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नीमच में दरगाह के पास मूर्ति स्थापित करने का क्या है मामला
- Author, सलमान रावी
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, नीमच से
मध्य प्रदेश के नीमच में सोमवार को हुई हिंसा के बाद कर्फ्यू तो नहीं लगाया गया है. मगर स्थानीय प्रशासन ने पूरे इलाक़े में निषेधाज्ञा लगा दी है और दावा किया है कि हालात अब पूरी तरह से नियंत्रण में हैं.
नीमच के पुलिस अधीक्षक सूरज वर्मा ने बीबीसी से बात करते हुए कहा कि सोमवार की घटना के सिलसिले में कुल चार एफ़आईआर दर्ज की गई हैं और अब तक 9 लोगों को हिरासत में लिया गया है.
फ़िलहाल पूरे शहर में सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त किए गए हैं और जिस मस्जिद में आगज़नी की घटना घटी उसके आसपास के इलाके को सील कर दिया गया है.
क्या है मामला
प्रशासन का कहना है कि ये घटना तब घटी जब कचहरी के पास स्थित दरगाह से कुछ दूरी पर कुछ लोगों ने मूर्ति स्थापित करने की कोशिश की.
दरगाह के पास रहने वालीं ज़ेबुन्निसा ने बीबीसी से फ़ोन पर बात करते हुए कहा कि जिस जगह पर मूर्ति स्थापित करने की कोशिश की गई वहां पिछले चार दिनों से हवन चल रहा था.
वो कहती हैं, "तीन चार दिनों से हवन भी चल रहा था और पुलिस भी तैनात थी. मगर कुछ लोगों ने वहां पर मूर्ति स्थापित करने की कोशिश की. लोगों ने विरोध किया. इसी बीच हंगामा होने लगा. इन जगह पर अधिकारी भी तैनात थे और पुलिस भी. पास में ही गृह रक्षा वाहिनी का मुख्यालय भी है."
पुलिस अधीक्षक सूरज वर्मा का कहना है कि हंगामा जब होने लगा तो मौके पर मौजूद अधिकारियों और पुलिसकर्मियों ने स्थिति को फ़ौरन नियंत्रण में कर लिया था. उनका कहना था कि दोनों पक्षों के लोगों को पुलिस नियंत्रण कक्ष में बुलाकर बैठक की जा रही थी जिस बीच दोनों पक्षों की तरफ से असामाजिक तत्वों ने एक बार फिर हंगामा शुरू कर दिया.
एसपी कहते हैं, "भीड़ के बीच रोड़ेबाजी शुरू हो गयी और इसी बीच कुछ असामाजिक तत्वों ने महेश्वरी मोहल्ले में मौजूद एक मस्जिद पर हमला कर दिया और वहां पर रखे कूलर में आग लगा दी. हालात को फ़ौरन नियंत्रित कर लिया गया और आग बुझा दी गयी."
उन्होंने बताया कि घटना में कुछ लोगों के घायल होने की ख़बर भी है जिसमें एक युवक भी शामिल है. युवक को इलाज के लिए उदयपुर के किसी अस्पताल में भर्ती कराया गया है. नीमच पुलिस के अधिकारी घायल युवक का बयान लेने उदयपुर जाएंगे जिसके आधार पर एक और प्राथमिकी दर्ज की जाएगी.
आम लोग हैं परेशान
महेश्वरी मोहल्ले के रहने वाले लक्ष्मीनारायण परमार कहते हैं कि जिस जगह वो तीन पुश्तों से रहते आ रहे हैं और जहां किसी भी तरह की साम्प्रदायिक हिंसा देखने को नहीं मिली वहां एक तरह से दहशत का माहौल बन गया है.
उनका कहना था, "अफवाहें फैल रही हैं. लोग डरे हुए हैं कि कब क्या होगा. इस तरह का माहौल हमने कभी नहीं देखा था. पता नहीं इतना उन्माद लोगों में कहां से पैदा कर दिया गया."
