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तेज प्रताप की धमकी लालू परिवार के लिए मुसीबत है या रणनीति
- Author, कीर्ति दुबे
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
पिछले शुक्रवार को बिहार की राजधानी पटना में पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के आवास पर इफ़्तार पार्टी में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी शामिल हुए. इस समारोह के बाद लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव ने नीतीश कुमार से गुपचुप बातचीत का हवाला देते हुए कहा कि बिहार में जल्द ही बड़ा राजनीतिक खेल होने वाला है.
इसके बाद ख़बर आई कि उसी इफ़्तार पार्टी में तेज प्रताप ने राष्ट्रीय जनता दल के एक नेता रामराज की पिटाई कर दी. इन दोनों ही वाकयों के बाद विवाद बढ़ा तो 25 अप्रैल को तेज प्रताप ने ट्विटर पर एक और सनसनीखेज़ एलान कर दिया.
उन्होंने लिखा-"मैं अपने पिता के नक्शे कदम पर चलने का काम किया. सभी कार्यकर्ताओं को सम्मान दिया जल्द अपने पिता से मिलकर अपना इस्तीफा दूंगा."
राबड़ी के आवास पहुंचे तेज़ प्रताप
तेज प्रताप के इस बयान के बाद लालू परिवार एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है, पटना में हाईवोल्टेज ड्रामा चल रहा है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ मंगलवार को देर रात 10 बजे तेज प्रताप अपनी मां राबड़ी देवी के आवास 10 सर्कुलर रोड पहुंचे. बताया जा रहा है कि वो रात अपनी मां के घर ही ठहरे और छोटे भाई तेजस्वी यादव से भी उनकी मुलाकात होने के खबरें हैं.
लेकिन ये पहली बार नहीं है जब तेज प्रताप पर अपने बयान के कारण अपने परिवार और पार्टी के लिए परेशानी का सबब बने हों. इस तरह के विवादों से उनका नाता अब पुराना हो चला है.
ना सिर्फ बयानों बल्कि अपनी हरकतों और वेशभूषा को लेकर भी तेजप्रताप चर्चा में रहते हैं. कभी वो शिव की वेशभूषा घारण कर लेते हैं तो कभी कृष्ण की तरह तैयार जाते हैं.
अर्जुन या किंगमेकर
तेज प्रताप लालू के बड़े बेटे तो हैं लेकिन वह उनके राजनीतिक उत्तराधिकारी नहीं हैं ये बात साल 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में साफ़ हो गई थी.
लेकिन तेजप्रताप कई बार पार्टी में अपनी कोई महत्वपूर्ण क़द ना होने को लेकर अपनी नाराज़गी तो जताते रहे ही हैं और अपनी महत्ता का दावा करते रहे हैं.
तेजप्रताप ने साल 2019 में पटना में राज्य स्तरीय पार्टी की बैठक में नेताओं और समर्थकों से कहा था, "मैं भगवान कृष्ण हूं और तेजस्वी अर्जुन हैं. भगवान कृष्ण के बिना, अर्जुन कुछ भी हासिल नहीं कर सकते."
पारिवारिक विरासत की लड़ाई लालू परिवार में महीनों तक लड़ाई छिड़ी रही
तेज प्रताप अतीत में कह चुके हैं कि तेजस्वी के मुख्यमंत्री उम्मीदवार होने पर उन्हें दिक़्क़त नहीं है, लेकिन वो ये भी कह चुके हैं कि वह किंगमेकर की भूमिका में रहेंगे.
इससे पहले लोकसभा चुनाव से पहले उन्होंने कहा था कि, "नादान हैं वो लोग जो मुझे नादान समझते हैं."
उनके इस बयान ने पार्टी में फूट के संकेत दे दिए थे.
लेकिन आखिर ऐसा क्या है जो तेज प्रताप बार-बार अपने परिवार और पार्टी के लिए मुश्किलें खड़ी कर देते हैं, आखिर लालू परिवार इस समस्या से निजात क्यों नहीं ले पा रहा है.
इस सवाल के जवाब में बिहार की राजनीति को समझने वाले वरिष्ठ पत्रकार मणिकांत ठाकुर कहते हैं, "तेज प्रताप का व्यवहार और समझ दोनों ही राजनीतिक योगदान के काबिल नहीं हैं. उनमें वो समझ ही नहीं है. ऐसा नहीं है कि परिवार ने कोशिशें नहीं की है लेकिन उनकी मां, बहन और खुद लालू जी की कोशिशों के बाद भी वो बदल नहीं रहे हैं.
