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शेख़ हसीना की पार्टी के प्रवक्ता ने बीजेपी के रुख़ पर उठाए सवाल- प्रेस रिव्यू
भारत में पैग़ंबर मोहम्मद पर टिप्पणी के बाद छिड़े विवाद के बीच बांग्लादेश की सत्ताधारी पार्टी आवामी लीग़ के एक शीर्ष नेता ने कहा है कि बीजेपी ने खाड़ी देशों की ओर से बढ़े दबाव की वजह से नूपुर शर्मा पर कार्रवाई की.
अंग्रेज़ी अख़बार 'द हिंदू' ने इस ख़बर को प्रमुखता से छापा है. आज के प्रेस रिव्यू में सबसे पहले यही ख़बर पढ़िए.
ढाका में पत्रकारों के एक प्रतिनिधिमंडल से बातचीत के दौरान बांग्लादेश आवामी लीग के खंडाकर ग़ुलाम मौला नक्शबंदी ने कहा कि प्रधानमंत्री शेख़ हसीना ने धार्मिक अतिवादियों के लिए ज़ीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई हुई है और उन्होंने सांप्रदायिक सद्भाव सुनिश्चित करने के लिए हाल के समय में त्वरित कार्रवाई की है.
बांग्लादेश आवामी लीग के सलाहकार समूह के सदस्य नक्शबंदी ने कहा, "भारत सरकार ने कई दिनों तक इंतज़ार किया और पैग़ंबर मोहम्मद के ख़िलाफ़ अपमानजनक टिप्पणी करने वालों के ख़िलाफ़ कोई कार्रवाई नहीं की. जब ख़ाड़ी देशों ने इन बयानों का विरोध शुरू किया तब जाकर उन्होंने एक्शन लिया और इन बयानों के लिए ज़िम्मेदार अपने प्रवक्ताओं को हटाया."
शेख़ हसीना सरकार के मुखर प्रवक्ताओं में से एक नक्शबंदी ने दावा किया कि धार्मिक संवेदनशीलता से जुड़े मामलों में बांग्लादेश तत्काल कार्रवाई करता है. उन्होंने कहा, "बीते साल जब कुमिल्ला में हिंसा छिड़ी थी तो हमारी सरकार तुरंत हरकत में आई और अभियुक्तों को गिरफ़्तार किया. हिंसा से हुई क्षति को नियंत्रित किया गया."
नक्शबंदी ने इस दौरान ये संकेत दिए कि भारत और बांग्लादेश में सांप्रदायिक स्थितियां एक-दूसरे से जुड़ी हैं और अगर ज़रूरी मामलों को तत्काल सुलझाया नहीं गया तो बांग्लादेश के हिंसक तत्व इसका फ़ायदा उठाने की कोशिश कर सकते हैं.
उन्होंने कहा कि एक टीवी डिबेट के दौरान पैग़ंबर मोहम्मद को लेकर टिप्पणी और उसके बाद सोशल मीडिया पर आई प्रतिक्रिया को देखते हुए जो बयानों की बाढ़ आई है, उस पर बांग्लादेश सरकार गौर कर रही है. नक्शबंदी ने कहा, "हमने आपस में इस पर चर्चा की है और धार्मिक मंत्री इस मसले पर कोई भी आधिकारिक बयान जारी करने से पहले हमारे साथ वार्ता करेंगे."
बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख़ हसीना की सरकार पर अंसारुल बांग्ला टीम और अल-क़ायदा जैसे चरमपंथी समूह निशाना साधते रहे हैं. जुलाई 2016 में इस्लामिक स्टेट के चरमपंथियों द्वारा होली आर्टिसन बेकरी में हत्याओं को अंजाम देने के बाद उनकी सरकार ने सुरक्षा तंत्र को मज़बूत किया है. नक्शबंदी और एक अन्य कार्यकर्ता मुफ्ती फै़जुल्ला का कहना है कि भारत और बांग्लादेश दोनों जटिल बहु-धार्मिक समाज हैं जिन्हें सांप्रदायिक सद्भाव और अंतर-धार्मिक संवाद को बढ़ावा देना चाहिए.
