जहांगीरपुरी हिंसा: यूपी-एमपी की तरह दिल्ली में भी चलेगा बुलडोज़र? - प्रेस रिव्यू

बीजेपी शासित उत्तरी दिल्ली निगर निगम ने मंगलवार को उत्तर पश्चिम ज़िले की डीसीपी को पत्र लिखकर जहांगीरपुरी इलाक़े में बुधवार और गुरुवार को एक अतिक्रमण विरोधी अभियान के लिए पुलिस सुरक्षा की मांग की है.

अंग्रेज़ी अख़बार 'द इंडियन एक्सप्रेस' ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि उत्तरी दिल्ली नगर निगम के सिविल लाइन ज़ोन के असिस्टेंट कमिश्नर ने पत्र में 400 पुलिसकर्मियों की मांग की है.

पत्र में '20 और 21 अप्रैल को अतिक्रमण विरोधी अभियान के दौरान क़ानून-व्यवस्था बरक़रार रखने के लिए महिला पुलिस और अतिरिक्त बल की' मांग की है.

उत्तरी एमसीडी के मेयर राजा इक़बाल सिंह ने बताया कि नगर निगम ने मंगलवार को भी अभियान के लिए पुलिस से मदद मांगी थी लेकिन पुलिसकर्मी उपलब्ध नहीं कराए जा सके. उन्होंने कहा है कि उन्हें उम्मीद है कि बुधवार को पुलिस का समर्थन मिल जाएगा.

ग़ौरतलब है कि हनुमान जयंती पर निकाले गए जुलूस के दौरान जहांगीरपुरी में दो समुदायों के बीच हिंसा हुई थी.

हाल ही में बीजेपी शासित मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश राज्यों में दंगों में कथित तौर पर शामिल रहे लोगों के घरों को अतिक्रमण विरोधी अभियानों के तहत बुलडोज़र से ढहाने के कई मामले सामने आ चुके हैं.

वहीं मंगलवार को दिल्ली बीजेपी के अध्यक्ष आदेश गुप्ता ने उत्तरी एमसीडी के मेयर को पत्र लिखकर मांग की थी कि जहांगीरपुरी हिंसा में गिरफ़्तार हुए लोगों के 'अवैध अतिक्रमण' को ढहा दिया जाए.

उत्तरी एमसीडी के कमिश्नर को भी उन्होंने पत्र लिखा था जिसमें उन्होंने कहा, "जैसा कि आप जानते हैं, हनुमान जयंती के मौक़े पर जहांगीरपुरी में शोभा यात्रा निकाली गई. कुछ असामाजिक तत्वों और दंगाइयों ने उस पर पत्थर बरसाए."

इस पत्र में आदेश गुप्ता ने आरोप लगाया, "इन असामाजिक तत्वों और दंगाइयों के पास स्थानीय आप विधायक और काउंसलर का समर्थन है और इसके परिणामस्वरूप इन लोगों ने बड़े स्तर पर अतिक्रमण किया हुआ है."

"इस कारण इन दंगाइयों के अवैध अतिक्रमण की पहचान करके उन पर बुलडोज़र चलाया जाना चाहिए."

दूसरी ओर आम आदमी पार्टी ने जहांगीरपुरी हिंसा के मुख्य अभियुक्त अंसार को बीजेपी का नेता बताया है.

जहांगीरपुरी हिंसा मामले में पांच पर लगा NSA

जहांगीरपुरी सांप्रदायिक हिंसा मामले में दिल्ली पुलिस कमिश्नर राकेश अस्थाना ने मंगलवार को पांच अभियुक्तों पर राष्ट्रीय सुरक्षा क़ानून (NSA) लगाने का आदेश दिया.

'द टाइम्स ऑफ़ इंडिया' अख़बार लिखता है कि यह फ़ैसला केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और अस्थाना के बीच बातचीत के बाद लिया गया है.

अख़बार लिखता है कि गृह मंत्री ने दिल्ली पुलिस कमिश्नर को दंगाइयों के ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई करने का आदेश दिया था और साथ ही कहा था कि वो एक उदाहरण पेश करें ताकि इस तरह की घटनाएं आगे न हों.

मुख्य अभियुक्त मोहम्मद अंसार, सलीम चिकना, यूनुस इमाम शेख़ उर्फ़ सोनू चिकना, दिलशाद और अहिर पर NSA लगाया गया है.

इस संबंध में क्राइन ब्रांच ने प्रस्ताव पेश किया था और मंगलवार को इस पर कमिश्नर ने अनुमति दी.

कोरोना: दिल्ली में मास्क लगाने पर हो सकता है अहम फ़ैसला

दिल्ली में लगातार बढ़ते कोरोना संक्रमण के मामलों के मद्देनज़र बुधवार को दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (DDMA) की समीक्षा बैठक होगी.

'अमर उजाला' अख़बार लिखता है कि मौजूदा हालात को देखते हुए दिल्ली के उप-राज्यपाल अनिल बैजल की अध्यक्षता में ऑनलाइन बैठक होगी और मामलों की बढ़ती रफ्तार और कोविड प्रतिबंधों के मद्देनज़र अहम फ़ैसले लिए जा सकते हैं.

आधिकारिक सूत्रों के हवाले से अख़बार लिखता है कि समीक्षा बैठक में इस बात की चर्चा हो सकती है कि मास्क को अनिवार्य रूप से उपयोग में लाया जाए या नहीं और भीड़ वाले इलाकों में मास्क नहीं पहनने वालों पर कितने का चालान तय किया जाए.

इसके साथ ही स्कूल में मास्क का इस्तेमाल और ऑफ़लाइन और ऑनलाइन पढ़ाई के हाइब्रिड मोड पर भी चर्चा होगी.

साथ ही सोशल डिस्टेंसिंग और अस्पताल की तैयारियों पर भी समीक्षा बैठक में चर्चा होगी. संभव है कि बैठक में अनिवार्य रूप से मास्क के उपयोग को सख्ती से लागू करने का आदेश जारी किया जाए. इसी तरह बाज़ारों में बढ़ने वाली भीड़ पर भी काबू पाने की पहल हो सकती है.

प्रशांत किशोर और कांग्रेस के बीच बातचीत अंतिम दौर में

'हिंदुस्तान' अख़बार अपनी रिपोर्ट में लिखता है कि चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर और कांग्रेस के बीच बातचीत अंतिम दौर में है. वह लगातार पार्टी नेताओं के साथ बैठक कर विधानसभा और लोकसभा चुनाव के लिए अपनी कार्य योजना पर चर्चा कर रहे हैं.

अख़बार लिखता है कि यह लगभग तय माना जा रहा है कि प्रशांत किशोर जल्द कांग्रेस का हाथ थाम सकते हैं. ऐसे में यह सवाल लाज़िमी है कि क्या वह पार्टी नेता के तौर पर अपनी कार्ययोजना को लागू कर पाएंगे.

देश की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी कांग्रेस के सामने अलग तरह की चुनौतियां हैं क्योंकि उसका संगठन कमज़ोर है और अंदरूनी कलह चरम पर है.

ऐसे में प्रशांत किशोर के लिए कांग्रेस का हाथ थामकर अपनी कार्ययोजना को अमलीजामा पहनाना आसान नहीं होगा. पार्टी में हाईकमान कल्चर और निर्णयों में देरी से भी उनकी चुनौतियां बढ़ेंगी.

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