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क्या है दिल्ली के नए उप-राज्यपाल विनय कुमार सक्सेना का गुजरात कनेक्शन?
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने विनय कुमार सक्सेना को दिल्ली का नया उप-राज्यपाल मनोनीत किया है. विनय कुमार सक्सेना खादी और ग्रामोद्योग आयोग के चेयरमैन हैं.
दिल्ली के उप-राज्यपाल अनिल बैजल ने निजी कारणों से अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया था जिसको सोमवार को राष्ट्रपति ने स्वीकार कर लिया.
राष्ट्रपति भवन ने बयान जारी करते हुए एक ओर इस्तीफ़ा स्वीकार करने की बात कही वहीं दूसरी ओर विनय कुमार सक्सेना को उप-राज्यपाल बनाने की घोषणा की.
केजरीवाल ने किया ट्वीट
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने ट्वीट करके कहा है कि वो दिल्ली की जनता की ओर से विनय कुमार सक्सेना का स्वागत करते हैं.
उन्होंने ट्वीट में यह भी लिखा है कि दिल्ली सरकार के मंत्रिमंडल की ओर से उन्हें पूरा सहयोग मिलता रहेगा.
केजरीवाल ने विनय कुमार सक्सेना के स्वागत से पहले पूर्व उप-राज्यपाल अनिल बैजल की विदाई को लेकर भी ट्वीट किया. उन्होंने लिखा कि उन्होंने उनके साथ दिल्ली में कई समस्याओं को ठीक करने की कोशिश की.
ग़ौरतलब है कि दिल्ली में कई बार दिल्ली सरकार और उप-राज्यपाल के बीच कई फ़ैसलों को लेकर तनातनी देखने को मिलती रही है.
दिल्ली एक केंद्र शासित प्रदेश है जिसमें विधानसभा भी है लेकिन क़ानून-व्यवस्था, ज़मीन, पुलिस एवं सेवाएं उप-राज्यपाल के द्वारा केंद्र सरकार के मातहत आती हैं.
बीते साल संसद से गवर्नमेंट ऑफ़ नेशनल कैपिटल टैरिटरी (GNCT) ऑफ़ दिल्ली एक्ट पारित किया गया जिसके तहत उप-राज्यपाल दिल्ली सरकार के प्रमुख होंगे और सभी मुख्य फ़ैसलों पर उनकी सहमति लेना अनिवार्य होगा.
कौन हैं विनय कुमार सक्सेना
64 वर्षीय सक्सेना कानपुर विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग की वेबसाइट के मुताबिक़, उनके पास पाइलट लाइसेंस है और वो 'विचारों से समाजसेवी और कर्मों से कॉर्पोरेट साइंटिस्ट हैं.'
जेके ग्रुप के साथ उन्होंने लगातार 11 सालों तक सहायक मैनेजर के रूप में काम किया और फिर जनरल मैनेजर के तौर पर प्रमोशन होने के बाद वो गुजरात चले गए जहां उन्होंने कंपनी की बंदरगाह परियोजना को देखा.
अक्तूबर 2015 में सक्सेना को खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग का चेयरमैन नियकुत किया गया. बीते सात सालों के दौरान उन्होंने हनी मिशन, कुम्हार सशक्तीकरण योजना, चमड़े के कारीगरों का सशक्तीकरण, खादी प्राकृतिक पैंट, प्रोजेक्ट आरई-एचएबी, खादी फ़ैब्रिक फ़ुटवियर और प्लास्टिक मिक्स्ड हैंडमेड पेपर जैसे प्रोजेक्ट पर काम किया.
सक्सेना कई कमिटियों के सदस्य भी रह चुके हैं जिनमें स्वतंत्रता दिवस की 75वीं वर्षगांठ के लिए बने राष्ट्रीय पैनल और पद्म पुरस्कारों की चयन समिति भी शामिल है. वो सीएसआईआर और यूनिवर्सिटी कोर्ट ऑफ़ जेएनयू के सदस्य भी हैं.
'नर्मदा बचाओ आंदोलन' के ख़िलाफ़ मुहिम
सक्सेना ने साल 1991 में नेशनल काउंसिल फ़ॉर सिविल लिबर्टीज़ (NCCL) नामक एक ग़ैर सरकारी संगठन बनाया जिसका मुख्यालय अहमदाबाद में है.
खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग की वेबसाइट पर विनय कुमार सक्सेना के प्रोफ़ाइल के मुताबिक़, उनके NCCL संगठन ने सरकारी कंपनियों, राज्य सरकारों के ख़िलाफ़ राष्ट्रीय मुद्दों पर काम किया.
इसके साथ ही सगंठन ने अन्याय के ख़िलाफ़ सामाजिक जागरूकता, ग़लत व्यापार प्रथाओं को रोकने का काम भी किया.
उनके संगठन ने गुजरात के आदिवासी इलाक़ों में पक्के मकान बनाने का काम किया.
नर्मदा नदी पर बांध के निर्माण के कारण स्थानीय लोगों के विस्थापन को लेकर समाजसेविका मेधा पाटकर ने साल 1985 में 'नर्मदा बचाओ आंदोलन' संगठन की शुरुआत की थी.
खादी आयोग की वेबसाइट का दावा है कि विनय कुमार सक्सेना के ग़ैर सरकारी संगठन ने साल 2000 में 'मेधा पाटकर के नर्मदा बचाओ आंदोलन की गतिविधियों को उजागर किया. वेबसाइट के अनुसार इसकी वजह से गुजरात और मध्य प्रदेश के लाखों लोगों का जीवन तब्दील हुआ.
इसमें आगे बताया गया है कि NCCL ने नर्मदा बचाओ आंदोलन के ख़िलाफ़ एक विपक्ष पैदा किया जिसने तकनीकी, क़ानूनी, सामाजिक और सांस्कृतिक आयामों को शामिल करते हुए बहुआयामी क़दम उठाए.
वेबसाइट पर बताया गया है कि NCCL के कामों को गुजरात और मध्य प्रदेश के लोगों ने स्वीकार किया.
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