प्रमोद महाजन की हत्या, क्या हुआ था उस दिन और एक अनसुलझा सवाल

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- Author, मयांक भागवत
- पदनाम, बीबीसी मराठी
तारीख़ - 3 मई 2006
13 दिनों तक मौत से लड़ाई के बाद आखिरकार भारतीय जनता पार्टी के नेता प्रमोद महाजन का निधन हो गया. उन्होंने मुंबई के हिंदुजा अस्पताल में अंतिम सांस ली.
प्रमोद महाजन को गुज़रे 16 साल बीत चुके हैं. लेकिन इस सवाल का जवाब अभी भी नहीं मिल सका है कि प्रवीण महाजन ने अपने भाई प्रमोद महाजन की हत्या क्यों की?
अपने भाई की हत्या के लिए आजीवन कारावास की सज़ा सुनाए जाने के बाद साल 2009 में प्रवीण महाजन ने नासिक जेल में एक किताब लिखी थी जिसका नाम था 'माझा एलबम' यानी मेरी एलबम.
इस किताब को लेकर विवाद हुआ था. इसके अंश अखबारों में छपे थे.
प्रवीण महाजन ने इसमें दावा किया था कि "यह सब कैसे हुआ और किसने किया, ये लोग कभी नहीं जान पाएंगे."
हत्या वाले दिन क्या हुआ था?
वो 22 अप्रैल 2006 का शनिवार का दिन था. तब सुबह के 7.30 बज रहे थे.
प्रमोद महाजन मुंबई के वर्ली इलाके में अपने आवास 'पूर्णा' में थे. हाथ में कागज और सामने चाय का प्याला. टीवी पर समाचार चल रहा था. महाजन परिवार के लिए ये सुबह भी एक आम दिन जैसी थी.
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उस दिन कोई नेता या कार्यकर्ता के आने का कोई कार्यक्रम नहीं था तो सफेद कुर्ते में महाजन रोज़ की तरह तैयार हो रहे थे.
तभी घंटी बजी. सामने उनके छोटे भाई प्रवीण महाजन खड़े थे. वो जींस और टी-शर्ट पहनकर आए थे.
शायद प्रमोद महाजन को पता नहीं था कि वो आने वाले हैं. प्रवीण अक्सर उनके यहाँ नहीं आते थे तो प्रमोद महाजन ने पूछा, "तुम यहाँ कैसे?"
प्रवीण महाजन भीतर आए और सोफे पर बैठ गए और शिकायत करने लगे कि प्रमोद महाजन उन्हें समय नहीं देते. उनकी मुख्य शिकायत यह थी कि वे व्यापार में मदद नहीं कर रहे थे.
उसके बाद दोनों में तकरार होने लगी…और अचानक 10 मिनट बाद, करीब 7.40 पर प्रवीण महाजन ने अपनी 32 बोर की पिस्टल निकाली और प्वाइंट ब्लांक रेंज से अपने बड़े भाई प्रमोद महाजन पर फायरिंग कर दी. उनके सीने में तीन गोलियां लगीं.
मुंबई पुलिस ने उस समय संवाददाताओं से कहा, "प्रवीण महाजन ने चौथी गोली चलाने की कोशिश की, लेकिन पिस्तौल जाम हो गई. वह और फायरिंग नहीं कर सके. उनकी पिस्तौल में नौ गोलियां थीं."

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गोली चलाने के बाद प्रवीण महाजन ने कहा...
'पूर्णा' इमारत में हंगामा हुआ और भीड़ लगने लगी. प्रमोद महाजन की पत्नी रेखा महाजन मदद के लिए गोपीनाथ मुंडे के घर पहुंचीं. मुंडे उसी बिल्डिंग की 12वीं मंज़िल पर रह रहे थे. वो दौड़ते हुए महाजन के घर गए.
रेखा महाजन ने कोर्ट में गवाही दी थी कि उस दिन क्या हुआ था. उन्होंने कहा था, "जब मैं बेडरूम में थी तब मैंने गोलियों की आवाज़ सुनी. मैं बाहर आई और देखा कि प्रवीण महाजन ने प्रमोद महाजन पर पिस्तौल से फायरिंग की."
"मैं चिल्लाई. प्रवीण, तुमने क्या किया? मैंने उन्हें धक्का देने की कोशिश की. लेकिन उन्होंने मुझे धक्का दिया और कहा कि आपने मेरी बात नहीं सुनी. अब भुगतो."

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इसके बाद प्रवीण महाजन घर से बाहर निकल गए. बिना एक शब्द कहे वो 15 सीढ़ियां नीचे उतरे. कार पार्किंग में छोड़ दी और टैक्सी लेकर थाने पहुंचे.
तब सुबह के 8.30 बजे होंगे. रात की पाली में वर्ली थाना के कर्मी अपनी ड्यूटी पूरी कर घर जा रहे थे. प्रवीण महाजन हाथ में पिस्टल लेकर थाने पहुँचे.
वहाँ उन्होंने मराठी में अधिकारियों से कहा, ''मैंने प्रमोद महाजन को गोली मार दी.''
ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मी को विश्वास नहीं हुआ क्योंकि प्रवीण महाजन को ज़्यादा लोग नहीं जानते थे. पुलिस ने प्रवीण महाजन को गिरफ्तार कर लिया और उनके घर पहुंच गई.

