कोई दुख नहीं है.'
उद्धव ठाकरे ने कहा कि वो विधान परिषद की सदस्यता भी छोड़ रहे हैं.
इसके बाद वो राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी को इस्तीफ़ा देने राजभवन पहुंचे.
इसके पहले बुधवार रात करीब नौ बजे सुप्रीम कोर्ट ने बहुमत परीक्षण पर रोक लगाने से इनकार कर दिया.
महाराष्ट्र के राज्यपाल ने गुरुवार सुबह 11 बजे बहुमत परीक्षण के लिए कहा था.
उद्धव ठाकरे ने शिवसेना के बाग़ी विधायकों पर भी निशाना साधा.
उद्धव ठाकरे ने अपने संबोधन की शुरुआत महाविकास अघाड़ी गठबंधन के सदस्य दलों कांग्रेस और एनसीपी को धन्यवाद देने के साथ की. उन्होंने ढाई साल के कार्यकाल में सरकार की उपलब्धियों को गिनाया.
उद्धव ठाकरे ने अपने संबोधन में क्या-क्या कहा
- मैं कुर्सी छोड़ रहा हूं. पिछले बुधवार को ही मैंने वर्षा छोड़ दिया था और मातोश्री आ गया था. मुझे मुख्यमंत्री पद छोड़ने का कोई दुख नहीं है.'
- जब कुछ अच्छा हो रहा होता है तो नज़र तो लगती ही है.
- जिन लोगों को बाला साहब ठाकरे ने बड़ा बनाया, जिन सामान्य लोगों को बाला साहेब ठाकरे और शिवसेना ने बड़ा बनाया, वे आज उन्हें भूल गए हैं.
- सुप्रीम कोर्ट ने आज जो भी फ़ैसला दिया है, हम उसका सम्मान करते हैं और उसका पालन करेंगे.
- बाग़ी विधायकों को अगर कोई शिकायत थी तो सूरत या गुवाहाटी के बजाय मातोश्री आकर अपनी बात रखनी चाहिए थी.
- शिवसेना हमसे कोई छीन नहीं सकता.
- शिवसैनिकों से अनुरोध है कि बाग़ी विधायकों के ख़िलाफ़ कोई प्रदर्शन ना करें.
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फ़ैसले में क्या कहा
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को महाराष्ट्र में जारी सियासी संग्राम पर अहम फ़ैसला देते हुए कहा है कि विधानसभा में फ़्लोर टेस्ट नहीं रोका जाएगा.
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस सूर्य कांत और जेबी पार्डीवाला की अवकाश पीठ ने शिवसेना नेता सुनील प्रभू की याचिका पर सुनवाई के बाद ये फ़ैसला दिया.
महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने बुधवार को आदेश जारी कर 30 जून की सुबह 11 बजे विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया था.
इसका उद्देश्य उद्धव ठाकरे सरकार का शक्ति परीक्षण था.
शिव सेना नेता सुरेश प्रभू ने राज्यपाल के इसी फ़ैसले को चुनौती देने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की.
प्रभू ने अपनी याचिका में कहा था कि राज्यपाल द्वारा फ़्लोर टेस्ट कराने का फ़ैसला ग़ैर-कानूनी है क्योंकि उन्होंने इस पर ध्यान नहीं दिया कि डिप्टी स्पीकर ने 39 में से 16 विधायकों को अयोग्यता नोटिस जारी किया गया है.
प्रभू ने ये भी कहा है कि 39 में से किसी भी विधायक ने महाविकास अगाड़ी सरकार से अपना समर्थन वापस नहीं लिया है.
सिंघवी ने कोर्ट से क्या कहा?
महाविकास अघाड़ी सरकार की ओर से वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने अदालत में पक्ष रखा.
सिंघवी ने राज्यपाल के फ़ैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब विधायकों की अयोग्यता का मसला कोर्ट में लंबित है तो राज्यपाल, जो कि अभी ही कोविड से उबरे हैं, नेता प्रतिपक्ष से मुलाक़ात के अगले दिन फ़्लोर टेस्ट का आदेश कैसे दे सकते हैं. क्या ये संविधान के दसवें अनुसूची को चोट नहीं पहुंचाएगा?
सिंघवी ने कोर्ट से अपील करते हुए ये भी कहा है कि अगर कल फ़्लोर टेस्ट नहीं होगा तो आसमान नहीं टूट पड़ेगा.
शिवसेना पक्ष ने कोर्ट से क्या कहा?
शिवसेना के बाग़ी विधायकों के नेता एकनाथ शिंदे की ओर से वरिष्ठ वकील नीरज किशन कौल ने अदालत में पक्ष रखा.
कौल ने कहा है कि फ़्लोर को लेट नहीं कराया जा सकता और विधायकों की ख़रीद-फरोख़्त को रोकने का यही एक ज़रिया है.
उन्होंने कहा है कि राज्यपाल के पास यह शक्ति, न्यायक्षेत्र और अधिकार है और नियमानुसार फ़्लोर टेस्ट कराने का निर्देश दे सकते हैं.
कौल ने कहा है कि सामान्य रूप से राजनीतिक पार्टियां कोर्ट जाकर फ़्लोर टेस्ट रोकने की मांग करती हैं क्योंकि कोई और पार्टी हाइजैक कर रहा होता है. यहां पर उल्टा हो रहा है, पार्टी फ़्लोर टेस्ट नहीं चाहती है.
उन्होंने ये भी सवाल उठाया कि "लोकतंत्र की सामान्य प्रक्रिया की पालन कहां किया जाएगा?"
कौल ने बताया है कि "फ़्लोर कराना टेस्ट बेहद ज़रूरी है क्योंकि ये पता चलना आवश्यक है कि मंत्रियों और मुख्यमंत्री में विधायकों का समर्थन हासिल है अथवा नहीं."
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