"वो जब तक पार्टी के कामों से जुड़े रहेंगे वो आरजेडी के विरोधियों को फ़ायदा देते रहेंगे. उनका आचरण ऐसा है कि लालू परिवार भी असहाय सा दिखने लगता है."
लेकिन ऐसा क्या है जो तेजप्रताप को रोकना इतना मुश्किल है?
इसके जवाब में मणिकांत ठाकुर कहते हैं, "लालू यादव और राबड़ी का पुत्र-मोह उन्हें तेज प्रताप को लेकर सख़्त रवैया अपनाने से रोकता रहता है. वो लालू को आदर्श बताते है और राबड़ी जी को सम्मान देते हैं और अगले ही पल ऐसा कुछ कर देते हैं जिसे यही लोग ढकते फिरते हैं."
"एक अहम बात ये है कि तेजस्वी के राजनीतिक सलाहकार लोग भी तेज प्रताप को बढ़ावा दे रहे हैं और आग में घी डालने का काम करते हैं ,और तेजप्रताप भावनाओं में बह कर ऐसा कुछ कर देते हैं कि इसके बाद वो खुद ही तिरस्कृत महसूस करते हैं. अगर अब लालू परिवार ने तेज प्रताप पर सख़्ती से एक्शन नहीं लिया तो उनका ये ग़ैर ज़िम्मेदाराना रवैया पार्टी को और उनके भाई तेजस्वी को बड़ा नुकसान पहुंचा सकता है और तेजस्वी यादव के भविष्य में सीएम बनने की संभावनाओं को मिट्टी में मिला सकता है."
विवाद या प्रचार?
पटना के एएन सिन्हा इंस्टीट्यूट ऑफ़ सोशल साइंस के प्रोफ़ेसर डीएम दिवाकर तेज प्रताप के बयानों को बिलकुल अलग तरह से देखते हैं.
दिवाकर कहते हैं,'' निगेटिव पब्लिसिटी भी पब्लिसिटी है, और राजनीति में ख़बरों में बने रहने का अपना महत्व है. रह गई बात किसी को संभालने की तो ये राजनीति में मुमकिन नहीं है, राजनीति में कोई किसी को कंट्रोल नहीं कर सकता. ''
वो एक उदाहरण के ज़रिए अपनी बात समझाते हुए कहते हैं,''कांग्रेस के नेता जगन्नाथ मिश्रा के भाई और नेता ललित बाबू के बेटे जनता पार्टी में थे, एक भाई संजय विचार मंच चलाते थे. लेकिन जब रात में घर पर सभी लोग डिनर पर बैठते तो चर्चा यही रहती कि पॉलिटिकल फ्रंट पर कोई भी खड़ा हो, न्यूज़ में हमें रहना है. तो हो सकता है कि हमें जो ऊपरी तौर पर कंट्रोवर्सी लग रहा है वो न्यूज़ में बने रहने का तरीका हो."
"एक बात और भी समझनी होगी की राजनीतिक हवा बदलने की बात से बीजेपी सतर्क तो हुई ही होगी तो ऐसे में संभव है कि तेज प्रताप को इस्तीफ़ा देने वाली बात कहने के लिए बोला गया हो ताकि ख़बर को दबा कर कुछ और चर्चा में लाया जा सके. हो सकता है तेजप्रताप ने जो कहा उससे जेडीयू और आरजेडी में जो बात बन रही थी उसमें कोई दिक्कत हुई हो तो क्राइसिस मैनेजमेंट के नाम पर ये किया जा रहा हो. ''
हालांकि अब तक ये साफ़ नहीं है कि आख़िर तेज प्रताप पार्टी में अपने पद से इस्तीफ़ा देने वाले हैं या पार्टी ही छोड़ने वाले हैं. उन्हें ट्वीट किए दो दिन हो चुके हैं और अब तक उन्होंने इस्तीफ़ा नहीं दिया है.
दिवाकर आख़िर में कहते हैं,"मुझे नहीं लगता इस बार भी कुछ होगा. हर बार की तरह दोनों भाइयों में मतभेद होता है और लालू जी से मुलाकात के बाद सब कुछ पहले जैसा हो जाता है. अब तक यही पैटर्न चलता आ रहा है."
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