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ज्ञानवापी मस्जिद को मंदिर बताने की कोशिश, गूगल ने दिया जवाब
- Author, सेराज अली
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
कहीं जाना हो और रास्ता मालूम ना हो तो हम अकसर गूगल मैप का इस्तेमाल करते हैं. जगह का नाम डालते ही गूगल मैप उस जगह को नेविगेट करता है और वहां तक पहुंचने के लिए रास्ता बताता है.
लेकिन अब कुछ लोग गूगल मैप पर ज्ञानवापी मस्जिद का नाम और स्टेटस बदलने की कोशिश कर रहे हैं. ऑनलाइन संयुक्त रूप से लोग इसकी जगह ज्ञानवापी मंदिर करने की कोशिश कर रहे हैं.
कई दिनों से बीबीसी की डिसइनफॉरमेशन यूनिट के सेराज अली इस कोशिश पर नज़र रख रहे हैं.
ये कोशिश व्हाट्सएप पर एक मैसेज के ज़रिए शुरू हुई. इस मैसेज को कई ग्रुप्स और सोशल मीडिया पर तेज़ी से शेयर किया गया है.
इस मैसेज में लोगों से अपील की गई है कि वे गूगल मैप खोलकर उसमें ज्ञानवापी मस्जिद को सर्च करें. और जब ज्ञानवापी मस्जिद दिखाई दे तो उसके नीचे बदलने के सुझाव पर जाकर क्लिक करें और उसकी जगह ज्ञानवापी मंदिर का सुझाव लिखें.
ये एक तरह का अभियान है और इसका लक्ष्य तब तक ऐसा करना है जब तक गूगल अपनी सेटिंग में ज्ञानवापी मस्जिद को मंदिर नहीं कर देता.
इस तरह के मैसेज के साथ कभी कभी स्क्रीन रिकॉर्डेड वीडियो भी भेजे जा रहे हैं ताकि आसानी से लोगों को समझाया जा सके.
गूगल मैप पर ज्ञानवापी मस्जिद के नाम को मंदिर करने का मैसेज जब सोशल मीडिया पर शेयर हुआ तो कुछ दिनों के अंदर ही बेंगलुरु के एक प्रमुख स्कूल ने अपने यहां पढ़े हुए छात्रों को एक ईमेल भेजा. इस ईमेल में मस्जिद का नाम बदलकर मंदिर करने का निर्देश दिया गया था. बाद में स्कूल ने बयान जारी कर ऐसे किसी निर्देश से अपने हाथ पीछे खींच लिए हैं और इसमें मामले में जांच के निर्देश दिए हैं.
बीबीसी ने इस तरह की कोशिश करने के बारे में गूगल से बात की.
गूगल का जवाब
गूगल का कहना है कि वो इस मामले की जांच कर रही है और आगे इस तरह के दुरुपयोग को रोकने के लिए सुरक्षा प्रदान कर रही है.
गूगल ने अपने बयान में कहा है, ''हमें इस बारे में जानकारी है और हमारी टीम जांच करने, नीतियों का उल्लंघन करने वाले कंटेंट को हटाने और आगे इसके गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए सुरक्षा व्यवस्था करने के लिए कार्रवाई कर रही है.
हमारी स्पष्ट नीति है जो आपत्तिजनक और फर्ज़ी कंटेंट पर रोक लगाती है. हमारी ऑटोमैटिक प्रणाली और प्रशिक्षित ऑपरेटर्स संदेह पैदा करने वाली हरकतों वाले नक्शों पर निगरानी के लिए 24 घंटें काम करते हैं. हम भ्रामक जगहों और अनुचित कंटेंट की शिकायत करने के लिए अपने यूजर्स को प्रोत्साहित करते हैं जो हमारे खोजने वाले ऑटोमैटिक सिस्टम को बेहतर बनाने और नक्शे पर जानकारी को प्रामाणिक और विश्वसनीय बनाए रखने में मदद करता है."
क्या है मामला
पांच महिलाओं ने कोर्ट में याचिका दायर कर ज्ञानवापी मस्जिद के पीछे वाले हिस्से में मां शृंगार गौरी की पूजा और दर्शन करने की मांग की थी.
साथ ही उन्होंने प्लॉट नंबर 9130 के निरीक्षण और वीडियोग्राफी की मांग भी की थी जिसे मंज़ूर करते हुए कोर्ट ने निरीक्षण और उसकी वीडियोग्राफी के आदेश दिए थे.
रिपोर्ट में मस्जिद में शिवलिंग मिलने का दावा किया गया. वहीं मुस्लिम पक्ष ने शिवलिंग को फव्वारा बताया.
ये मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा जब सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि मस्जिद परिसर में जिस जगह 'शिवलिंग' मिलने की बात कही जा रही है, उस जगह को संरक्षित रखा जाए. इसके साथ ही अदालत ने कहा कि मुस्लिम पक्ष के वहाँ नमाज़ पढ़ने पर कोई रोक नहीं होगी.
हालांकि निचली अदालत में ज्ञानवापी मस्जिद को लेकर चल रही कार्रवाई पर सुप्रीम कोर्ट ने कोई रोक नहीं लगाई है. मुस्लिम पक्ष की ओर से ये मांग की गई थी कि ज्ञानवापी मस्जिद में यथास्थिति बरकरार रखी जाए.
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा, "वाराणसी की अदालत के फ़ैसले पर हुए विवाद का निराकरण करते हुए ये आदेश दिया जाता है कि 16 मई का आदेश केवल इसी हद तक प्रभावी रहेगा कि वाराणसी के ज़िलाधिकारी ये सुनिश्चित करेंगे कि अगर जिस जगह पर शिवलिंग पाया गया है, अगर वहां किसी के कदम पड़े तो उससे क़ानून और व्यवस्था की समस्या पैदा हो जाएगी."
कोर्ट ने ये भी स्पष्ट किया है कि मुसलमान वहां पर वजू भी कर सकेंगे क्योंकि ये उनकी धार्मिक प्रक्रिया का हिस्सा है.
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