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नूपुर शर्मा के बयान का समर्थन करने वाले साद अंसारी को गिरफ़्तार क्यों किया?
- Author, मयंक भागवत
- पदनाम, बीबीसी मराठी सेवा
महाराष्ट्र की ठाणे पुलिस ने बीते रविवार बीजेपी की निलंबित राष्ट्रीय प्रवक्ता नूपुर शर्मा के आपत्तिजनक बयान का समर्थन करने वाले 19 वर्षीय युवा साद अंसारी को गिरफ़्तार किया है.
साद अंसारी पर आरोप है कि उन्होंने सोशल मीडिया पर नूपुर शर्मा के समर्थन में पोस्ट लिखा था.
भिवंडी इलाक़े के डीसीपी योगेश चव्हाण ने बीबीसी से बात करते हुए कहा, "रविवार को पुलिस ने साद को गिरफ़्तार किया है. कोर्ट ने उन्हें पाँच दिनों की पुलिस हिरासत में भेज दिया है."
ठाणे पुलिस ने साद को धार्मिक भावनाएं आहत करने के मामले में गिरफ़्तार किया है और अब वो 18 जून तक पुलिस हिरासत में रहेंगे.
नूपुर शर्मा के समर्थन में पोस्ट लिखने के बाद साद अंसारी के घर में घुसकर कई लोगों ने उन्हें धमकियां दी थीं और उनके साथ मारपीट की थी.
पुलिस ने इस मामले में 100 से भी अधिक लोगों पर मामला दर्ज किया है.
साद के परिवार वाले इस गिरफ़्तारी को लेकर परेशान हैं. और इस मुद्दे पर खुलकर बात नहीं कर रहे हैं.
लेकिन उनके चचेरे भाई ज़ैन अंसारी कहते हैं, "क़ानून को हाथ में लेने का हक़ किसी को भी नहीं. जो हुआ वो ग़लत हुआ."
क्या हुआ था उस रात?
ये मामला बीते शनिवार का है. इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने वाले 19 साल के साद अंसारी ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट लिखा था.
आरोप है कि साद की पोस्ट बीजेपी की निलंबित प्रवक्ता नूपुर शर्मा के बयान का समर्थन करने वाली थी.
नूपुर शर्मा ने एक निजी चैनल में डिबेट के दौरान इस्लाम धर्म के आख़िरी पैग़ंबर हज़रत मोहम्मद के बारे में विवादित बयान दिया था.
साद अंसारी ने जब नूपुर शर्मा के समर्थन में पोस्ट लिखा तो उनका यह पोस्ट देखते ही देखते वायरल हो गया. मुस्लिम समुदाय के कुछ लोगों को ये पोस्ट नागवार गुज़री.
इसके बाद शनिवार शाम से ही साद के घर के बाहर बहुत सारे लोग जमा होने लगे. ग़ुस्साई भीड़ में से कई लोग साद अंसारी के घर में जबरन घुस गए और उनसे माफ़ी माँगने को कहा. इसके बाद साद ने माफ़ी माँग भी ली.
इस पूरी घटना का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है जिसमें साफ़ दिख रहा है कि ग़ुस्साई भीड़ साद को माफ़ी माँगने के लिए धमका रही है.
इस दौरान साद के साथ गाली गलौज की गई. उन्हें कलमा (हर मुसलमान कलमा पढ़ कर इस बात की गवाही देता है कि उसे अल्लाह और उसके पैग़बर हज़रत मोहम्मद पर विश्वास है) पढ़ने को कहा गया और फिर भीड़ में से किसी ने साद को थप्पड़ भी जड़ दिए.
ग़ुस्साई भीड़ को शांत करने के लिए पुलिस को तलब किया गया. इसके बाद पुलिस ने वहां पहुँचकर साद को अपनी गिरफ़्त में ले लिया.
साद की गिरफ़्तारी क्यों हुई
भिवंडी के डीसीपी योगेश चव्हाण ने बीबीसी से बात करते हुए साद की गिरफ़्तारी की पुष्टि की है.
पुलिस का कहना है कि साद अंसारी की लिखी सोशल पोस्ट के कारण भिवंडी में माहौल तनावपूर्ण बन गया था. और मुस्लिम समुदाय के लोग साद की गिरफ़्तारी की माँग कर रहे थे.
लेकिन साद अंसारी के वकील नारायण अय्यर साद पर लगे आरोपों को सिरे से ख़ारिज करते हैं.
बीबीसी से बातचीत के दौरान वकील नारायण अय्यर कहते हैं, "साद अंसारी पर लगे आरोप झूठे हैं. उसने कोई भी भड़काऊ बयान नहीं दिया."
वे कहते हैं, साद ने अपनी पोस्ट में लिखा था, "मैं किसी भी धर्म विशेष को सपोर्ट नहीं करता. और ये नफ़रत रुक जानी चाहिए."
साद के वकील के अनुसार साद ने नूपुर शर्मा के किसी भी बयान का समर्थन नहीं किया है.
वहीं, दूसरी तरफ़ साद अंसारी के घर में जबरन घुस आने वाली भीड़ पर भी पुलिस ने मुक़दमा दायर किया है.
पुलिस ने 100 से भी ज़्यादा लोगों पर एफ़आईआर दर्ज की है. पुलिस का दावा है कि उसने उनमें से क़रीब 18 लोगों की पहचान कर ली है.
डीसीपी योगेश चव्हाण का कहना है कि जिन लोगों की पहचान पुलिस ने कर ली है, उनको नोटिस भेजा गया है.
क्या कहते हैं साद अंसारी के परिवार वाले?
इस घटना के बाद साद अंसारी के घर वाले सदमे में हैं.
मुस्लिम धर्म के होने की वजह से साद की गिरफ़्तारी पर परिवार की तरफ़ से कोई भी खुलकर नहीं बात कर रहा है.
परिवार को डर है कि अपने समुदाय के लोगों के ख़िलाफ़ बोलने पर लोग फिर से एक बार उनके घर में घुसकर उन्हें धमकी दे सकते हैं या मारपीट कर सकते हैं.
बीबीसी ने साद अंसारी के चचेरे भाई ज़ैन अंसारी से बात की. ज़ैन भी इस पूरे मामले को लेकर ज़्यादा कुछ कहने से बच रहे हैं. साद के साथ हुई गाली गलौज और मारपीट पर वे कहते हैं, "क़ानून को अपने हाथ में लेने का अधिकार किसी को नहीं है. जो हुआ वो ग़लत हुआ."
वहीं, साद के परिवार के लोग कहते हैं, "शनिवार देर रात क़रीब तीन बजे भीड़ जबरन घर में घुस आई. परिवार वालों ने लोगों को काफ़ी समझाने की कोशिश की. भीड़ का ग़ुस्सा शांत होने के बाद वो साद को बाहर ले आए. लेकिन ग़ुस्साई भीड़ ने उसके साथ मारपीट की."
परिजनों का सवाल है कि, रात में जबरन घर में घुस आने और मारपीट करने का हक़ लोगों को किसने दिया? वहीं पुलिस की कार्रवाई को लेकर भी परिवार वाले नाराज़ हैं.
वे कहते हैं, "पुलिस को साद की गिरफ़्तारी के पहले मामले की तफ़्तीश करनी चाहिए थी. लेकिन पुलिस ने ऐसा नहीं किया."
नाम न बताते हुए साद के एक रिश्तेदार ने कहा, "पिछले कई सालों से साद को फिट्स आते हैं. उसका इलाज चल रहा है. हाल ही में उसे मनोचिकित्सकों के पास भी ले जाया गया था".
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