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प्रमोद महाजन गंभीर रूप से घायल हो गए थे. उन्हें अस्पताल ले जाने की कोशिश शुरू हो गई. गोपीनाथ मुंडे ने उसी बिल्डिंग में रहने वाले डॉक्टर विजय बंग को फ़ोन किया.
तब इंडिया टुडे से बात करते हुए डॉ. बांग ने कहा था, ''जब मैं पहुंचा तो महाजन एक कुर्सी पर बैठे थे. उनका रक्तचाप बहुत कम हो गया था. खून बह रहा था.''
गोपीनाथ मुंडे और रेखा महाजन ने प्रमोद महाजन को हिंदुजा अस्पताल में भर्ती कराया. प्रमोद महाजन बीजेपी के बड़े नेता थे. इसलिए डॉक्टरों ने तुरंत इलाज शुरू कर दिया.
कोर्ट में गवाही देते हुए रेखा महाजन ने आगे कहा, ''प्रमोद महाजन जब अस्पताल लाए गए तो होश में थे. उन्होंने गोपीनाथ मुंडे से कहा- मैंने ऐसा क्या किया कि प्रवीण ने मुझ पर गोली चलाई?"
उधर वर्ली थाने में वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी पहुंचने लगे. पुलिस ने दावा किया था कि प्रवीण महाजन ने अपना जुर्म कबूल कर लिया है. वर्ली थाना छावनी में तब्दील हो गया था. बड़ी संख्या में पत्रकार और चैनल के ओबी वैन थाने के बाहर पहुँचने लगे थे.

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प्रवीण महाजन को गिरफ्तार कर मध्य मुंबई के भोईवाड़ा कोर्ट में पेश किया गया. उसके बाद पुलिस ने सेशन कोर्ट में प्रवीण महाजन के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की.
2007 में मुंबई सत्र न्यायालय ने प्रवीण महाजन को दोषी ठहराया. उन्हें आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई गई. इस मामले में वरिष्ठ वकील उज्ज्वल निकम प्रमोद महाजन के विशेष लोक अभियोजक थे.
बीबीसी से बात करते हुए तब उन्होंने कहा, "प्रवीण महाजन के दिमाग में क्या चल रहा था, ये किसी को पता नहीं चला."
प्रमोद महाजन के मुक़दमे का एक हिस्सा इन-कैमरा यानी बंद कमरे में फिल्माया गया था. ऐसा इसलिए किया गया था कि तब सुनवाई के दौरान प्रमोद महाजन के चरित्र पर आरोप लगाए गए थे.
प्रवीण महाजन ने 14 दिन की फर्लो पर बाहर आने के बाद कुछ मीडिया संगठनों को इंटरव्यू दिया था. तब उनसे पूछा गया था- आपने प्रमोद महाजन की हत्या क्यों की?
डीएनए को दिए इंटरव्यू में इसके जवाब में प्रवीण महाजन ने कहा था, ''मैंने प्रमोद को नहीं मारा. ऐसा हुआ. क्या आप इस पर विश्वास कर सकते हैं? मैं इसके बारे में नहीं सोचता.

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उन्होंने इसमें कहा, "कुछ चीजें समझ से परे हैं. यह सब सिर्फ 15 मिनट में हुआ. मुझे कई चीज़ें याद हैं. केवल 22 अप्रैल, 2006 ही क्यों? मुझे सब कुछ याद है."
प्रवीण महाजन और प्रमोद महाजन के बीच क्या हुआ था? यह कभी सामने नहीं आया.
हालांकि प्रमोद महाजन को गोली मारने से छह दिन पहले 15 अप्रैल को प्रवीण महाजन ने प्रमोद महाजन को संदेश भेजा था- "अब याचना नहीं, रण होगा. जीवन विजय के साथ या फिर मरण होगा.''
दिवंगत भाजपा नेता गोपीनाथ मुंडे ने सेशन कोर्ट में दी गई अपनी गवाही में इस संदेश की जानकारी अदालत को दी थी.
गोपीनाथ मुंडे की 3 जून 2014 को दिल्ली में एक कार दुर्घटना में मौत हो गई. वो तब मोदी सरकार में ग्रामीण और पंचायती राज मंत्री थे.
प्रवीण महाजन की मौत
3 मार्च 2010 को प्रमोद महाजन की हत्या के लिए आजीवन कारावास की सज़ा काट रहे प्रवीण महाजन की भी मृत्यु हो गई.
उन्हें 2009 के नवंबर में विशेष अवकाश पर रिहा किया गया था. इस अवकाश की अवधि समाप्त होने के कुछ दिन पहले उन्होंने उच्च रक्तचाप और सिर दर्द की शिकायत की.
11 दिसंबर को उन्हें ठाणे के जुपिटर अस्पताल में भर्ती कराया गया. जाँच के बाद पता चला कि उन्हें ब्रेन हैमरेज हो गया था. बाद में वो कोमा में चले गए और तीन महीने बाद उनकी मृत्यु हो गई.
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