पैग़ंबर विवाद के बीच अल-क़ायदा ने दी बदला लेने की धमकी
पैग़ंबर मोहम्मद पर की गई विवादित टिप्पणी के बाद अब चरमपंथी संगठन अल-क़ायदा ने भारत में आत्मघाती हमले करने की धमकी दी है.
अंग्रेज़ी अख़बार द इंडियन एक्सप्रेस की ख़बर के अनुसार,केंद्रीय एजेंसियां अल-क़ायदा की कथित धमकी भरी चिट्ठी मिलने के बाद से अलर्ट पर हैं.
छह जून की तारीख़ पड़ी इस चिट्ठी में अल-क़ायदा ने कहा है कि वो 'पैग़ंबर के सम्मान की लड़ाई' के लिए दिल्ली, मुंबई, उत्तर प्रदेश और गुजरात में आत्मघाती हमले करेगा. सभी राज्यों को ख़ुफ़िया एजेंसियों ने इस धमकी के बारे में सूचित कर दिया है और हाई अलर्ट पर रहने को कहा है.
अख़बार के अनुसार चिट्ठी में लिखा है, "कुछ दिन पहले हिंदुत्व के झंडाबरदारों ने हमारे सबसे सम्मानजनक पैग़ंबर मोहम्मद और उनकी पत्नी आयशा अबु बकर का एक टीवी चैनल पर अपमान किया. इस तिरस्कार की वजह से दुनियाभर के मुसलमानों का दिल रो रहा है और उनमें बदले की भावना घर कर गई है. हम अपने पैग़ंबर के सम्मान के लिए लड़ेंगे."
"हमें उन लोगों की जान ले लेनी चाहिए जो हमारे पैग़ंबर का अपमान करते हैं और हमें ख़ुद अपने और अपने बच्चों के शरीर से विस्फोटक बांधकर ऐसे लोगों को उड़ा देना चाहिए. भगवा आतंकियों अब दिल्ली, बॉम्बे, यूपी और गुजरात में अपने अंत का इंतज़ार करो. अब इन्हें न तो इनके घरों में जगह मिलेगी और न ही सेना के कैंट में." चिट्ठी के मिलने के बाद केंद्रीय एजेंसियों ने इसका सत्यापन कर के सभी राज्यों की पुलिसबलों को हाई अलर्ट पर रहने को कहा है.
यथास्थिति में एकतरफ़ा बदलाव करने की कोशिश को स्वीकार नहीं करेगा भारत: जयशंकर
चीन पर इशारों में निशाना साधते हुए विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने मंगलवार को कहा कि भारत अपनी सीमा पर यथास्थिति को बदलने के किसी भी एकतरफ़ा प्रयास को स्वीकार नहीं करेगा.
अंग्रेज़ी अख़बार लाइव मिंट की ख़बर के अनुसार, जयशंकर ने मोदी सरकार के आठ साल पूरे होने पर आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान ये कहा.
आतंकवाद का ज़िक्र करते हुए विदेश मंत्री ने कहा कि कूटनीति ने इस चुनौती से निपटने में काफ़ी योगदान किया है, जो आतंकवाद को समर्थन देने से इंकार के रूप में सामने आया है.
उन्होंने कहा, "हमारी सीमाओं की सुरक्षा ज़रूरी है और हम यथास्थिति में एकतरफ़ा तरीके से बदलाव करने की कोशिशों को कभी स्वीकार नहीं करेंगे. स्थापित समझ से परे किसी भी रुख को वैसी ही प्रतिक्रिया मिलेगी."
विदेश मंत्री ने कहा, "जहाँ तक सुरक्षा की बात आती है, हम अपने राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखकर काम करेंगे. हम अपने विश्वसनीय सहयोगियों की भूमिका को मानते हैं जो हमारे साथ भारत को हर दिन सुरक्षित बनाने में मदद कर रहे हैं. हम इतिहास की झिझकों से बाहर आ चुके हैं और हमारे विकल्पों पर किसी को वीटो नहीं करने देंगे."
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