परमार कहते हैं कि उनके मोहल्ले से कई परिवार डर की वजह से दूसरी जगहों पर चले गए हैं. इसी मोहल्ले में वो मस्जिद भी है जहाँ हिंसा हुई थी.
पुलिस अधीक्षक सूरज वर्मा कहते हैं कि जिस दरगाह के पास घटना घटी है वो बहुत पुरानी दरगाह है क्योंकि इसके दस्तावेज़ आज़ादी से भी पहले के हैं. इस दरगाह पर सभी वर्गों की आस्था रही है और सभी धर्मावलंबी यहां जाया करते रहे हैं.
उनका कहना था कि सोशल मीडिया पर अफवाहें तेज़ी से फैलने लगीं जिसकी वजह से माहौल बिगड़ने लगा.
इसी को देखते हुए नीमच की अतिरिक्त ज़िला अधिकारी नेहा मीणा ने एक आदेश जारी किया है जिसके तहत नीमच सिटी थाना क्षेत्र में धारा-144 को लागू किया गया है.
इसके अलावा किसी भी प्रकार के कार्यक्रम या कार्यक्रम जुलूस पर 'पूर्ण रूप से प्रतिबंध' लगा दिया गया है.
प्रशासन ने सख़्ती लागू की
अतिरिक्त ज़िला अधिकारी के आदेश में कहा गया है, "कोई भी व्यक्ति, संस्था, संगठन या समूह जब तक किसी आयोजन की विधिवत सक्षम अधिकारी से अनुमति प्राप्त नहीं कर लेते तब तक उस आयोजन को किसी भी प्रकार के इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट, सोशल मीडिया, पोस्टर या बैनर के माध्यम से या अन्य कोई भी माध्यम से प्रचार-प्रसार को प्रतिबंधित किया गया है."
आदेश में 'मध्य प्रदेश कोलाहल नियंत्रण अधिनियम 1985' के प्रावधानों का उल्लेख भी किया गया है जिसके तहत 'डी.जे,' लाउडस्पीकर जैसे ध्वनि विस्तारण यंत्र का उपयोग बिना सक्षम अधिकारी की अनुमति के प्रतिबंधित तो किया ही गया है साथ ही 'किसी भी प्रकार की सोशल मिडिया साइट पर किसी तरह से भी धर्म, साम्प्रदायिक जाति या समुदाय के विरुद्ध भड़काऊ भाषा के पोस्ट पर भी प्रतिबन्ध लगाया गया है.
नीमच में जिस जगह पर हिंसक झड़पें हुईं वहीं पास में ही हेमेन्द्र शर्मा का भी घर है. वो कहते हैं कि विवाद जिस जगह को लेकर हुआ वो उनके मोहल्ले से काफी दूर है. मगर इसके बावजूद भीड़ उनके मोहल्ले तक पहुंच गई.
उनका कहना है कि उनके मोहल्ले में मस्जिद है जहाँ मुसलमान नहीं के बराबर हैं. वो ये भी बताते हैं कि किस तरह से इतने दशकों तक मस्जिद की हिफ़ाज़त हिंदू ही करते आये हैं.
मगर हेमेन्द्र शर्मा को अफ़सोस है कि उन्मादी भीड़ ने उनके मोहल्ले में आकर पत्थरबाज़ी की.
नीमच के पुलिस अधीक्षक सूरज वर्मा के अनुसार, पुलिस घटना के दौरान बनाए गए वीडियो की जांच कर रही है और जो चेहरे उनमें हिंसा में शामिल होते हुए नज़र आ रहे हैं उनके ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई शुरू कर दी गई है.
फिलहाल नीमच के पुलिस उप महानिरीक्षक सुशांत सक्सेना ने भी घटनास्थल का दौरा किया और लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की.
इसी तरह की अपील प्रशासन की गाड़ियां हर मोहल्ले में घूम-घूम कर रही हैं.
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